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Kabirdham: ठगों को फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले दो एजेंट गिरफ्तार, फर्जी सिम से 14 लाख रुपये की ठगी

अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 07 Mar 2025 04:54 PM IST
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सार

कबीरधाम जिले के साइबर सेल ने फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले दो एजेंट को गिरफ्तार किया है, जो साइबर ठगों को फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराकर विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन ठगी को बढ़ावा दे रहे थे।

Two agents arrested for providing fake SIM cards to fraudsters fraud of Rs 14 lakhs through fake SIM card in K
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कबीरधाम जिले के साइबर सेल ने फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले दो एजेंट को गिरफ्तार किया है, जो साइबर ठगों को फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराकर विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन ठगी को बढ़ावा दे रहे थे। फर्जी सिम के माध्यम से करीब 14 लाख रुपए की ठगी हुई है। इस मामले को लेकर आज शुक्रवार को पुलिस ने खुलासा किया है।एडिशनल एसपी पंकज पटेल ने बताया कि कबीरधाम जिले से संचालित कुछ एजेंटों द्वारा बड़ी संख्या में फर्जी सिम कार्ड जारी किए जा रहे थे। इन सिम कार्डों का उपयोग बैंकिंग धोखाधड़ी, ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग व अन्य साइबर अपराधों में किया गया है।

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पुलिस द्वारा तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई सिम कार्ड जारी कर साइबर अपराधियों को बेचते थे, जिससे विभिन्न राज्यों में ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया गया।गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम भूपेंद्र जोशी, दुष्यंत जोशी है। यह दोनों आरोपी सगे भाई हैं, मूलतः ग्राम इंदौरी, पुलिस चौकी दशरंगपुर, थाना पिपरिया, जिला कबीरधाम के निवासी हैं। वर्तमान में ज्योतिबा फुले वार्ड, कवर्धा जिला कबीरधाम में निवास कर रहे थे।पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने कुल 85 नग फर्जी सिम कार्ड जारी किए,जिनमें से भूपेंद्र जोशी द्वारा 48 फर्जी सिम जारी किए गए। दुष्यंत जोशी द्वारा 37 फर्जी सिम जारी किए गए। 
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इनमें से 20 सिम कार्डों का उपयोग भारत के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी के 45 मामलों में किया गया। यह संख्या और भी अधिक हो सकती है, क्योंकि कई पीड़ितों ने अभी तक ऑनलाइन शिकायत दर्ज नहीं करवाई होगी।  भारत सरकार दूरसंचार मंत्रालय के पोर्टल द्वारा इन 85 नंबर को साइबर अपराध में लिप्त पाए जाने के कारण सेवा प्रदाता कंपनियों को नोटिस देकर बंद कर दिया गया है। जांच में यह भी पाया गया कि 85 मोबाइल नंबरों के कॉल डाटा रिकॉर्ड (CDR) निकालने पर सभी छत्तीसगढ़ सर्कल में सक्रिय हुए थे, लेकिन इनका उपयोग उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड जैसे राज्यों में साइबर ठगों द्वारा किया जा रहा था।एक ही टावर लोकेशन से इन सिम कार्डों की सक्रियता मिली, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा थे।अब तक इन सिम कार्डों का उपयोग कर 14 लाख 18 हजार 785 रुपए की ठगी की जा चुकी है। 

ठगी का तरीका: कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
दोनों आरोपी कबीरधाम जिले के अलग-अलग बाजार में जाकर लोगों के नाम पर सिम बेचते थे।जब कोई ग्राहक सिम लेने आता था, तो वे एक ही नाम पर दो सिम कार्ड जारी कर लेते थे।एक सिम ग्राहक को देकर दूसरा फर्जी सिम अपने पास रख लेते थे। बाद में इन फर्जी सिम कार्डों को साइबर अपराधियों को बल्क में बेच दिया जाता था।इस गिरोह का पर्दाफाश करने में कबीरधाम पुलिस की सतर्कता और कड़ी मेहनत की महत्वपूर्ण भूमिका रही।इस मामले में थाना कवर्धा में धारा 318(4), 61(2) भारतीय न्याय संहिता व धारा 66(सी) IT Act के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। कबीरधाम पुलिस ने आमजन से अपील किया कि है राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in का अधिक से अधिक उपयोग करें।किसी भी साइबर ठगी की सूचना तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930पर दें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पुलिस को दे।साइबर अपराध में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। 
 


 
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