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मिड-एयर टर्बुलेंस: हवा के अशांत प्रवाह में भटकती और कंपित होती उड़ानें, आखिर कैसे दूर होगा खतरा?

Mon, 10 Aug 2026 05:34 PM IST
Rajneesh Kapur रजनीश कपूर
Updated Mon, 10 Aug 2026 05:34 PM IST
सार

CAT सबसे खतरनाक होता है क्योंकि यह साफ आसमान में, बादलों के बिना होता है और रडार पर अक्सर नहीं दिखता। जेट स्ट्रीम के आसपास विंड शीयर, पहाड़ी लहरें या संवहनी गतिविधि (मानसून में आम) इसके मुख्य कारण हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण CAT की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है।

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Air India Flight Turbulence: What Pilots Do When a Plane Suddenly Drops
एयर इंडिया की फ्लाइट गिरी - फोटो : Ai

विस्तार

हाल ही में 4 अगस्त 2026 को एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली फ्लाइट AI-2379 को बीच आसमान में अचानक खराब मौसम और अशांति का सामना करना पड़ा। एयरबस A320 का यह विमान लगभग 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था, लेकिन अचानक वह लगभग 300 फीट की ऊंचाई गिर गया। इस घटना में 13 यात्री और 4 क्रू सदस्यों सहित कुल 17 लोग घायल हुए। विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंचा, लेकिन घटना ने विमानन सुरक्षा, टर्बुलेंस की प्रकृति और पायलट की जिम्मेदारी पर गंभीर बहस छेड़ दी है। डीजीसीए और एएआईबी जांच जारी है। कुछ रिपोर्ट्स में तकनीकी खराबी की संभावना भी जताई गई है, साथ ही पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटाया गया और स्क्रीनिंग की गई।

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टर्बुलेंस क्या है?

टर्बुलेंस हवा के अशांत प्रवाह को कहते हैं, जो विमान को ऊपर-नीचे या इधर-उधर झटके देता है। यह मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है,

  • थर्मल (सूर्य की गर्मी से गर्म हवा का ऊपर उठना),
  • मैकेनिकल (पहाड़ों या इमारतों से हवा का टकराव),
  • फ्रंटल (मौसमी मोर्चों पर हवा का मिलना),
  • क्लियर एयर टर्बुलेंस (CAT)।


गौरतलब है कि CAT सबसे खतरनाक होता है क्योंकि यह साफ आसमान में, बादलों के बिना होता है और रडार पर अक्सर नहीं दिखता। जेट स्ट्रीम के आसपास विंड शीयर, पहाड़ी लहरें या संवहनी गतिविधि (मानसून में आम) इसके मुख्य कारण हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण CAT की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है।

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एयर इंडिया की घटना मानसून काल में हुई, जब भारतीय आकाश विशेष रूप से अस्थिर रहता है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार विमान ने ऊंचाई में अचानक परिवर्तन दर्ज किया। यात्री बताते हैं कि अचानक झटका लगा, लोग सीट से उछल गए और कुछ तो छत से टकराए।
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टर्बुलेंस से बचने का तरीका

टर्बुलेंस को पूरी तरह रोकना असंभव है, लेकिन उसे कम अवश्य किया जा सकता है। पायलट पूर्व उड़ान मौसम पूर्वानुमान, पायलट रिपोर्ट्स (PIREPs), ऑनबोर्ड रडार और एटीसी जानकारी का उपयोग करते हैं। तूफान या संवहनी क्षेत्रों से दूर रूट चुनना, ऊंचाई बदलना या गति कम करना (टर्बुलेंस पेनिट्रेशन स्पीड) उपाय हैं।

ऑटोपायलट को अक्सर चालू रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह अचानक इनपुट से बचाता है। ऐसे में केबिन में सीट बेल्ट साइन ऑन करना, यात्रियों को सतर्क करना और क्रू को सुरक्षित स्थिति में लाना पायलट की ज़िम्मेदारी है। यात्रियों को भी सीट बेल्ट हमेशा हल्के से बंधे रखना चाहिए, भले ही साइन ऑफ क्यों न हो।

पायलट की जिम्मेदारी

उल्लेखनीय है कि पायलट की प्राथमिक जिम्मेदारी विमान और यात्रियों की सुरक्षा है। टर्बुलेंस का सामना होने पर वे विमान का एटिट्यूड (रवैया) बनाए रखते हैं, ऊंचाई की बजाय स्थिरता पर ध्यान देते हैं और अचानक नियंत्रण इनपुट से बचते हैं। एयरबस जैसे फ्लाई-बाय-वायर विमान में सुरक्षा सीमाएं होती हैं। पायलट क्रू और यात्रियों को चेतावनी देते हैं, अगर संभव हो तो क्षेत्र से बाहर निकलते हैं और लैंडिंग तक नियंत्रण बनाए रखते हैं। इस घटना में पायलटों ने विमान को स्थिर कर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की।

पायलट की चुनौती

वहीं कुछ खबरों के अनुसार पायलटों की स्क्रीनिंग और जांच का जिक्र है, जिससे पायलट की त्रुटि या अन्य कारणों की चर्चा शुरू हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि 300 फीट की अचानक गिरावट को सीधे पायलट त्रुटि से जोड़ना मुश्किल है। एक विशेषज्ञ के अनुसार, पायलट के लिए जानबूझकर या नशे में इतनी ऊंचाई गिराना लगभग असंभव है। टर्बुलेंस या संभावित तकनीकी खराबी (फ्लाई-बाय-वायर में क्षणिक फॉल्ट की संभावना) अधिक संभावित लगती है। जांच पूरी होने तक दोषारोपण अनुचित है। पायलट अक्सर अदृश्य CAT का शिकार होते हैं; रडार नमी का पता लगाता है, शुष्क अशांति का नहीं।

इसके साथ ही भारत के डीजीसीए को भी इस दिशा में कमर कसनी होगी। ऐसे ढेरों उदाहरण हैं जहां नशे में रहने के बावजूद कुछ चुनिंदा पायलटों ने न सिर्फ विमान उड़ाए बल्कि सजा से भी बच गए। वहीं जो पायलट स्वेच्छा से, उड़ान पूर्व ऐसा स्वीकारते हैं कि उन्होंने सीमित मात्र में ही नशीले पदार्थों का सेवन किया है, तो उन पर कठोर से कठोर करवाई की जाती है। ऐसे में डीजीसीए को अपने गिरेबान में झांके बिना किसी पर दोष नहीं डालना चाहिए।  

यात्रा सुरक्षा सुझाव


विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन व अन्य कारणों से टर्बुलेंस बढ़ रही है और यात्री सुरक्षा के लिए सीट बेल्ट अनिवार्य होनी चाहिए। सिंगापुर एयरलाइंस फ्लाइट SQ321 (मई 2024) में म्यांमार के ऊपर गंभीर टर्बुलेंस से एक यात्री की मौत और दर्जनों घायल हुए। जांच में पाया गया कि रडार ने मौसम का सही पता नहीं लगाया और पायलटों की कार्रवाई उचित थी। इसी तरह डेल्टा और अन्य एयरलाइंस की घटनाएं भी हुई हैं जहां अचानक झटके से चोटें आईं। भारतीय आकाश में भी इंडिगो और एयर इंडिया के साथ ऐसी घटनाएं हुई हैं।

विमान हादसों में पायलट को दोष देना आसान है, लेकिन यह तब तक अनुचित है जब तक जांच साबित न करे। वे जटिल परिस्थितियों में प्रशिक्षित होते हैं और अधिकांश मामलों में विमान को सुरक्षित निकालते हैं। बेहतर मौसम पूर्वानुमान तकनीक, यात्री जागरूकता और सीट बेल्ट अनुशासन ही वास्तविक समाधान हैं। टर्बुलेंस प्रकृति की चुनौती है; मानव त्रुटि या तकनीक की खामी अलग जांच का विषय है। सुरक्षित उड़ान के लिए सभी पक्षों, पायलट, एयरलाइन, नियामक और यात्री, को मिलकर काम करना होगा।

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नोट- लेखक दिल्ली स्थित कालचक्र समाचार ब्यूरो के संपादक हैं।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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