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सुकमा: आरक्षक माड़वी बुधरा ने की आत्महत्या, मानसिक रूप से परेशान था जवान, जांच जारी

अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा Published by: जगदलपुर ब्यूरो Updated Fri, 30 Jan 2026 03:36 PM IST
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सार

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में एक आरक्षक द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने पुलिस विभाग में गहरा शोक और स्तब्धता का माहौल पैदा कर दिया है।

Constable Madvi Budhra committed suicide in Sukma
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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में एक आरक्षक द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने पुलिस विभाग में गहरा शोक और स्तब्धता का माहौल पैदा कर दिया है। मृतक आरक्षक की पहचान माड़वी बुधरा, पिता हिरमा के रूप में हुई है, जो पोलमपल्ली थाना क्षेत्र के तोंगगुड़ा गांव का मूल निवासी था और वर्तमान में पोलमपल्ली थाने में अपनी सेवाएं दे रहा था। यह घटना पुलिस बल के भीतर मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर चिंताएं बढ़ाती है।

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घटना गुरुवार रात लगभग 12 बजे की बताई जा रही है, जब आरक्षक माड़वी बुधरा ने अपने ही आवास में संदिग्ध परिस्थितियों में जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे और प्रारंभिक जांच शुरू की। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मृतक आरक्षक पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। हालांकि, आत्महत्या के पीछे के सटीक कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस इस मामले के सभी संभावित पहलुओं, जिसमें व्यक्तिगत, पारिवारिक और ड्यूटी से जुड़े कारण शामिल हैं, की गंभीरता से जांच कर रही है।
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जांच और विभागीय कार्रवाई जारी
पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस संबंध में मर्ग कायम कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। विभागीय स्तर पर भी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं ताकि घटना की तह तक पहुंचा जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आत्महत्या के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

इस दुखद घटना के बाद पुलिस बल के सदस्यों के बीच गहरा शोक व्याप्त है। सहकर्मियों ने बताया कि आरक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठापूर्वक कर रहा था, लेकिन हाल के दिनों में वह मानसिक दबाव में दिखाई दे रहा था। घटना ने एक बार फिर पुलिस जैसे संवेदनशील और तनावपूर्ण पेशे में कार्यरत जवानों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल की आवश्यकता को रेखांकित किया है। अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच का आश्वासन दे रहे हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस कर्मियों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें लगातार तनाव, बाहरी खतरा और कभी-कभी अकेलापन शामिल है। ऐसे माहौल में आरक्षक माड़वी बुधरा की आत्महत्या पुलिस बल के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। यह घटना इस ओर भी इशारा करती है कि पुलिस विभाग को अपने जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करने की जरूरत है। मानसिक दबाव से निपटने के लिए परामर्श और सहायता सेवाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं न हों।

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