सीएम हाउस रायपुर में मना हरेली तिहार: बिखरी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा, पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे सीएम साय
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कृषि आधारित छत्तीसगढ़ का पहला हरेली तिहार पूरे प्रदेश भर में पारंपरिक रीति रिवाज के साथ मनाया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा, संस्कृति और कृषि जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने किसानों की खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि इस बार प्रदेश में अच्छी बारिश हो। खेती-किसानी का काम बेहतर तरीके से संपन्न हो, ताकि किसानों के जीवन में समृद्धि आए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। हरेली के अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों और ग्रामीण परिवेश से जुड़े आयोजनों ने पूरे कार्यक्रम को खास बना दिया। इस विशेष कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित बीजेपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों और अतिथियों ने भी प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर किसान भाई-बहनों को हरेली तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई देते हुए कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के बीच आत्मीय रिश्ते का उत्सव है। यह पर्व हमें अपनी धरती, पशुधन, कृषि उपकरणों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और प्रदेश की बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी से जुड़ी है। किसान की समृद्धि ही गांव और प्रदेश की खुशहाली का मजबूत आधार है।
पारंपरिक वेशभूषा में पिंक ऑटो से पहुंचे मुख्यमंत्री
हरेली के उत्सव में मुख्यमंत्री साय पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंगे नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा धारण कर वे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ महिला ऑटो चालक संगीता यादव के पिंक ऑटो में मुख्यमंत्री निवास परिसर से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। इस अनूठे अंदाज ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और उत्सव के माहौल में आत्मीयता का रंग घोल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश एवं नवग्रह पूजन के साथ हुई। मुख्यमंत्री ने मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग का अभिषेक किया और नांगर, रापा, कुदाल, फावड़ा सहित खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को नमन किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हरेली के समय तक खेती के अनेक प्रमुख कार्य पूरे हो चुके होते हैं और किसान प्रकृति एवं अपने कृषि साधनों की पूजा कर अच्छे कृषि वर्ष की कामना करते हैं। यह परंपरा हमारे पुरखों की प्रकृति के प्रति गहरी समझ और सम्मान को दर्शाती है।
गौमाता को खिलाई पारंपरिक लोंदी
सीएम साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में निर्मित गौशाला पहुंचकर गौमाता की आरती और पूजा-अर्चना की। उन्होंने गाय और बछड़े को हरा चारा, चना-गुड़ तथा पारंपरिक ‘लोंदी’ खिलाई। हरेली पर पशुधन को लोंदी खिलाने की लोक परंपरा पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और रोगों से बचाव की कामना से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन में पशुधन परिवार और कृषि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। हमारी लोक संस्कृति हमें पशुओं के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और संरक्षण की सीख देती है। आधुनिकता के साथ अपनी ऐसी उपयोगी और प्रकृति-सम्मत परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
पारिजात का पौधा लगाकर दिया हरियाली का संदेश
हरेली के प्रकृति संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने सीएम हाउस में पारिजात का पौधा लगाया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी पारिजात का पौधा रोपा। मंत्रीगण और विभिन्न निगम-मंडल और आयोगों के पदाधिकारियों ने भी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।