स्वदेश दर्शन 2.0 योजना: केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मिले डिप्टी सीएम शर्मा, 200 करोड़ के निवेश का रखा प्रस्ताव
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि सीएम विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है।
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कवर्धा विधायक व प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने आज सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की। इस मौके पर भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'स्वदेश दर्शन 2.0' के तहत महाप्रभु वल्लभाचार्य यज्ञ कुंड परिसर, चंपारण्य के सौंदर्यीकरण और भोरमदेव कॉरिडोर(जिला कबीरधाम) की परियोजनाओं के प्रस्ताव केंद्र को प्रस्तुत किए गए। इन दोनों परियोजनाओं पर कुल 200 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
महाप्रभु वल्लभाचार्य यज्ञ कुंड परिसर, चंपारण्य परियोजना अंतर्गत परिसर का संपूर्ण सौंदर्यीकरण, प्रवेश द्वार, तालाब का सौंदर्यीकरण, पार्किंग एरिया, महाप्रभु वल्लभाचार्य की प्रतिमा, म्यूजियम, कन्वेंशन सेंटर, भागवत कथा व प्रवचन हॉल, बच्चों के लिए गार्डन, कैफेटेरिया, सड़क निर्माण, लैंडस्कैपिंग, सोवेनियर शॉप, पेयजल और पब्लिक टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव है। इसी प्रकार कबीरधाम जिले के भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना के तहत ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर परिसर का विकास और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। परियोजना में पर्यटक सूचना केंद्र, शिव प्लाजा, झील और सरोधा डैम का सौंदर्यीकरण, बच्चों के लिए पार्क, गेस्ट हाउस, लाइब्रेरी, म्यूजियम, भंडारा भवन, मेला ग्राउंड, प्रवेश द्वार और पार्किंग निर्माण शामिल है।
इसके अतिरिक्त, छेरकी महल, मड़वा महल और रामचूआ मंदिर का सौंदर्यीकरण तथा जल क्रीड़ा के लिए घाट निर्माण का भी प्रस्ताव रखा है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इन योजनाओं की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि सीएम विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है। इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ पर्यटन को एक नई गति और दिशा मिलेगी। भोरमदेव कॉरिडोर और चंपारण्य परियोजना न केवल राज्य की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करेंगी, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा करेंगी।