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रोमन खोलेगा ब्रह्मांड के राज: ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बाद समय के साथ क्या बदला, नासा के अध्ययन से पता चलेगा

Tue, 28 Jul 2026 09:13 AM IST
ज्योति भास्कर नोएलिया नोएल
नोएलिया नोएल Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 28 Jul 2026 09:13 AM IST
सार

नासा जल्द नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप भेजेगा, जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति, संरचना और समय के साथ हुए बदलावों का अध्ययन करेगा। रोमन टेलीस्कोप मौजूदा जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से अलग है। जहां जेम्स वेब को विशेष खगोलीय पिंडों का सूक्ष्म अध्ययन करने के लिए बनाया गया है, वहीं रोमन पूरे ब्रह्मांड का व्यापक सर्वे करेगा।

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NASA Study thru Nancy Grace Roman Space Telescope  to Unlock Secrets of Universe How Things Changed Over Time
नासा रोमन टेलिस्कोप की मदद से करेगा शोध - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-एजेंसी

विस्तार

आधुनिक खगोल विज्ञान की गुत्थियों को सुलझाने के लिए नासा जल्दी ही अंतरिक्ष में वेधशाला भेजेगा। इस वेधशाला में लगा नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप यह पता लगाएगा कि ब्रह्मांड की शुरुआत कैसे हुई, यह किन चीजों से बना है और समय के साथ इसमें क्या-क्या बदलाव आए। इस वेधशाला का नाम नासा की पहली खगोल विज्ञानी और पहली महिला एग्जीक्यूटिव नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है। रोमन टेलीस्कोप मौजूदा जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से अलग है। जहां जेम्स वेब को विशेष खगोलीय पिंडों का सूक्ष्म अध्ययन करने के लिए बनाया गया है, वहीं रोमन पूरे ब्रह्मांड का व्यापक सर्वे करेगा।

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रोमन में दो प्रमुख उपकरण लगाए गए हैं, वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट व कोरोनोग्राफ। वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट इंफ्रारेड प्रकाश की मदद से अंतरिक्ष की गहराइयों तक देख सकेगा। इसका दृश्य क्षेत्र हबल के इंफ्रारेड कैमरे से लगभग सौ गुना बड़ा है और यह हबल की तुलना में करीब एक हजार गुना तेजी से सर्वे कर सकता है। वहीं कोरोनोग्राफ तारों की तेज चमक को रोककर उनके आसपास मौजूद धुंधले ग्रहों, धूल व गैस के छल्लों की सीधी तस्वीरें लेने में मदद करेगा।
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अपने मिशन के दौरान रोमन अरबों आकाशगंगाओं व तारों का अध्ययन करेगा। ब्रह्मांड की उत्पत्ति व विकास का मौजूदा मॉडल बताता है कि सामान्य पदार्थ, जिससे तारे, ग्रह और इन्सान बने हैं, कुल ब्रह्मांड का केवल छोटा हिस्सा है। लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर का है, जो दिखाई नहीं देता, लेकिन उसका गुरुत्वाकर्षण आकाशगंगाओं को एक साथ बांधे रखता है। रोमन यह समझने का प्रयास करेगा कि अलग-अलग कालखंडों में डार्क मैटर ने आकाशगंगाओं के निर्माण में कैसी भूमिका निभाई। ब्रह्मांड का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा डार्क एनर्जी से बना माना जाता है। यही रहस्यमयी ऊर्जा ब्रह्मांड के तेजी से फैलने का कारण मानी जाती है।

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  • इस वेधशाला का नाम नासा की पहली खगोल विज्ञानी और पहली महिला एग्जीक्यूटिव नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है।

हाल के अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि इसकी प्रकृति समय के साथ बदल सकती है। रोमन इन संभावनाओं की जांच करेगा। यह ग्रेविटेशनल माइक्रोलेंसिंग तकनीक की मदद से हजारों नए ग्रहों की खोज करेगा। बहुत बारीकी से नक्शा बना कर रोमन ब्रह्मांड के बारे में हमारी मौजूदा समझ को बढ़ाएगा और शायद भौतिकी की नई दुनिया का दरवाजा भी खोल दे।                                                        

-द कन्वर्सेशन

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