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अद्भुत, अविस्मरणीय, अद्वितीय... भारत की बेटियां
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बाएं से डायना डायना एडुल्जी, संध्या अग्रवाल और विश्व कप विजेता टीम की सदस्य शेफाली वर्मा।
- फोटो : Amar Ujala
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लंबे अरसे बाद ५० ओवरों का मैच पूरा देखा। जी हां। महिला विश्व कप फाइनल। शानदार खेल, बेहतरीन जीत।
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महिला क्रिकेट तब देखा, जब संध्या अग्रवाल और डायना एडुल्जी खेलती थीं। फिर ज्यादा फॉलो नहीं किया।
झूलन गोस्वामी और मिताली राज महिला क्रिकेट का पर्याय बने। ज्यादा फिर भी नहीं देखा।
दिवाली पर इंदौर था। बच्चों ने ज़िद की, तो भारत और इंग्लैंड का मुकाबला देखने होलकर स्टेडियम पहुंच गया। दिवाली के त्योहार के बीच स्टेडियम लगभग भरा देखकर खुशी और आश्चर्य, दोनों हुए। थोड़ी देर में लौट आएंगे, यही सोच कर गए थे। पूरा मैच देखकर लौटे। भारत हार गया था वो मैच पर खेल बढ़िया था।
फिर सेमीफाइनल का वो शानदार मैच। वो ही अपने आप में फाइनल से कम नहीं था। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम। 338 का विशाल स्कोर। मगर टीम ने चमत्कार कर दिया।
मुंबई की लड़की जेमिमा रॉड्रिग्ज, जो कल तक बहुतों के लिए अनजान थी, हर घर में पहचानी जाने लगी। उसकी मिट्टी सनी टी-शर्ट और अनायास बहते आंसू महिला शक्ति का नया प्रतीक बन गए।
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स्मृति मंधाना, जेमिमा और हरमनप्रीत के मजबूत कन्धों पर सवार टीम जब फाइनल में पहुंची तो उम्मीदें आसमान पर थीं। जेमिमा के सेमीफाइनल वाले आंसू तो मुंबई के आसमान ने पहले ही बहा दिए। मैच दो घंटे देरी से शुरू हुआ।
टॉस हारे पर उम्मीद पूरी थी। नवी मुंबई का डी वाय पाटिल स्टेडियम नीले समंदर की तरह नज़र आ रहा था।
शुरुआत बढ़िया रही। स्मृति और शेफाली की जोड़ी कमाल है। पर जब टूटी, तो फिर आगे वो बड़े स्कोर की उम्मीद भी टूटी। 300 पार नहीं जा पाए। 298 पर पारी थम गई। पर हां, आखिरी ओवरों में ऋचा घोष की ताबड़तोड़ पारी ने वो रन दिए, जो जीत के लिए निर्णायक साबित हुए।
लगा - हो पाएगा या नहीं?
पर दीप्ति शर्मा हो, शेफाली वर्मा हो या श्री चरणी, शानदार गेंदबाजी की। अमनजोत ने क्या शानदार फील्डिंग की।
इस अद्भुत मैच ने महिला क्रिकेट के नए अध्याय की शुरुआत की है। लंबा सफर तय कर के ये लक्ष्य हासिल हुआ है। पीढ़ियों की मेहनत है।
बहुत बधाई। शुभकामना।