फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   history of world cinema agatha christie Queen of Mystery her books and novels

विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: अगाथा क्रिस्ट्री- क्वीन ऑफ क्राइम

Tue, 09 Jun 2026 03:39 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Tue, 09 Jun 2026 03:39 PM IST
सार

अगाथा की सफलता का राज उनका प्लॉट हुआ करता है। वे सूत्र थमाती चलती हैं, इसके साथ ही पाठक को पहेली में उलझाए भी रखती हैं। इतनी चालाकी से प्लॉट तैयार करती हैं, जो पाठक को चौंकाता है, खुश करता है, साथ ही शॉक भी देता है। 

विज्ञापन
history of world cinema agatha christie Queen of Mystery her books and novels
विश्व सिनेमा - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

अगर आपको रहस्य-रोमांच, मर्डर-मिस्ट्री पढ़ना या देखना या दोनों पसंद है, तो अगाथा क्रिस्टी आपके लिए अनजाना नाम नहीं होगा। न मालूम कितने प्रतिभाशाली रचनाकार होते हैं, प्रतिभाशाली रोमांच, मर्डर-मिस्ट्री रचने वाले भी, मगर सबको अगाथा क्रिस्टी जैसी प्रसिद्धि और मान नहीं मिलता है। सबकी रचनाओं पर फिल्म, सिरीज नहीं बनती हैं।

विज्ञापन


क्रिस्टी की कहानियों पर फिल्म बनने का सिससिला अभी थमा नहीं है। अगाथा क्रिस्टी ने 66 किताबें लिखीं और उनकी किताबों पर 205 बार फिल्में बनीं हैं।

अमेरिकन पिता तथा इंग्लिश मां की बेटी 15 सितंबर 1890 को पैदा हुई अगाथा क्रिस्टी ने हर्क्यूल प्योरो एवं मिस मार्पल जैसे अमर पात्र गढ़े। विशिष्ट मूछों वाले जासूस हर्क्यूल प्योरो को बच्चा-बच्चा पहचानता है। 1914 में अगाथा ने कर्नल ऑर्किबॉल्ड से शादी की, 1928 में शादी टूट गई। एकमात्र बेटी रोजालिंड हुई। दो साल बाद एक पुरातत्वविद सर मैक्स मैलोवैन से शादी की मगर क्रिस्टी नाम से ही लिखती रहीं।
विज्ञापन


‘क्वीन ऑफ क्राइम’

अगाथा की सफलता का राज उनका प्लॉट हुआ करता है। वे सूत्र थमाती चलती हैं, इसके साथ ही पाठक को पहेली में उलझाए भी रखती हैं। इतनी चालाकी से प्लॉट तैयार करती हैं, जो पाठक को चौंकाता है, खुश करता है, साथ ही शॉक भी देता है। विश्वास न हो, तो उनकी आज से सौ साल पहले लिखी कहानी ‘द मर्डर ऑफ रोजर एक्रोयड’(1926) पढ़ कर देख लें।
विज्ञापन
विज्ञापन


‘एंड देन देयर वेरे नन’, ‘एंडलेस नाइट’, ‘टेकन एट द फ्लड’, ‘मर्डर ऑन दि ओरियंट एक्प्रेस’, ‘डेथ ऑन द नाइल’, ‘द मर्डर एट द विकारेज’, ‘पार्टनर्स इन क्राइम’, ‘दि ए बी सी मर्डर्स’, ‘द माउसट्रैप’, ‘ए हाउंटंग इन वेनिस’, ‘इविल अन्डर द सन’, ‘द मिरर क्रैक्ड फ्रॉम साइड टू साइड’ आदि अपने समय की बेस्टसेलर ‘क्वीन ऑफ क्राइम’ के कुछ उपन्यासों के नाम हैं। जिन पर सफल फिल्में, टीवी सिरीज, पॉडकास्ट, टीवी गेम बने हैं।

1985 में 3 एपिसोड में बनी टीवी सिरीज ‘मिस मार्पल: ए मर्डर इज अनाउन्स्ड’ खूब सफल रही। 1974 में निर्देशक सिडन लुमेट की बनाई ‘मर्डर ऑन दि ओरियंट एक्प्रेस’ को ऑस्कर मिला। इस फिल्म में ओरियंट एक्प्रेस से इस्तांबुल से घर लौटते हुए बेल्जियन के प्रसिद्ध जासूस हर्क्यूल प्योरो को टेन में हुई एक अमेरिकन व्यापारी की हत्या का रहस्य सुलझाने केलिए बुलाया जाता है। तमाम लोगों पर हत्या का शक है, संकेत बहुत उलझाने वाले हैं।

‘द मिरर क्रैक्ड फ्रॉम साइड टू साइड’

एक फिल्म की चर्चा करती हूं, जो उनकी कहानी पर आधारित है, एवं भारत में बनी है। इस पर इंग्लिश में निर्देशक नॉर्मन स्टोन ने 1992 में उपन्यास के नाम से ही फिल्म बनाई है। सदा अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकल कर काम करने वाले ऋतुपर्ण घोष ने अगाथा क्रिस्टी की ‘द मिरर क्रैक्ड फ्रॉम साइड टू साइड’ को उठाया, उसका पुनर्लेखन कर उसे बंगाल में स्थापित कर दिया।

साल 2003 की फिल्म ‘शुभ मुहूर्त’ में वे यही करते हैं। वे अगाथा क्रिस्टी का नाम कहीं नहीं देते हैं, पर फिल्म का एक चरित्र ‘मिस मार्पल’ को समर्पित करते हैं। अगाथा क्रिस्टी की कहानी पर स्क्रिप्ट तैयार करना आसान काम नहीं है। यह काम घोष ने बड़े सलीके से किया है।

फिल्म किसने हत्या की है से अधिक हत्या क्यों की गई है, पर केंद्रित रहती है? अपराध को मनोवैज्ञानिक रुख दिया गया है, जो अगाथा क्रिस्टी की भी विशेषता है। इस फिल्म में टॉप ग्रेड की हिरोइने हैं। एक ओर राखी गुलजार है, तो दूसरी ओर शर्मिला टैगोर। दोनों बांग्ला और बॉलीवुड की खूब प्रसिद्ध और मंजी हुई अभिनेत्रियां हैं।

तीसरी युवती है, मल्लिका सेन (नंदिता दास) आधुनिक लड़की, बिंदास पत्रकार के कपड़े पहनती है, यानि जीन्स-टॉप पहनती है, सिगरेट फूंकती है। शुरु में बाथरूम में छिप कर, लेकिन अपनी रंगा पीसीमां (राखी गुलजार) की नजरों से नहीं बच पाती है। मिस मार्पल की भूमिका में पीसीमां अपनी पत्रकार भतीजी से कहती हैं, बाथरूम के बाहर सिगरेट पीयो, लेकिन कम और हां मुझे भी एकाध पकड़ा दिया करो।

फिल्म में पीसीमां को विधवा, कोमल, मधुर बोलने वाली लेकिन कुशाग्र बुद्धि दिखाया गया है, जो अपनी सफेद साड़ी में भव्य लगती है और अपनी ढ़ेर सारी बिल्लियों के साथ रहती है। उनके आंख-कान-नाक खूब सजग हैं। भतीजी अपनी बुआ से पत्रकार जीवन की बातें बताती है और उन्हीं से टुकड़े-टुकड़े जोड़ कर बुआ हत्या के रहस्य का पर्दाफाश करती है।

दूसरी ओर उम्र दराज, एक समय की नामी अभिनेत्री है। आधुनिक उच्च वर्ग की, विदेश पलट पद्मिनी चौधुरी (शर्मिला टैगोर)। वह काफी समय बाद विदेश से लौटी है, एक फिल्म को प्रड्यूस करने के लिए। पद्मिनी फिल्म अपने पति संबित राय (सुमंत मुखर्जी) से निर्देशित करवा रही है। वह खूबसूरत है, घर-बाहर दोनों स्थानो पर सुरुचिपूर्ण कपड़े पहनती है। साज-सज्जा कपड़ों और मौके के अनुरूप होती है। जीवन में ईर्ष्या, महत्वाकाक्षाएं पीछा नहीं छोड़ती हैं।

‘शुभ मुहूर्त’ की कहानी

‘शुभ मुहूर्त’ इन्हीं बातों से जुड़ी फिल्म है। ऊंचाई पर पहुंची अभिनेत्री पद्मिनी परिवार में रह रही थी, जो वह चाहती थी, परिवार से उसे वह नहीं मिल रहा था। मानसिक रूप से विकलांग 16 साल के बेटे की मृत्यु से व्यथित पद्मिनी तलाक ले कर विदेश चली जाती है और अब कई वर्षों के बाद वह फिल्म प्रड्यूस करने भारत लौटी है। क्या उसका कोई हिडेन एजेंडा है?

हास्य-व्यंग्य, कटाक्ष, हल्के-फुल्के संवाद दर्शक को भाते हैं। एडीटिंग अर्घ कमल मित्रा ने की है। अवीक मुखोपाध्याय का कैमरा बारीकी से घटनाओं तथा अभिनेताओं के मनोभावों को पकड़ता है। कौशिक सरकार का आर्ट डेकोरेशन कहानी के अनुरूप है।

150 मिनट की इस फिल्म को 2003 का सर्वोत्तम बंगाली फीचर फिल्म का नेशनल अवार्ड मिला था। साथ ही राखी गुलजार को सर्वोत्तम सहायक अभिनेत्री का नेशनल अवार्ड मिला था। हालांकि पुरस्कार को लेकर कुछ विवाद हुआ।

‘शुभ मुहूर्त’ फिल्म है प्रेम, प्रतिकार, ब्लैकमेलिंग, श्याम-अतीत, पश्चाताप, रहस्य और हत्या की गुत्थी की। यह फिल्म है, स्मृतियों की रिश्तों की, रिश्तों के उलझाव की, उन्हें सुलझाने की। स्मृतियां सदैव मधुर नहीं होती हैं। कटु स्मृतियां प्रतिकार के लिए उकसाती हैं, अपराध करवाती हैं। कटु स्मृतियों और प्रतिकार केलिए किए गए अपराध की फिल्म है, ‘शुभ मुहूर्त’।


फिल्म में हत्या, रहस्य, प्रेम के समानांतर एक प्रेम कथा और चलती है। शक के घेरे में तमाम लोग हैं। अपराधी को पकड़ने केलिए फिल्म खुद देखनी होगी।

अगाथा क्रिस्टी की कहानियां नौजवान पीढ़ी भी उतने ही चाव से पढ़ती है, जितने चाव से पुरानी पीढ़ी। 12 जनवरी 1976 को उनकी मृत्यु हुई।


-------------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed