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ज्ञानभारतम अभियान में बड़ी खोज: पेंड्रा में मिलीं 500 साल पुरानी पांडुलिपियां, डिजिटल संरक्षण शुरू
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 May 2026 03:42 PM IST
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सार
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में ‘ज्ञानभारतम’ अभियान के तहत पेंड्रा से 200 से 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली हैं। इनमें श्रीमद भागवत गीता समेत कई धार्मिक ग्रंथ शामिल हैं। जिला प्रशासन ने जियो टैगिंग कर इन्हें डिजिटल रूप से सुरक्षित किया।
200 से 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मिली।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञानभारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण का कार्य तेजी से जारी है। अभियान का उद्देश्य देशभर में बिखरी ऐतिहासिक एवं धार्मिक पांडुलिपियों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण, डिजिटल संरक्षण एवं भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित संवहन सुनिश्चित करना है।
इसी क्रम में पेंड्रा के पुरानी बस्ती वार्ड क्रमांक चार में सर्वेक्षण के दौरान पंडित मोहन दत्त शर्मा एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के घरों से लगभग 200 से 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। इन पांडुलिपियों को कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन के समक्ष डिजिटल संरक्षण प्रक्रिया के माध्यम से सुरक्षित किया गया।
जिला प्रशासन के मार्गदर्शन एवं ‘ज्ञानभारतम’ अभियान के जिला समन्वयक डॉ. राहुल गौतम के नेतृत्व में सर्वे टीम ने पंडित मोहन दत्त शर्मा के निवास से लगभग 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित ‘अथ श्रीमद भागवत गीता’ सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ खोजे। कलेक्टर डॉ. देवांगन ने इस दुर्लभ धरोहर पर श्रीफल एवं दक्षिणा अर्पित कर मत्था टेका और इसे जिले की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत बताया। पांडुलिपियों की जियो टैगिंग कर ‘ज्ञानभारतम’ एप के माध्यम से डिजिटल रूप से सुरक्षित किया गया।
प्राप्त पांडुलिपियों में ‘लग्न चन्द्रिका’, ‘अथश्रीभागवतमहात्यं’, ‘यद्वादशमहावाक्य’, ‘रामचंद्राय नमः’ सहित संवत 1925 की कई हस्तलिखित धार्मिक पांडुलिपियां शामिल हैं। वहीं राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के घर से लगभग 200 वर्ष पुरानी जमींदारी वंशावली एवं पेंड्रागढ़ क्षेत्र के राजस्व और वन विभाग के पुराने नक्शे भी मिले, जिन्हें डिजिटल संरक्षण के तहत सुरक्षित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, एसडीएम विक्रांत अंचल, डिप्टी कलेक्टर अमित बेक, सीएमओ अमन दीप मिंज सहित सर्वे टीम के सदस्य उपस्थित रहे।
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इसी क्रम में पेंड्रा के पुरानी बस्ती वार्ड क्रमांक चार में सर्वेक्षण के दौरान पंडित मोहन दत्त शर्मा एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के घरों से लगभग 200 से 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। इन पांडुलिपियों को कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन के समक्ष डिजिटल संरक्षण प्रक्रिया के माध्यम से सुरक्षित किया गया।
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जिला प्रशासन के मार्गदर्शन एवं ‘ज्ञानभारतम’ अभियान के जिला समन्वयक डॉ. राहुल गौतम के नेतृत्व में सर्वे टीम ने पंडित मोहन दत्त शर्मा के निवास से लगभग 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित ‘अथ श्रीमद भागवत गीता’ सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ खोजे। कलेक्टर डॉ. देवांगन ने इस दुर्लभ धरोहर पर श्रीफल एवं दक्षिणा अर्पित कर मत्था टेका और इसे जिले की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत बताया। पांडुलिपियों की जियो टैगिंग कर ‘ज्ञानभारतम’ एप के माध्यम से डिजिटल रूप से सुरक्षित किया गया।
प्राप्त पांडुलिपियों में ‘लग्न चन्द्रिका’, ‘अथश्रीभागवतमहात्यं’, ‘यद्वादशमहावाक्य’, ‘रामचंद्राय नमः’ सहित संवत 1925 की कई हस्तलिखित धार्मिक पांडुलिपियां शामिल हैं। वहीं राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के घर से लगभग 200 वर्ष पुरानी जमींदारी वंशावली एवं पेंड्रागढ़ क्षेत्र के राजस्व और वन विभाग के पुराने नक्शे भी मिले, जिन्हें डिजिटल संरक्षण के तहत सुरक्षित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, एसडीएम विक्रांत अंचल, डिप्टी कलेक्टर अमित बेक, सीएमओ अमन दीप मिंज सहित सर्वे टीम के सदस्य उपस्थित रहे।

200 से 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मिली।

200 से 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मिली।