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Exclusive: छत्तीसगढ़ में मानसून मेहरबान, भारी बारिश से छलक रहे डैम, जानें बांधों में अब तक कितना भरा पानी

Fri, 31 Jul 2026 08:35 PM IST
Lalit Kumar Singh Lalit Kumar Singh
Updated Fri, 31 Jul 2026 08:35 PM IST
सार

Chhattisgarh dam: प्रदेश के सबसे बड़े बांगो डैम, गंगरेल, मॉडेम सिल्ली, दुधावा, तांदुला डैम में भरपूर मात्रा में पानी छलक रहा है। विभाग ने जो टारगेट तय किया है, उसे लेकर पूरा होने की उम्मीद जग गई है। बड़े बांधों में से एक गैगरेल डैम में अभी तक की स्थिति में जलभराव काफी बेहतर है।

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Chhattisgarh: Monsoon active in Chhattisgarh, Water level risen in dam
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

Chhattisgarh dam: छत्तीसगढ़ में मानसून मेहरबान है। पिछले दस दिनों से लगातार सक्रिय है। इस वजह से प्रदेश में जमकर बारिश हो रही है। प्रदेश के कई जिलों में नदी, नाले उफान पर हैं। वहीं प्रदेश के प्रमुख बांधों में भी पानी लबालब है। डैम में भरपूर मात्रा में पानी छलक रहा है। समय-समय पर डैम के गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। अभी तीन महीने तक बारिश होगी। ऐसे में बांधों के टारगेट के हिसाब से पूरी तरह से भरने की उम्मीद है। 80 फीसदी से अधिक जलाशय भर चुके हैं। धान की रोपाई को लेकर किसानों के लिये खुशी की बात है। इस साल किसानों को पानी की कमी नहीं होगी। सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध है। 

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छत्तीसगढ़ के पांच प्रमुख बांधों में पानी लबालब है। जल का आवक लगातार बढ़ रहा है, जो आगामी दिनों में और भी बढ़ने की उम्मीद है। प्रदेश के बांगो डैम, गंगरेल, मॉडेम सिल्ली, दुधावा, तांदुला डैम में भरपूर मात्रा में पानी छलक रहा है। विभाग ने जो टारगेट तय किया है, उसे लेकर पूरा होने की उम्मीद जग गई है। बड़े बांधों में से एक गैगरेल डैम में अभी तक की स्थिति में पानी का जलभराव काफी बेहतर है। बांध में बड़ी मात्रा में पानी होने से रायपुर समेत अन्य जिलों में पेयजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। धमतरी जिले के तीनों डैम में पानी भरपूर है। वहीं कोरबा जिले के हसदेव नदी पर स्थित प्रदेश का सबसे बड़ा बांध हसदेव बांगो (मिनी माता) में जलभराव बेहतर है। इस डैम की ऊंचाई करीब 87 मीटर है, जो राज्य का सबसे ऊंचा बांध हैं। 
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वहीं धमतरी जिले में तीन प्रमुख बांध हैं। महानदी पर स्थित सबसे लंबा और बड़ा बांध गंगरेल डैम (पंडित रविशंकर सागर), सLयारी नदी पर स्थित मुरूम सिल्ली (माडम सिल्ली डैम) जो एशिया का पहला सायन स्पिलवे डैम है। बालोद जिले में तांदुला डैम और सुखा नाला पर निर्मित प्रदेश की पुरानी परियोजना है। छत्तीसगढ़ में छोटे-बड़े और मध्यम बांधों को मिलाकर कुल 300 से अधिक बांध और जलाशय हैं। जिसमें पांच प्रमुख बांध हैं। 




सोंढूर बांध के पांच गेट खुले
धमतरी जिले में पिछले दो दिनों से लगातार हुई मूसलाधार बारिश का असर जलाशयों पर साफ दिखाई दे रहा है। लगातार बढ़ती जल आवक को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सोंढूर बांध के पांच गेट खोल दिए हैं। फिलहाल सोंढूर नदी में पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। यदि कैचमेंट एरिया में इसी तरह से बारिश का सिलसिला जारी रहा और जलस्तर में बढ़ता रहा तो पानी छोड़ने की मात्रा और बढ़ाई जा सकती है। इसे देखते हुए नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट जारी कर किया गया है। जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और जलाशयों में तेज गति से पानी पहुंच रहा है। स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग धमतरी जिले के तीनों प्रमुख डैम सोंढूर, दुधावा और गंगरेल डैम पर पैनी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की बाढ़ जैसी स्थिति से बचा जा सके। जलाशयों का जल स्तर तय सीमा में बना रहे। 


सोंढूर में 15,256 क्यूसेक जलभराव
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सोंढूर जलाशय के कैचमेंट एरिया में वर्तमान में 15,256 क्यूसेक पानी की आवक है। पानी को कंट्रोल करने के लिये पांच गेट खोलकर सोंढूर नदी में पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जरूरत पड़ने पर जल निकासी की मात्रा भी बढ़ाई जाएगी। सोंढूर जलाशय से नहर के माध्यम से पानी दुधावा डैम की ओर भेजा जा रहा है। वहीं दुधावा से आगे गंगरेल जलाशय तक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे तीनों डैम लेवल बना रहे। किसी एक जलाशय पर ज्यादा दबाव न पड़े।

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार दुधावा जलाशय अपनी कुल क्षमता के 81.14 प्रतिशत तक भर चुका है। यहां 7,454 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई है, जबकि 3,000 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा जा रहा है, जो आगे गंगरेल जलाशय तक पहुंचेगा।वहीं सोंढूर जलाशय अपनी कुल क्षमता के लगभग 75.02 प्रतिशत पर है और इसमें लगातार जलस्तर बढ़ रहा है. इधर गंगरेल (रविशंकर सागर) जलाशय में भी पानी की आवक लगातार बढ़ रही है। दोपहर 2 बजे तक जलाशय का जलस्तर 344.12 मीटर दर्ज किया गया। गंगरेल में 12,522 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जबकि केवल 150 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जलाशय अपनी कुल भंडारण क्षमता के 50.86 प्रतिशत तक भर चुका है।विभाग का कहना है कि यदि बारिश का क्रम इसी तरह जारी रहा तो गंगरेल से भी चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा जा सकता है।


छत्तीसगढ़ के प्रमुख बांध

  • हसदेव 
  • गंगरेल
  • मुरूम सिल्ली 
  • सोंढूर 
  • तांदूला
  • दुधावा 
  • खेरकट्टा जलाशय

 

जानें कितना भरा पानी

  • दुधावा जलाशय - 81.14 प्रतिशत भरा, 7,454 क्यूसेक पानी की आवक
  • गंगरेल डैम:  50.86 प्रतिशत तक भरा, 12,522 क्यूसेक पानी की आवक
  • 150 क्यूसेक छोड़ा गया पानी
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