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सौ साल जीना असंभव नहीं: नए अनुभवों के लिए खुद को तैयार रखें, उत्साही बने रहें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 09 Jan 2026 07:20 AM IST
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सार
सौ वर्ष तक जीना असंभव नहीं है... बशर्ते जीवनशैली संतुलित और सकारात्मक हो। आइए इस लेख में जानते हैं कि कैसे दीर्घायु जीवन में केवल आनुवंशिकी ही नहीं, बल्कि आदतों की भी बड़ी भूमिका होती है।
सौ साल जीना असंभव नहीं...
- फोटो : freepik
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विस्तार
आपकी जिज्ञासा उम्मीदों भरी एवं उत्साही है। मनुष्य लंबे समय से लंबी उम्र पाने की जद्दोजहद कर रहा है और दीर्घायु जीवन को लेकर कई तरह के वैज्ञानिक अनुसंधान भी हो रहे हैं। कुछ वैज्ञानिकों का तो यहां तक कहना है कि लंबी उम्र पाने में आनुवंशिकी मददगार होती है, लेकिन सौ वर्ष जीने वाले लोगों के जीवन का अध्ययन करें, तो पाएंगे कि वे कुछ खास आदतों को अपनाते हैं।
मैरी पॉपिंस जैसी क्लासिक फिल्मों के सिंगिंग, डांसिंग स्टार डिक वैन डाइक (जो खुद सौ वर्ष के हो चुके हैं) ने अपनी नई किताब 100 रूल्स फॉर लिविंग टू 100: एन ऑप्टिमिस्ट्स गाइड टू ए हैप्पी लाइफ में इसके बारे में काफी विस्तार से बताया है। आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक क्षमता कमजोर होने लगती है, लेकिन अगर आप खुद को वृद्ध न मानें और हमेशा सक्रिय व उत्साही बने रहें, तो लंबी और खुशहाल जिंदगी पाना बिल्कुल भी असंभव नहीं है। नियमित व्यायाम से आपकी लंबी उम्र की संभावना बढ़ जाती है।
अगर आप हर रोज जिम नहीं जा सकते, तो हफ्ते में कम से कम तीन दिन जिम जाएं और वहां सर्किट ट्रेनिंग (कम से कम आराम के साथ कई तरह के व्यायाम) करें। हो सकता है कि जिम जाने के लिए आपको अतिरिक्त प्रेरणा की जरूरत हो, तो आप खुद से वादा करें कि इनाम के तौर पर आप एक झपकी ले सकते हैं। जिस दिन जिम नहीं जाना हो, उस दिन घर में योग और स्ट्रेचिंग कर लें।
लंबी उम्र पाने के लिए गंभीर होने से बचने की कोशिश करें और बच्चों जैसी चंचलता अपनाएं, इससे आपके भीतर जिंदादिली बनी रहेगी। चंचलता आपको मजा देती है और आजादी का एहसास कराती है, चाहे आप शारीरिक रूप से कैसा भी महसूस करें।
यही नहीं, इससे तनाव कम होता है और सेहत अच्छी रहती है।
चाहें, तो आप पालतू जानवर पाल लें, वे आपका हौसला बढ़ा सकते हैं। माना जाता है कि गुनगुनाने से मानसिक स्वास्थ्य बढ़िया रहता है। अपना पसंदीदा गाना गाकर भी आप अपनी जिंदगी के तनाव को दूर कर सकते हैं। इसके अलावा, नए अनुभवों के लिए खुद को तैयार रखना दिमागी स्वास्थ्य और भावनात्मक बेहतरी के लिए अच्छा हो सकता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आपको वास्तव में नए विचारों के लिए अपना दिमाग खुला रखना चाहिए।
इसके साथ ही, बड़ी उम्र में अपने सामाजिक रिश्तों को मजबूत रखना भी जरूरी है। आप सिर्फ अपने हमउम्र दोस्तों से ही नहीं, पोते-पोतियों और परपोते-परपोतियों से करीबी संपर्क बनाए रखिए। बच्चों को हंसते-गाते, चीखते-चिल्लाते सुनकर आपको वास्तव में खुशी ही मिलेगी।
नोट-
जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।
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अगर आप हर रोज जिम नहीं जा सकते, तो हफ्ते में कम से कम तीन दिन जिम जाएं और वहां सर्किट ट्रेनिंग (कम से कम आराम के साथ कई तरह के व्यायाम) करें। हो सकता है कि जिम जाने के लिए आपको अतिरिक्त प्रेरणा की जरूरत हो, तो आप खुद से वादा करें कि इनाम के तौर पर आप एक झपकी ले सकते हैं। जिस दिन जिम नहीं जाना हो, उस दिन घर में योग और स्ट्रेचिंग कर लें।
लंबी उम्र पाने के लिए गंभीर होने से बचने की कोशिश करें और बच्चों जैसी चंचलता अपनाएं, इससे आपके भीतर जिंदादिली बनी रहेगी। चंचलता आपको मजा देती है और आजादी का एहसास कराती है, चाहे आप शारीरिक रूप से कैसा भी महसूस करें।
यही नहीं, इससे तनाव कम होता है और सेहत अच्छी रहती है।
चाहें, तो आप पालतू जानवर पाल लें, वे आपका हौसला बढ़ा सकते हैं। माना जाता है कि गुनगुनाने से मानसिक स्वास्थ्य बढ़िया रहता है। अपना पसंदीदा गाना गाकर भी आप अपनी जिंदगी के तनाव को दूर कर सकते हैं। इसके अलावा, नए अनुभवों के लिए खुद को तैयार रखना दिमागी स्वास्थ्य और भावनात्मक बेहतरी के लिए अच्छा हो सकता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आपको वास्तव में नए विचारों के लिए अपना दिमाग खुला रखना चाहिए।
इसके साथ ही, बड़ी उम्र में अपने सामाजिक रिश्तों को मजबूत रखना भी जरूरी है। आप सिर्फ अपने हमउम्र दोस्तों से ही नहीं, पोते-पोतियों और परपोते-परपोतियों से करीबी संपर्क बनाए रखिए। बच्चों को हंसते-गाते, चीखते-चिल्लाते सुनकर आपको वास्तव में खुशी ही मिलेगी।
नोट-
जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।