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Foreign Travelers Praise India: भारत में हर मौके पर खुशियां बांटना विदेशियों को भाया
सार
ऑस्ट्रियाई ट्रैवलर लिजा व यूक्रेनी सैंड्रा बोलीं, 'पड़ोसी का परिवार जैसे ध्यान रखना भारत में ही संभव।'
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विदेशी भारतीय परंपरा से इम्प्रेस
- फोटो : Ai
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विस्तार
भारतीय आतिथ्य और समृद्ध सामाजिक परंपराओं का जादू सात समंदर पार सिर चढ़कर बोल रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई ऑस्ट्रियाई ट्रैवलर व कंटेंट क्रिएटर लिजा और यूक्रेनी महिला सैंड्रा के बयान सामने आए हैं।
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उन्होंने कहा, यूरोपीय लोग निजी जिंदगी तक सीमित हैं और भारत में पूरे मोहल्ले और रिश्तेदारों का जुड़ाव, खुशियां बांटना और पड़ोसी का एक परिवार की तरह ध्यान रखना बेहद खास है। दोनों अतिथि देवो भवः से प्रेरित हैं। सैंड्रा-लिजा ने भारत के पारिवारिक व सामाजिक मूल्यों की तारीफ की। दोनों ने पश्चिमी जीवनशैली व भारतीय समाज पर कहा, यूरोप में लोग निजी जिंदगी तक सीमित रहते हैं, वहीं भारत में गृह प्रवेश जैसे मौकों पर भी खास उत्साह से जुटना और पंडितों से पूजा कराना बड़ा रोचक है। इंटरनेट पर इनका वीडियो लाखों लोग देख चुके हैं। एजेंसी
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दुनियाभर में भारतीय दर्शन की सराहना
यूरोप, यूक्रेन, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका में भारत की संस्कृति के प्रति काफी लगाव देखा जा रहा है। इससे पहले भी प्रसिद्ध हस्तियों ने भारत की प्रशंसा की। इनमें जर्मनी स्विट्जरलैंड के अल्बर्ट आइंस्टीन ने जहां शून्य और अंक के लिए अपने देश के लोगों को भारतीयों का ऋणी बताया वहीं भौतिकी में नोबेल विजेता ऑस्ट्रिया के इरविन श्रोडिंगर भारतीय उपनिषदों और वेदांत दर्शन के बहुत बड़े प्रशंसक थे। क्वांटम फिजिक्स पर काम करते समय वे वेदों से गहराई से प्रभावित थे।
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अतिथि देवो भवः को महसूस कर भावुक हुए
सैंड्रा ने इंस्टाग्राम पर कहा, यूरोप में घर खरीदने के बाद मात्र 3-4 लोगों में चाय-कॉफी समारोह निपट जाता है, भारत में यह दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच पूरा एक उत्सव होता है। लिजा ने कहा, मैंने बाइक से कई देश घूमे हैं लेकिन आश्चर्य है कि एक देश ऐसा भी है जहां अतिथि का स्वागत पूरा मोहल्ला, रिश्तेदार और पंडित मिलकर करते हैं। सेंड्रा ने कहा, अतिथि देवो भवः की परंपरा सिर्फ कहावत नहीं, भारतीयों के रोजमर्रा के व्यवहार में दिखती है।