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विश्व साहित्य का आकाश: जेन एयर- औरत भी वैसा ही अनुभव करती है, जैसा आदमी

Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Tue, 16 Jun 2026 04:18 PM IST
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सार

 इंग्लैंड में 1847 में करर बेल नामक उपन्यासकार ने ‘जेन एयर: एन ऑटोबायग्राफी’ लिखा। मगर अलोचक जेन एयर जैसे मजबूत औरत के चरित्र को पचाने के लिए राजी नहीं थे। समाज को स्त्री रचनाकार को स्वीकारने में बहुत तकलीफ होती है। खासकर उत्तम श्रेणी की रचनाकार को वह पचा नहीं पाता।

history of world literature Jane Eyre Novel by Charlotte Bronte details
साहित्य की दुनिया - फोटो : adobe stock
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विस्तार

विक्टोरियन काल की एक कृतिकार ने एक ऐसी रचना की जिसमें औरत एवं आदमी के लिए समान अवसर की मांग की गई थी। हालांकि उपन्यासकार ने सैक्स का ग्राफिक चित्रण नहीं किया था। चूंकि यह पहली रचना थी, अत: स्वाभाविक रूप से आत्मकथात्मक थी। रचनाकार ने अपने जीवन में जिन-जिन कुरूप परिस्थितियों को अनुभव किया था, उन्हें ही शब्दबद्ध कर दिया था।



जाहिर है, प्रकाशित होते खूब चर्चा हुई खूब आलोचना हुई। इंग्लैंड में 1847 में करर बेल नामक उपन्यासकार ने ‘जेन एयर: एन ऑटोबायग्राफी’ लिखा। मगर अलोचक जेन एयर जैसे मजबूत औरत के चरित्र को पचाने के लिए राजी नहीं थे।
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उपन्यास को प्रकाशित हुए करीब पौने दो सौ साल से अधिक हो चुके हैं, मगर ‘जेन एयर’ आज भी चर्चा में है। उस समय तो समाज अपना ही कुरूप चेहरा देख कर तिलमिला उठा था। अब तक न मामूल इस कृति पर कितनी फिल्में बनी हैं, नाटक और टीवी सीरियल बने हैं। आगे भी अवश्य बनेंगे। यह उपन्यास उस समय के प्रचलित उपन्यासों से सर्वथा भिन्न था।
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इसने पाठक की रुचि में आमूल-चूल परिवर्तन कर दिया। गद्य में जेन एयर का शांत व्यक्तित्व, उसकी संवेदनशीलता, नैतिक साहस, धार्मिक विश्वास सब कुछ आश्चर्यचकित करने वाला था। आज क्लासिक का दर्जा प्राप्त इस उपन्यास में बहुत कुछ है। औरत-आदमी का जीवन है, तो यौनिकता है, साथ ही नैतिकता है, धार्मिक विश्वास है। स्त्रीवाद से अपरिचित युग में यहां जम कर स्त्रीवाद है। सब तरह के पाठक इस मौलिक कार्य के मुरीद हुए।

यूरोप के पाठकों ने पहली बार पात्रों के अंतर में चल रहे मनोभावों, विचारों को जाना-समझा एवं उनके प्रति आकर्षित हुए।

गोथिक शैली का रोचक उपन्यास

उस काल में औरत का लेखन समाज को स्वीकार न था। अत: एक औरत ने छद्म नाम से यह उपन्यास लिखा था और प्रकाशन हेतु भेज दिया था। उपन्यासकार ने पढ़ने-जांचने के लिए पाण्डुलिपि उपन्यासकार विलियम मेकपीस थाकरे को दी। थाकरे पढ़ते जाएं और जार-जार रोते जाएं। पढ़ने के बाद उन्होंने प्रकाशन विलियम स्मिथ विलियम्स से रचना की प्रशंसा की तथा प्रकाशित करने की अनुशंसा की।

मेकपीस थाकरे ने प्रकाशक से एक और बात कही। थाकरे ने कहा, उन्हें पक्का विश्वास है, यह रचना किसी औरत की है। इस तरह यह गोथिक शैली का रोचक उपन्यास प्रकाशित हो गया। लेकिन करर बेल कौन है? इस पर अटकलें लगनी शुरू हो गईं।

‘जेन एयर’ के पात्र ऐसे हैं, जो अमर हो गए, आज तो स्कूल-कॉलेज के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। अगले साल ही यह हार्पर एंड ब्रदर्स के यहां से न्यू यॉर्क में भी छप गया। अब यह पूरे शीर्षक ‘जेन एयर: एन ऑटोबायग्राफी’ से नहीं मात्र ‘जेन एयर’ के नाम से ही प्राप्त होता है। उस समय टटकापन लिए यह उपन्यास आगे चल कर कई रचनाकारों-निर्देशकों की प्रेरणा बना। लेखिका थाकरे से कभी नहीं मिली थी, मगर उसके प्रति कृतज्ञ थी, सो उसने द्वितीय संस्करण विलियम मेकपीस थाकरे को ही समर्पित कर दिया।

उसी समय थाकरे मानसिक रूप से अस्वस्थ अपनी पत्नी से अलग हुए थे, बस फिर क्या था, लोगों को बातें बनाने का मौका मिल गया। कहा जाने लगा, जरूर यह एक स्त्री के कारण हुआ है और हो-न-हो ‘जेन एयर’ की रचनाकार एक स्त्री है। और वह थाकरे की प्रेमिका है। इसी स्त्री के कारण थाकरे ने अपनी पत्नी छोड़ी है।

पक्का मालूम न था ‘जेन एयर’ औरत ने लिखा है, अथवा आदमी ने, मगर अफवाहें जम कर उड़ीं। थाकरे ने रचनाकार को औरत माना था और यही बातें बनाने के लिए काफी था।

बहुत समय तक लंदन के रचनाकारों के समूह से बाहर योर्कशायर में रह रही शार्लिट ब्रॉन्टी अनजान रही। लेकिन जेन एयर ने साहित्य जगत में खूब धूम मचा दी। मालिक रोचेस्टर के प्रति गवर्नेस जेन एयर के प्रेम ने तहलका मचा दिया। साहित्य कला में क्रांति ला दी। आइए, तनिक इस लेखिका के बारे में जान लें। यह ब्रॉन्टी परिवार की एक सदस्य शार्लोट ब्रॉन्टी है।

पूरा परिवार प्रतिभा संपन्न था। कई बहनें और एक भाई। कुछ बहनें समय के पहले गुजर गई। बचे हुए सब-के सब पढ़ने-लिखने के शौकीन। बची हुई सब बहनों ने विक्टोरियन युग के रीति-रिवाजों को धता बताई। शार्लोट, एमिली, एन, एलीजाबेथ, मारिया ब्रॉन्टी बहनें और भाई ब्रानवेल ब्रॉन्टी।

शार्लोट का जन्म 21 अप्रैल 1816, एमिली का 30 जुलाई 1818, एन का 17 मार्च 1820 को हुआ, भाई ब्रानवेल का जन्म 1817 में हुआ था। सब योर्कशायर के थोर्नटोन में पैदा हुए थे। उनके पिता की पैदाइश आयरलैंड की थी। वे रेक्टर के रूप में योर्कशायर मूर्स के हावर्थ गांव में काम करते थे। शार्लोट बहुत छोटी थी, जब उनकी मां 1821 में मर गई।

विक्टोरियन युग में मेडिकल साइंस तक नहीं मानता था कि किसी औरत की स्वस्थ, स्पष्ट यौनेच्छा हो सकती है। शार्लोट ब्रॉन्टी जानती थीं, यदि प्रकाशक को पता चल गया कि रचना किसी स्त्री की है, वह कभी प्रकाशित नहीं करेगा। अत: उन्होंने करर बेल प्रच्छन्न नाम का सहारा लिया। पहले सब जगह यही हाल था।

हमारे अपने देश भारत में भी राज बाला घोष को अज्ञात रह कर मात्र दुलाई वाली महिला बनना पड़ा था। आलोचक भी काफी समय तक औरत रचनाकार के प्रति अच्छा नजरिया नहीं रखते थे।

दूर क्यों जाऊं इस सदी में मेरे बारे में कुछ लोगों ने अफवाह उड़ाई कि लिखते तो वास्तव में मेरे पति हैं। मैं सुन कर हंसती, क्योंकि मेरे पति की मातृभाषा हिन्दी नहीं है और वे केवल इंग्लिश में लिखते हैं। यह रुख है, समाज का औरत के प्रति। छद्म नाम के अलावा शार्लोट के पास क्या उपाय था?

समाज को स्त्री रचनाकार को स्वीकारने में बहुत तकलीफ होती है। खासकर उत्तम श्रेणी की रचनाकार को वह पचा नहीं पाता है।

शार्लोट लॉर्ड बायरन के लेखन की मुरीद थी, भीतर कहीं बायरन से स्पर्द्धा भी थी। अत: उसने ‘जेन एयर’ के लेखन में ‘मैं’ की शैली अपनाई और बायरन के समकक्ष पहुंची, केवल खुद को सिद्ध करने केलिए ऐसा किया। कब तक नकारोगे शार्लोट ब्रॉन्टी जैसी सशक्त रचनाकार को?

रचना की गुणवत्ता पाठक के सिर चढ़ कर बोलती है। जिसे पाठक ने अपना लिया, उसका समाज एवं आलोचक क्या बिगाड़ पाएंगे। ‘जेन एयर’ जैसी रचना सदियों तक पाठक की प्रिय रही है, सदियों तक प्रिय रहेगी।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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