अभिषेक बनर्जी के साथ हादसा: 7 सवाल जो खुद टीएमसी को ही कटघरे में खड़ा कर रहे, कहीं ये साजिश तो नहीं?
अभिषेक बनर्जी के साथ यह घटना राजपुर सोनारपुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 9 में हुई। हैरानी की बात यह है कि 35 वार्डों वाली इस नगरपालिका में तृणमूल कांग्रेस के 34 पार्षद होने के बावजूद, वार्ड नंबर 9 के स्थानीय पार्षद समेत कोई भी पार्षद घटनास्थल पर मौजूद नहीं था।
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ममता बनर्जी जब सड़क पर विरोध करने उतरी थीं, तब आम जनता सीपीएम से त्रस्त व परेशानहाल थी। इसलिए लोगों का भरपूर समर्थन मिला था। अभिषेक बनर्जी जब सड़क पर उतरे तो आम जनता इन्हीं की पार्टी व सरकार से त्रस्त और परेशानहाल होकर निजात पाई थी। ऐसे में जन समर्थन तो दूर विरोध का खुद सामना करना था।
सवाल अनगिनत हैं, लेकिन ये सवाल भाजपा सरकार से पहले अभिषेक बनर्जी, ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस से बनते हैं। दिन में जब अभिषेक बनर्जी बेलेघाटा गए, तब उनके साथ केवल स्थानीय विधायक कुणाल घोष मौजूद थे। कोई अन्य जनप्रतिनिधि या वरिष्ठ नेता उनके साथ नहीं दिखा।
वहीं शाम को जब वे सोनारपुर पहुंचे, तब उनके साथ कोई भी नेता नहीं था। आखिर ऐसा क्यों? क्या यह महज संयोग था या इसके पीछे कोई और वजह थी? यह सवाल अब स्वाभाविक रूप से उठ रहा है।
दोपहर से ही जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं को फोन कर कार्यक्रम में मौजूद रहने का अनुरोध किया जाने लगा। लेकिन जिनसे भी संपर्क हुआ, किसी ने खुद को इलाके से बाहर बताया तो किसी ने कोई न कोई कारण बताकर किनारा कर लिया।
एक नेता ने तो यहां तक सलाह दे दी कि मौजूदा माहौल को देखते हुए कार्यक्रम फिलहाल रद्द कर देना ही बेहतर होगा। कई लोगों ने कॉल फॉरवर्डिंग या कॉल डाइवर्ट का सहारा लिया, जबकि कुछ ने अपने फोन ही स्विच ऑफ कर दिए। बताया जाता है कि कई नेताओं को तो अभिषेक बनर्जी ने स्वयं भी फोन किया था।
अभिषेक बनर्जी के साथ यह घटना राजपुर सोनारपुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 9 में हुई। हैरानी की बात यह है कि 35 वार्डों वाली इस नगरपालिका में तृणमूल कांग्रेस के 34 पार्षद होने के बावजूद, वार्ड नंबर 9 के स्थानीय पार्षद समेत कोई भी पार्षद घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। केवल राजपुर सोनारपुर पंचायत समिति के सभापति बलाईचंद बारीक ही वहां उपस्थित थे।
सोनारपुर दक्षिण की पूर्व विधायक लवली मित्रा की अनुपस्थिति भी कई सवाल खड़े करती है। जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता में थी, तब अभिषेक बनर्जी के निकट खड़े होने के लिए नेताओं के बीच होड़ लगी रहती थी। ऐसे में इस घटना के दौरान उनकी गैरमौजूदगी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
इस मामले में जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से तीन तृणमूल कांग्रेस से जुड़े बताए जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि ये लोग लवली मित्रा के समर्थक और कार्यकर्ता हैं।
इतना बड़ा मामला, कोई भी शिकायत दर्ज नहीं
यदि यह सही है, तो मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों और गुटबाजी से भी जुड़ा हुआ दिखाई देता है।
हादसे के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरों के आधार पर पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गिरफ्तारियां की हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में न तो अभिषेक बनर्जी और न ही तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।
दिलचस्प बात यह है कि राजपुर सोनारपुर नगरपालिका के चेयरमैन पल्लव कुमार दास ने उसी दिन अपराह्न तीन बजे पार्षदों की बैठक बुलाई थी, लेकिन अधिकांश पार्षदों की अनुपस्थिति के कारण बैठक रद्द करनी पड़ी।
अभिषेक बनर्जी ने घटना के दौरान जिन लोगों से स्वयं फोन पर संपर्क किया था, उनमें स्थानीय पार्षद अनिता बसु भी शामिल थीं। उस समय अनिता बसु और उनके पति हेमंत बसु अपने घर पर ही मौजूद थे।
- तृणमूल नेता हेमंत बसु ने अभिषेक बनर्जी से घटनास्थल पर न आने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि इलाके का माहौल अत्यंत तनावपूर्ण है।
- सोनारपुर उत्तर की पूर्व विधायक फिरदौस बेगम ने भी अभिषेक बनर्जी को यही सलाह दी थी। बताया जाता है कि उनके घर के बाहर भी उस समय धरना और विरोध-प्रदर्शन चल रहा था।
बहरहाल अभिषेक बनर्जी, ममता बनर्जी की तरह सड़क और विरोध की राजनीति करने उतरे थे। शायद वे यह भूल गए कि ममता बनर्जी का संघर्ष वाममोर्चा को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए था और उन्होंने सत्ता से बाहर रहते हुए सड़क की लड़ाई लड़ी थी। इसके विपरीत, अभिषेक बनर्जी सत्ता से बेदखल होने के बाद सड़क पर उतरे थे।
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