विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: अलविदा बेला टार- फिल्म के अनोखे विजन वाला निर्देशक
- बेला टार और लाजलो क्रासनाहोरकाई की जोड़ी ने मिल कर ‘शेटनटैंग’, ‘डैम्नेशन’, ‘द टुरिन होर्स’, ‘द मेलंकली ऑफ रेजिस्टेंस’, ‘द मैन फ्रॉम लंडन’ तथा लघु फिल्म ‘द लास्ट बोट-सिटी लाइफ’ बनाईं।
विस्तार
21 जुलाई 1955 को पैदा हुए हंगरी के सिने-निर्देशक बेला टार (Béla Tarr) इस साल की शुरुआत में 6 जनवरी 2026 को नहीं रहे। 70 साल के बेला टार बीमारी से बुदापेस्ट में गुजरे। 24 पुरस्कार विजेता बेला टार ने यूं तो एक-से-एक अनोखी 18 फिल्मों का निर्देशन किया। मगर वे अपनी उन फिल्मों केलिए जाने जाते हैं, जो उन्होंने हंगरी के ही साहित्यकार लाजलो क्रासनाहोरकाई (Laszlo Krasznahorkai) की साझेदारी में बनाई। दोनों ही अपने प्रयोगों केलिए जाने जाते हैं।
एक ने अपनी फिल्मों में भरपूर प्रयोग किए तो दूसरे के साहित्यिक प्रयोगों ने उन्हें नोबेल के मंच तक पहुंचाया।
बेला टार और लाजलो क्रासनाहोरकाई की जोड़ी ने मिल कर ‘शेटनटैंग’, ‘डैम्नेशन’, ‘द टुरिन होर्स’, ‘द मेलंकली ऑफ रेजिस्टेंस’, ‘द मैन फ्रॉम लंडन’ तथा लघु फिल्म ‘द लास्ट बोट-सिटी लाइफ’ बनाईं। दोनों ने मिल कर ‘शेटनटैंग’, ‘द टुरिन होर्स’, ‘द मैन फ्रॉम लंदन’, ‘वर्कमाइस्टर हार्मोनीज’, ‘डैम्नेशन’, ‘द लास्ट बोट-सिटी लाइफ’ (‘द मेलंकली ऑफ रेजिस्टेंस’) के स्क्रीनप्ले लिखे (इसमें से ‘शेटनटैंग’, ‘डैम्नेशन’, ‘द मेलंकली ऑफ रेजिस्टेंस’ लाजलो की रचनाएं हैं)।
‘ट्युरिन हॉर्स’ फेड्रिक नीत्से की रचना है। ‘द मैन फ्रॉम लंडन’ जॉर्ज्स सिमेनॉन के काम पर आधारित है, वैसे बेला ने कुल 15 फिल्मों का लेखन किया, 34 फिल्में प्रड्यूस की इसके साथ 4 फिल्मों में अभिनय भी किया।
मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है, मैंने इस साल के साहित्य के नोबेल पुरस्कृत हंगेरियन रचनाकार लाजलो क्रासनाहोरकाई (Laszlo Krasznahorkai) लेखक/कवि (नौ उपन्यास, ढेर सारी कहानियां एवं लेख) को बहुत नहीं पढ़ा है। हालांकि फिल्म के माध्यम से मेरा उनसे परिचय हुआ और कुछ किताबें जुटा ली थीं।
‘विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया’ लिखते हुए सिने-निर्देशक बेला टार (Béla Tarr) को जाना। बेला ने लाजलो के काम पर सात घंटे की ‘सैटनटैंगो’ बनाई। बेला दीमी गति क फिल्म बनाने केलिए प्रसिद्ध हैं।
पेरिस रिव्यू (225) के लिए एडम थर्वेल से बातचीत करते हुए लाजलो कहते हैं, उन्होंने केवल बेला टार के साथ काम किया है। उन्होंने बेला को सब कुछ दिया और बेला ने सब कुछ लिया। यह सहभागिता से अधिक था। उनकी स्क्रिप्ट भी साहित्यिक होती है, पर वे कहते हैं, बिलाशक सिनेमा एक कला है।
अगर आप के काम पर निर्देशक फिल्म बनाना चाहता है, तो आपको यह स्वीकारना होगा, वह निर्देशक की है, फिल्म उसकी होगी अन्यथा यह एक गलती होगी। लाजलो संवाद लिखते हैं, कई बार इसे देख बेला कहते, यह स्क्रिप्ट नहीं है, इसे फिल्माया नहीं जा सकता है। लेकिन दोनों ने मिल कर सिने-प्रेमियों को उपहार स्वरूप बहुत कुछ दिया।
असल में लाजलो ने बेला टार के साथ पहले ‘डेम्नेशन’ पर फिल्म बनाई। अपने ‘सैटनटैंगो’ के प्रकाशन के साथ ही वे बेला टार एवं उनकी पत्नी एग्नेस हेरनस्की (कई फिल्मों की सह-निर्देशक भी) के साथ इस पर फिल्म बनाना चाहते थे। बेला टार हंगेरियन फिल्म दुनिया में पसंद नहीं किए जाते थे, कम्युनिस्ट प्रशासन के अंतर्गत ‘सैटनटैंगो’ पर फिल्म बनाने की अनुमति नहीं मिली।
लाजलो ने सोचा बात खत्म पर एग्नेस उन्हें छोड़ने वाली न थी। उसने कहा, वे एक नई स्क्रिप्ट तैयार करें, यदि ऐसा नहीं किया, तो बेला आत्महत्या कर लेंगे। हालांकि लाजलो के अनुसार यह उन्हें फांसने की उसकी एक चाल थी। तो पहले ‘डेम्नेशन’ बनी। फिर ‘सेटनटैंगो’ (3 पुरस्कार), द टुरिन होर्स’ (7 पुरस्कार), ‘द मेलंकली ऑफ रेजिस्टेंस’ (5 पुरस्कार) बनी।
लाजलो के अनुसार अब वे बेला टार के साथ नहीं हैं, क्योंकि हंगरी में फिल्म बनाना आसान नहीं रह गया है, आर्थिक सहायता मिलना मुश्किल है।
अभी हाल में मैंने ‘द टुरिन होर्स’ देखी। इसकी अन्य सिनेमैटिक विशेषताओं के अलावा इसे देखते हुए मुझे प्रेमचंद के ‘कफन’, ‘वेटिंग फॉर गोदो’ की झलक मिली। मार्केस के लेखन की याद आई। बेला तार एवं एवं उनकी पत्नी एग्नेस हेरनस्की ने मिल कर इसे निर्देशित किया है।
छ: दिन निरंतर चल रही तूफानी हवा के बीच चलती फिल्म को देखना एक बारगी मार्केस के यहां होने वाली लगातार बारिश की याद दिलाता है। अपंग पिता एवं बेटी केलिए कहीं निस्तार नहीं है।
फिल्म ‘मचूगा’
फिल्म एक तगड़े घोड़े से प्रारंभ होती है, जो स्वयं एक मजबूत किरदार है, पता नहीं क्यों फिल्म में उसे बीच रास्ते छोड़ दिया जाता है। एक दिन मालिक से मार खाकर घोड़ा खाना-पीना छोड़ देता है, वह भी उससे काम लेना छोड़ देता है। बेटी उसे घास खाने, पानी पीने का आग्रह करती है, मगर वह टस-से-मस नहीं होता है। वे जानते हैं, इसी के साथ उनकी बर्बादी शुरू हो गई है।
बर्बादी देख चिली की फिल्म ‘मचूगा’ याद आई। अंत में एक रोशनी जलती देख, ‘राम की शक्ति पूजा’ का स्मरण हो आया, लगा शायद नकारात्मक शक्ति हार जाएगी, तूफान-बर्बाद रुक जाएगी। पर वह भी बुझ गई। लेकिन पात्रों की जिजीविषा माननी पड़ेगी, वे संघर्ष करना नहीं छोडते हैं। ठीक वैसे ही जैसे ‘चेजिंग होमर’ का अंत है। बेला टार सामान्य मनुष्य की गरिमा की बात करते हैं। यही लाजलो का भी प्रतिपाद्य है।
लाजलो के इंग्लिश अनुवादक जॉर्ज सियरटिस के अनुसार क्रासनाहोरकाई का प्रमुख सार है, कुचक्र, अपराध, बेवफाई, भाग निकलने की आशा और सबसे ऊपर विश्वास एवं निरंतर विश्वासघात। उनके अनुसार ‘सैटनटैंगो’ के केंद्र में शराब पीकर किया गया शैतान का नृत्य है, कभी टैंगो के संदर्भ में, कभी चारडास (हंगेरियन नृत्य) के रूप में है।
यह नृत्य स्थानीय सराय में चल रहा है, जहां पीकर सब धुत हैं।... ब्रह्मांड के नगण्य, छोटे-से किसी कोने में, कॉमिक तथा ट्रैजिक के बीच खोई हुई, उनकी दुनिया रुखड़ी है। यहां मृत्यु का नृत्य है।’ फिल्म इस बात की पुष्टि करती है। ‘सैटनटैंगो’ बेला टार का मास्टरपीस है।
साहित्य और सिने जगत में बेला-लाजलो जैसी कुछ और भी जोड़ियां हैं, जैसे जर्मनी के मिखाइल हैनक एवं नोबेल पुरस्कृत एल्फ्रिड येलेनिक , वोल्कर सोन्डोर्फ तथा नोबेल पुरस्कार प्राप्त गुंटर ग्रास, वोल्कर सोन्डोर्फ और नोबेल प्राप्त हेनरिक बोल। इन साहित्यकारों-निर्देशकों ने कमाल किया है।
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