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धमतरी: हिंदी साहित्य समिति के संरक्षक सुरजीत नवदीप का निधन, सीएम साय ने जताया दुख

Tue, 16 Sep 2025 08:11 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 16 Sep 2025 08:11 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के साहित्य जगत में शोक की लहर है। धमतरी हिंदी साहित्य समिति के संरक्षक लोकप्रिय मंच संचालक  अब नहीं रहे। 88 साल के नवदीप नगर के एक निजी अस्पताल में सोमवार की रात्रि अंतिम सांस ली।

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Patron of Hindi Sahitya Samiti Surjeet Navdeep passed away CM Sai expressed grief in Dhamtari
सुरजीत नवदीप का निधन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के साहित्य जगत में शोक की लहर है। धमतरी हिंदी साहित्य समिति के संरक्षक लोकप्रिय मंच संचालक  अब नहीं रहे। 88 साल के नवदीप नगर के एक निजी अस्पताल में सोमवार की रात्रि अंतिम सांस ली। उनका स्वास्थ्य बिग 11 सितंबर से वे भर्ती थे। उनके निधन से धमतरी ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का साहित्यिक समाज शोकाकुल है। दरसअल जिले सहित प्रदेश भर में अपनी अलग शैली के चलते ख्याति प्राप्त कवि रहे।उनकी रचनाएं,उनकी आवाज,उनकी उपस्थिति मंचों में जान आ जाती थीं। साहित्य प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनकी स्मृतियों को साझा कर रहे हैं। उनकी अंतिम यात्रा आज उनके निवास स्थान से निकाली गई। इधर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कवि सुरजीत नवदीप के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

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सुरजीत नवदीप का जन्म 1 जुलाई 1937 को मंडी भवलदीन, पंजाब जो वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है में हुआ था।उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त कर एमए (हिंदी) के साथ बीएड और सीपीएड की उपाधियां अर्जित की। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालीन सेवा देने के बाद वे सेवानिवृत्त होकर स्वतंत्र लेखन और साहित्य सेवा में सक्रिय रहे। नवदीप का नाम हिंदी हास्य-व्यंग्य कविता में सम्मानपूर्वक लिया जाता है। उन्होंने न केवल कविताओं का लेखन किया, बल्कि देश की विविध पत्र-पत्रिकाओं में गीत, गजल, हास्य-व्यंग्य कविता और कहानियों का प्रकाशन भी किया। रेडियो और दूरदर्शन में अनेक बार काव्यपाठ तथा कार्यक्रमों का संचालन कर साहित्य प्रेमियों के बीच लोकप्रियता अर्जित की।सुरजीत नवदीप के साथ बिताए लोगों ने बताया कि वह खुद से ज्यादा उनके साथ मौजूद लोगों का ख्याल रखते थे और उनके साथ मंच में बैठने का भी सौभाग्य मिला। बताया गया कि सुरजीत नवदीप धमतरी के लिए एक मिसाल रहे है। वहीं अंतिम संस्कार में पहुंचे लोगों ने उनके साथ बिताए समय को मीडिया से साझा किया।
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कवियों ने बताया की सुरजीत नवदीप के आने से मंच में एक अलग सी ऊर्जा कवियों में आ जाती थी। और सुरजीत नवदीप का निधन हो जाना हिंदी साहित्य के लिए आपूर्ति क्षति है। बताया कि जब भी बड़े मंचों में कवियों का जिक्र होता था,उसमें धमतरी के सुरजीत नवदीप का नाम गर्व से लिया जाता था। सुरजीत नवदीप जितने बड़े मंच संचालक थे उतने ही सरल स्वभाव व्यक्ति थे। और वह हर एक चीज को गहराई से महसूस करते थे। और छोटे व्यक्ति को कभी भी एहसास होने नहीं देता था कि वह छोटा है। बताया गया कि सुजीत नवदीप के निधन के बाद छत्तीसगढ़ के ही नहीं देश के तमाम साहित्यकार के दुखी है।

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