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Exclusive: रायपुर के इस मंदिर में करें 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन, रूद्रेश्वर महादेव से लिपटे रहते थे नाग-नागिन
सार
Rudreshwar Mahadev mahadevghat: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन आप देश के अन्य राज्यों में किए होंगे। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी एक ऐसा अनोखा शिव मंदिर है जिसके गर्भगृह में 12 ज्योतिर्लिंग विराजित हैं। यदि आप किसी कारणवश देश के अन्य राज्यों में 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर पाते हैं, तो आप रायपुर के महादेव घाट स्थित रूद्रेश्वर महादेव मंदिर में आकर 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते हैं।
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विस्तार
Rudreshwar Mahadev mahadevghat: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन आप देश के अन्य राज्यों में किए होंगे। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी एक ऐसा अनोखा शिव मंदिर है जिसके गर्भगृह में 12 ज्योतिर्लिंग विराजित हैं। यदि आप किसी कारणवश देश के अन्य राज्यों में 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर पाते हैं, तो आप रायपुर के महादेव घाट स्थित रूद्रेश्वर महादेव मंदिर में आकर 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते हैं।
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पुराणों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां के 12 ज्योतिर्लिंग की महत्ता वैसी नहीं है जैसा कि देश के अन्य राज्यों में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग की है पर 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' वाली कहावत आपने जरूर सुनी होगी। यदि श्रद्धा भाव हो तो वही पुण्य लाभ आपको इस मंदिर में भी मिलेंगे। 12 ज्योतिर्लिंग के स्वरूप की तरह ही यहां भी दिखाने का बेहतर प्रयास किया गया है। खास और बड़ी बात यह है कि इस मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों के साथ ही भगवान पशुपतिनाथ का भी शिवलिंग है। इस तरह से देखा जाए तो कुल 13 ज्योतिर्लिंग इस मंदिर में स्थापित है। इस तरह से श्रद्धालु कुल 13 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकते हैं।
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पिछली शिवरात्रि पर हुआ था मंदिर का कायाकल्प
पिछले शिवरात्रि में इस मंदिर का कायाकल्प किया गया था। उस दौरान 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित किए गए थे। इसके साथ ही मंदिर में भगवान बजरंगबली की पंचमुखी मूर्ति दक्षिण दिशा में स्थापित है। वहीं पश्चिम दिशा में श्रीकृष्णा और राधा रानी का मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण सन् 1969 में किया गया था। उस दौरान यहां पर केवल रुदेश्वर महादेव को ही स्थापित किया गया था। चक्रधारी समाज भूपेंद्र चक्रधारी के पूर्वजों ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। उनकी पांच पीढ़ियां इस मंदिर की सेवा कर चुकी हैं। द्धादश ज्योतिर्लिंग का यह मंदिर रुद्रेश्वर महादेव के नाम से विख्यात है। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से लोग इस मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। वही किसी वजह से श्रद्धालु दूसरे राज्य में जाकर 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर पाते हैं, तो वह भी यहां पर दर्शन करने के लिए आते हैं।
12 ज्योतिर्लिंग के स्वरूप को दिखाने का प्रयास
सावन और महाशिवरात्रि पर इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। सावन में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, जो भी श्रद्धालु यहां आते हैं, वे 12 ज्योतिर्लिंगों के साथ ही पशुपतिनाथ का भी दर्शन करते हैं। इस प्रकार से कुल 13 शिवलिंगों के दर्शन करते हैं। धार्मिक मान्यता की बात करें तो जो भी श्रद्धालु यहां पर भक्ति-भाव से पूजा अर्चना करते हैं तो महादेव उनके सभी मनोरथ पूरा करते हैं। इस मंदिर के पांचवीं पीढ़ी के पुजारी प्रेम गिरी गोस्वामी बताते हैं कि इस मंदिर को लेकर भक्तों की काफी आस्था है। यह द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर है। रुद्रेश्वर महादेव का यहां मुख्य मंदिर है। इसके साथ ही यहां पर 12 ज्योतिर्लिंग विराजित हैं पशुपति नाथ का भी शिवलिंग है। वर्ष 2026 में इस मंदिर का कायाकल्प किया गया था। इस दौरान 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की गई थी। इसके साथ ही पशुपतिनाथ शिवलिंग की भी स्थापना की गई थी।
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शिवलिंग से लिपटे रहते थे नाग-नागिन
पुजारी गोस्वामी ने दावा करते हुए बताया कि जब बचपन में वे अपने पिता के साथ इस मंदिर में आया करते थे, उस दौरान बेल के पेड़ों पर सांप लिपटे रहते थे। शिवलिंग पर भी चार-पांच सर्प लिपटे रहते थे। इस मंदिर में एक नाग-नागिन का जोड़ा भी रहता था, जो शिवलिंग से लिपटे रहता था। किसी वजह से दूसरे राज्यों में जाकर भक्त 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर पाते हैं, तो यहां पर आकर दर्शन कर सकते हैं। आस्था के साथ पूजा अर्चना करें तो सभी ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लाभ मिलते हैं। 12 ज्योतिर्लिंग के स्वरूप में ही यहां 12 शिवलिंग स्थापित हैं।