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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: रोमन पोलांस्की- हादसे ही जीवन की कथा रही

Tue, 18 Aug 2026 11:18 AM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Tue, 18 Aug 2026 11:18 AM IST
सार

विश्व सिनेमा के इतिहास में रोमन पोलांस्की का नाम एक प्रभावशाली पोलिश-फ्रेंच फिल्ममेकर, निर्देशक और अभिनेता के रूप में दर्ज है। उनकी फिल्मों में मनोवैज्ञानिक तनाव, रहस्य, भय और मानवीय रिश्तों की जटिलताओं को खास अंदाज में पेश किया गया।

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history of world cinema Roman Polanski Polish-French filmmaker and actor birth anniversary
रोमन पोलांस्की - फोटो : X

विस्तार

कदाचित कोई जीवन सरल रेखा में चलता है। ज्यादातर जीवन टेढ़े-मेढ़े रास्तों से होकर गुजरता है। हर व्यक्ति को अपने जीवन की जटिलताओं से जूझना होता है। कुछ जीवन दुर्घटनाओं से भरे होते हैं, जैसे अर्नेस्ट हेमिंग्वे का जीवन। उन्होंने दुर्घटनाओं को रचनाओं में परिवर्तित कर दिया। इसी तरह एक अन्य व्यक्ति का पूरा जीवन आपदाओं से घिरा रहा, उसने कई मुसीबतों को अपनी फिल्म का हिस्सा बना लिया।

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रोमन पोलांस्की का बचपन हादसों से घिरा रहा। इसका मुख्य कारण उनका यहूदी होना था। वैसे उनकी मां आधी यहूदी थीं। आदमी कहां जन्म ले यह उसके वश में नहीं होता है।
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रोमन पोलांस्की का जन्म हिटलर युग में 18 अगस्त 1933 को पेरिस में हुआ। उनका जन्म का नाम राजमंड रोमन लीएब्लिंग था। प्यार से लोग उन्हें रोमेक बुलाते हैं। उनके पिता राइसजार्ड पोलैंड के यहूदी थे। यूरोप की आर्थिक मंदी के शिकार उनके पिता ने अपनी जीवंतता एवं मोहकता से एक खूबसूरत बाला, अर्ध-यहूदी बुला काट्ज का दिल जीत लिया। अत: उन्होंने अपने पहले पति को 1932 में छोड़ दिया। राइसजार्ड एवं बुला काट्ज ने शादी की।
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दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय के फलस्वरूप रोमन के पिता अपने नए परिवार के साथ अपने जन्मस्थान क्राकोव लौटे। वहां उन्होंने प्लास्टिक उत्पादन का एक छोटा-सा कार्य प्रारंभ किया। जब रोमन मात्र एक बालक थे, अपने माता-पिता के साथ नाजियों द्वारा धर लिए गए। पहले उन लोगों को घेटो में रखा गया। बाद में गिरफ्तार कर अलग-अलग कैंप में भेज दिया गया। रोमन की मां को ऑश्वित्ज यातना शिविर गैस चेंबर में भुन दिया गया।

इस हादसे से रोमन कभी नहीं उबर पाए। उनके अनुसार यह कष्ट उनकी मृत्यु के साथ ही समाप्त होगा। पिता ने होशियारी से नाजी सैनिकों की आंख बचा कर सात साल के बालक रोमन को कंटीले तारों के पार ढ़केल दिया था। द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने पर ही 1945 में वे अपने पिता से मिल सके। बाद में रोमन को पता चला, जब उनकी मां गिरफ्तार की गईं, वे चार माह के गर्भ के साथ थीं।

फिल्म-  ‘द पियानिस्ट’

यही सब वे अपनी एक श्रेष्ठ फिल्म ‘द पियानिस्ट’ में दिखाते हैं। रोमन पोलांस्की ‘शिंडलर्स लिस्ट’ निर्देशित करें, ऐसा स्पीयलबर्ग चाहते थे। रोमन ने नकार दिया। होलोकास्ट से जो बच रहे हैं, वे भाग्य और संयोग से बच रहे हैं, किसी ऑस्कर के हृदय परिवर्तन से नहीं। जैसाकि ‘शिंडलर्स लिस्ट’ में दिखाया गया है।

पोलांस्की ऑस्कर जैसे एकाध लोगों की भूमिका को बहुत महत्व नहीं देते। बचपन में भटकते हुए भाग्य और अनजान, मानवीय गुणों से युक्त संवेदनशील लोगों की कृपा के कारण रोमन जीवित बच रहे थे। उन्होंने खुद इस पीड़ा को भोगा, एक बार नहीं कई बार। खुद बालक बच गया, भयभीत, निरीह, एकाकी बालक काफी समय तक क्रोकावा और वार्सा में एकाकी भटकता रहा। कुछ लोगों ने उसे बुरी तरह प्रताड़ित किया। भला कोई बचपन में ऐसी परिस्थितियों में अकेले भटकने के जानलेवा हादसे को भूल सकता है?

बाद में 1961 में वे एक बार फिर कम्युनिस्ट शासन के दमन से निकल भागे, पर हादसों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उनकी दूसरी पत्नी अभिनेत्री शैरन टेटे और उनके आठ महीने के अजन्मे बच्चे की अमेरिका में हत्या कर दी गई। उस समय रोमन पोलांस्की लंदन में अपनी नई फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे। इसी कारण उनका लौटना टल रहा था। पत्नी के प्रसव के समय वे उनके साथ होना चाहते थे।

9 अगस्त 1969 को फोन से उनको इस भयंकर घटना की सूचना मिली। उनकी पत्नी एवं उसके गर्भ के साथ, चार और लोगों की हत्या की गई थी, उन लोगों को चाकुओं से गोद डाला गया था। सूचना मिलने पर ‘नहीं! नहीं! नहीं!’ कहते हुए रोमन अपना सिर दीवार पर पटकने लगे। डॉक्टर ने उन्हें शामक इंजेक्शन देकर किसी तरह शांत किया।

निर्देशक, लेखक, प्रड्यूसर तथा अभिनेता रोमन पोलांस्की ने पोलैंड, ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका में रह कर फिल्में बनाईं। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म बनाने वाले माने जाते हैं। ‘रोजमेरी’ज बेबी’, ‘द टेनेंट’ (इसमें मुख्य भूमिका में वे स्वयं है।),

‘चाइनाटाउन’, ‘बिटर मून’, ‘डेथ एंड द मैडेन’, मैकबेथ’, ‘द पियानिस्ट’, ‘द पैलेस’, ‘ओलिवर ट्विस्ट’ आदि 43 फिल्म के निर्देशक रोमन अभिनय में भी कुशल हैं। उन्होंने 41 फिल्मों में अभिनय किया है। 104 पुरस्कारों के विजेता को 2003 में ‘द पियानिस्ट’ फिल्म केलिए सर्वोत्तम निर्देशक का ऑस्कर सम्मान प्राप्त हुआ।

मगर वे इसे लेने उपस्थित न हो सके, हालांकि दर्शकों ने उनकी अनुपस्थिति में भी खड़े होकर ताली बजते हुए उन्हें सम्मान दिया। 2011 में ज्युरिख फिल्म समारोह में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट से समानित किया गया है। वे आज भी अपने नवें दशक को पार करने के बावजूद सक्रिय हैं।

ऐसे तबाही वाले अनुभव प्राप्त रोमन पोलांस्की के जीवन में एक बार और तबाही आई। उन्हें एक बार फिर देश, अमेरिका छोड़ना पड़ा। 1977 में उन्होंने एक 13 साल की बच्ची का बलात्कार किया। 42 दिन जेल में बिताने के बाद वे अमेरिका से निकल भागे। मगर 2009 में ज्योरिख में पकड़े गए और जेल में डाल दिए गए।

नब्बे के दशक में उन्होंने उस स्त्री से माफी मांग ली थी। 2011 के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, उनको अपने किए पर अफसोस है। बलत्कृता गेमेयर ने भी केस समाप्त करने की बात कही, क्योंकि इससे उसको, उसके पति एवं बच्चों को हानि पहुंचती है।

जिंदगी कितनी जटिल, विडम्बनापूर्ण हो सकती है, रोमन पोलांस्की का जीवन यह दिखाता है। फिल्म-टीवी समीक्षक जूलिया ऐन क्रुपा ने गहनता से मात्र 179 पन्नों में रोमन पोलांस्की की जीवनी, ‘रोमन पोलांस्की: ए लाइफ इन एक्जाइल’ लिखी है। जीवनी निर्देशक के जीवन की उथल-पुथल को सामने लाती है। पोलांस्की का सारा जीवन एक तरह से निर्वासन में बीता है।

जूलिया ऐन क्रुपा ने निर्देशक के जीवन, उसके विभिन्न कार्यों को गहराई से विश्लेषित किया गया है। पोलांस्की की सारी फिल्में उनके निजी अनुभवों का प्रतिफल हैं। इस किताब में रोमन के बचपन से लेकर, उनकी फिल्मों, उनसे जुड़े विवादों की पड़ताल की गई है।

रोमन पोलांस्की पर कई किताबें हैं। बारबरा लीमिंग ने ‘पोलांस्की: हिस लाइफ एंड फिल्म्स’ नाम से उनकी जीवनी लिखी, जिसका उपशीर्षक ‘द फिल्ममेकर एज वोयेउर’ (The Filmmaker as Voyeur) है। वे सौ साल जीएं!



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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