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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: एमी वाडा- भव्यता का सृजन

Sun, 25 May 2025 07:44 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Sun, 25 May 2025 07:44 PM IST
सार

‘एमी वाडा: माई लाइफ इन द मेकिंग’ उनकी अनोखी किताब का नाम है, मलमल से बने कवर में उनके प्रभावशाली कॉस्ट्यूम और उनके निर्माण प्रक्रिया को रंगारंग चित्रों के माध्यम से दिखाया गया है। पूरी किताब कपड़े के जैकेट में सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रस्तुत की गई है।

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history of world cinema Emi Wada Japanese costume designer
सिनेमा और कॉस्टयूम डिजाइन - फोटो : Freepik.com

विस्तार

मास्टर अकीरा कुरोसावा ने 1985 में एक ऐतिहासिक फिल्म बनाई ‘रान’। शेक्सपियर के ‘किंग लियर’ से प्रेरित फिल्म इतनी भव्य थी, इसने 30 पुरस्कार जीते, इसे चार ऑस्कर– सर्वोत्तम निर्देशन, सर्वोत्तम सिनेमाटोग्राफी, सर्वोत्तम आर्ट निर्देशन एवं सर्वोत्तम कॉस्ट्यूम नामांकन मिले। मगर ऑस्कर मात्र कॉस्ट्यूम डिजाइनर एमी वाडा को मिला।

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सिने-समीक्षक रोजर एबर्ट के अनुसार फिल्म के अधिकांश रंगों का श्रेय कॉस्ट्यूम डिजाइनर एमी वाडा को जाता है। एमी ने जापान के परम्परागत कशीदेकारी के गढ़ क्योटो की परम्परा में 1,400 पोशाकें हाथ से तैयार कीं। कई लोग एक साथ काम कर रहे थे, एक-एक वस्त्र बनाने में तीन से चार महीने का समय लगा, काम पूरा होने में करीब तीन साल लगे। और इन वस्त्रों के रंगों एवं डिजाइन की खूबसूरती उभारने केलिए कुरोसावा की ऊसर रंगहीन भूरी जमीन, पहाडियां सहायक हैं।

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जापानी कस्ट्यूम डिजाइनर एमी वाडा

जापानी कस्ट्यूम डिजाइनर एमी वाडा ने जब अपनी पहली (यही अंतिम भी था) ऑस्कर मूर्ति हाथ में ली तो स्टेज से उसे देखते दर्शकों को दिखाते हुए कहा, ‘इस आकृति को मेरे कस्ट्यूम की आवश्यकता नहीं है।’ कुल 6 पुरस्कार पाने वाली एमी ने 28 फिल्मों केलिए कॉस्ट्यूम डिजाइन की। उन्होंने थियेटर एवं ऑपेरा हेतु भी कॉस्ट्यूम बनाए।

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‘एमी वाडा: माई लाइफ इन द मेकिंग’ उनकी अनोखी किताब का नाम है, मलमल से बने कवर में उनके प्रभावशाली कॉस्ट्यूम और उनके निर्माण प्रक्रिया को रंगारंग चित्रों के माध्यम से दिखाया गया है। पूरी किताब कपड़े के जैकेट में सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रस्तुत की गई है।

एमी वाडा का जन्म 18 मार्च 1937 को जापान के क्योटो में हुआ। क्योटो बांस एवं काष्ठ कला केलिए मशहूर है। उनका परिवार एक समृद्ध परिवार था। वहां के बांस एवं काष्ठ कला तथा प्रस्तर बागीचे सदा उनकी प्रेरणा रहे हैं। एमी ने क्योटो आर्ट्स यूनिवर्सिटी से शिक्षा पाई, शुरु में वे चित्रकार बनने का ख्वाब देख रही थीं, अच्छा हुआ नहीं बनी वरना फिल्म, थियेटर एवं ऑपेरा को इतने सुंदर-भव्य, परम्परागत और आधुनिकता के संगम वाले कस्ट्यूम कैसे मिलते।

असल में 20 साल की उम्र में उन्होंने डॉयरेक्टर-प्रड्यूसर बेन वाडा से शादी की। शादी के बाद उनकी जीवन दिशा परिवर्तित हो गई। बेन वाडा जापानी टेलीविजन डॉयरेक्टर थे और उन्होंने एमी को अपने काम केलिए कस्ट्यूम डिजाइन करने को कहा। उनके पति 2011 में गुजर गए और दस साल बाद 13 नवम्बर 2021 को एमी वाडा गुजरीं।

1973 में एमी ने सबसे पहली बार एक यूएस-इटैलियन म्युजिक कॉमेडी ‘मार्को’ हेतु मार्को पोलो (डेसी एर्नाज जुनियर) तथा कुबलाई खाना (जेरो मोस्टल) केलिए लिए भव्य-खूबसूरत कस्ट्यूम डिजाइन किया और इस प्रकार उनकी ख्याति जापान के बाहर पहुंची। इसके बारह साल बाद वे कुरोसावा के ‘रान’ का हिस्सा बनी, फिर उन्हें मुड़ कर नहीं देखना पड़ा। यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। शुरुआत में ही उन्होंने झंडा गाड़ दिया।

वे कुरोसावा को परफेक्शनिष्ट मानती हैं जो कभी, किसी हाल में समझौता नहीं करते, जब तक कि उन्हें वह नहीं मिल जाता जो वे चाहते हैं। यदि वे कुरोसावा का सम्मान करती थी तो कुरोसावा भी उन पर विश्वास करते थे। कुरोसावा को पूरा-पूरा विश्वास था कि एमी सामांती प्रभुओं, बेवकूफों तथा काल्पनिक भूतों की महिमा को जीवंत कर देंगी और एमी ने ऐसा किया।

कुरोसावा के लिए ‘रान’ बनाना सरल न था, कोई प्रड्यूसर आगे नहीं आ रहा था। जब रकम मिल गई काम शुरु हुआ लेकिन आर्थिक कठिनाई के कारण उन्हें बीच में काम रोकना पड़ा। उन्होंने कॉस्ट्यूम विभाग के अलावा सारे अन्य विभाग बंद कर दिए। इसका खास कारण था, एमी अपने काम लायक कपड़े को मंगाने केलिए करार कर चुकी थीं। वे क्योटो की चार फैक्टरी को इसके लिए अपनी ओर से 200,000 डॉलर दे चुकी थीं।

छ: महीने बाद एक सुबह कुरोसावा ने फंड आने सूचना दी तो एमी रो पड़ीं। कुरोसावा आसमान में अपने मन लायक बादल पाने केलिए इंतजार करते, ताकि वे शूटिंग शुरू कर रहें। उनके साथ-साथ पूरी टीम एवं सैकड़ों एक्स्ट्रा कई दिन प्रतिक्षा करते। एमी ने कुरोसावा की फिल्म ‘ड्रम्स’ का कस्ट्यूम भी डिजाइन किया।

एमी ने प्राचीन नाटक को जापान पहुंचा दिया। समुराई पोशाक को स्टारडम की ऊंचाई तक पहुंचा दिया। उन्होंने कपड़ा रंगने का कार्य भी स्वयं किया। इसमें उन्होंने एक साथ जापान के नोह थियेटर से लेकर पुनर्जागरण तक की सीमा का स्पर्श किया। एक ओर वे अपने वस्त्रों द्वारा इतिहास के प्रति आस्थावान रहना चाहती थीं वहीं दूसरी ओर कुछ नया करना चाहती थीं। उनके अनुसार उनके लिए प्रत्येक प्रोजेक्ट में कुछ नया करना जरूरी है।

कोई शक नहीं यह सब करना सदा एक चुनौती होता। इसी के तहत उन्होंने इटली के चित्रकार बोटीसेली से प्रेरणा ली और एक पात्र को इस कलाकार के रंग में रंग दिया, जापान के किमोनो पर उसकी कला को साकार किया।

उन्होंने न केवल कुरोसावा के साथ काम किया, न केवल एशियन सिनेमा के कई दिग्गजों केलिए कस्ट्यूम डिजाइन किया बल्कि चीनी, कोरिया, तायवान, ब्रिटिश सिने निर्देशकों के साथ काम किया और 28 फिल्मों का कस्ट्यूम डिजाइन किया एवं अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि पाई। एमी ने कुरोसावा के अलावा पीटर ग्रीनवे, कोन इचीकावा, नागीसा ओसीमा, झांग यिमाउ, एन हुई आदि निर्देशकों के साथ काम किया। वे अंत तक फिल्म, थियेटर,ऑपेरा के लिए कस्ट्यूम डिजाइन करती रहीं। वे एक समर्पित कलाकार थीं।



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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