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Korba: मां के अंतिम संस्कार के नाम पर 40 हजार की ठगी, क्यूआर कोड भेजकर करते थे इमोशनल ब्लैकमेल, आरोपी गिरफ्तार
Fri, 31 Jul 2026 07:28 PM IST
कोरबा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2026 07:28 PM IST
सार
मां के निधन और अंतिम संस्कार का झूठ बोलकर 40 हजार रुपये की साइबर ठगी करने वाले दो आरोपियों को कोरबी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। तकनीकी जांच के आधार पर जांजगीर-चांपा से दोनों को पकड़ा गया। पूछताछ में इमोशनल ब्लैकमेल कर ठगी करने का तरीका भी सामने आया।
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मां की मौत के नाम पर ठगी करने वाले आरोपी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरबा जिले में साइबर ठगों ने इंसानियत की हर सीमा लांघते हुए एक व्यक्ति को उसकी पहचान का फायदा उठाकर मां के निधन की झूठी खबर दी और अंतिम संस्कार के नाम पर 40 हजार रुपये ठग लिए। शिकायत के बाद कोरबी पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
जिले के कोरबी क्षेत्र में रहने वाले सुरेश चंद्र जायसवाल के साथ साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया, जिसने लोगों को सतर्क रहने की सीख दे दी। एक अनजान कॉल ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनका परिचित मुश्किल में है। फोन करने वाले ने बताया कि उसकी मां का निधन हो गया है और अंतिम संस्कार के लिए तत्काल पैसों की आवश्यकता है। बातचीत के दौरान आरोपी ने इतनी सहजता से हालात बताए कि पीड़ित को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। कुछ ही मिनटों में मोबाइल पर भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन कर उन्होंने 40 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
सच्चाई सामने आते ही उड़े होश
रुपये भेजने के कुछ समय बाद सुरेश चंद्र ने संबंधित परिचित से संपर्क किया। बातचीत में पता चला कि उसकी मां पूरी तरह स्वस्थ हैं और उसने किसी से कोई आर्थिक मदद नहीं मांगी थी। इसके बाद पीड़ित को समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार बन चुका है। उन्होंने तत्काल कोरबी चौकी में शिकायत दर्ज कराई।
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बैंक ट्रांजेक्शन से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
शिकायत मिलते ही पुलिस और साइबर सेल ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम जांजगीर-चांपा जिले के एक बैंक खाते में जमा हुई थी। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर उनकी तलाश शुरू कर दी।
इमोशनल ब्लैकमेल बन चुका था ठगी का तरीका
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने के लिए मौत, बीमारी और दुर्घटना जैसी घटनाओं का बहाना बनाते थे। फर्जी मोबाइल नंबर और अलग-अलग बैंक खातों के जरिए लोगों से तत्काल ऑनलाइन भुगतान करवाया जाता था, ताकि उन्हें सोचने का मौका ही न मिले।
दो आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल
पुलिस ने जांजगीर-चांपा जिले के उरदुमा निवासी आकाश यादव (28) और बोरतरी निवासी मयंक चौहान (22) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने ठगी की वारदात स्वीकार कर ली। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने नागरिकों से कहा है कि किसी भी अज्ञात कॉल, मैसेज या क्यूआर कोड के जरिए पैसे भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क कर जानकारी की पुष्टि जरूर करें। किसी भी भावनात्मक कहानी पर भरोसा कर जल्दबाजी में ऑनलाइन लेन-देन न करें। यदि साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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जिले के कोरबी क्षेत्र में रहने वाले सुरेश चंद्र जायसवाल के साथ साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया, जिसने लोगों को सतर्क रहने की सीख दे दी। एक अनजान कॉल ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनका परिचित मुश्किल में है। फोन करने वाले ने बताया कि उसकी मां का निधन हो गया है और अंतिम संस्कार के लिए तत्काल पैसों की आवश्यकता है। बातचीत के दौरान आरोपी ने इतनी सहजता से हालात बताए कि पीड़ित को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। कुछ ही मिनटों में मोबाइल पर भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन कर उन्होंने 40 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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सच्चाई सामने आते ही उड़े होश
रुपये भेजने के कुछ समय बाद सुरेश चंद्र ने संबंधित परिचित से संपर्क किया। बातचीत में पता चला कि उसकी मां पूरी तरह स्वस्थ हैं और उसने किसी से कोई आर्थिक मदद नहीं मांगी थी। इसके बाद पीड़ित को समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार बन चुका है। उन्होंने तत्काल कोरबी चौकी में शिकायत दर्ज कराई।
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बैंक ट्रांजेक्शन से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
शिकायत मिलते ही पुलिस और साइबर सेल ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम जांजगीर-चांपा जिले के एक बैंक खाते में जमा हुई थी। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर उनकी तलाश शुरू कर दी।
इमोशनल ब्लैकमेल बन चुका था ठगी का तरीका
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने के लिए मौत, बीमारी और दुर्घटना जैसी घटनाओं का बहाना बनाते थे। फर्जी मोबाइल नंबर और अलग-अलग बैंक खातों के जरिए लोगों से तत्काल ऑनलाइन भुगतान करवाया जाता था, ताकि उन्हें सोचने का मौका ही न मिले।
दो आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल
पुलिस ने जांजगीर-चांपा जिले के उरदुमा निवासी आकाश यादव (28) और बोरतरी निवासी मयंक चौहान (22) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने ठगी की वारदात स्वीकार कर ली। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने नागरिकों से कहा है कि किसी भी अज्ञात कॉल, मैसेज या क्यूआर कोड के जरिए पैसे भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क कर जानकारी की पुष्टि जरूर करें। किसी भी भावनात्मक कहानी पर भरोसा कर जल्दबाजी में ऑनलाइन लेन-देन न करें। यदि साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।