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ऊर्जा संकट: इथेनॉल बन सकता है भारत के लिए बड़ा सहारा
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सार
वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत सरकार के इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम ने देश की समग्र मजबूती बढ़ाई है। इससे किसानों को सीधा फायदा मिला, ग्रामीण आय में बढ़ोतरी हुई और देश के भीतर एक स्थिर और स्वदेशी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हुई।
इथेनॉल ब्लेंडिंग
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
ईरान-अमेरिका के बीच जारी युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में ऊर्जा का बड़ा संकट खड़ा होता दिख रहा है। इसका बाजार पर भी असर दिख रहा है। विपरीत परिस्थियों वाले इस समय में भारत ने अपनी इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के जरिए एक बेहद दूरदर्शी और मजबूत कदम उठाया है। सरकार का इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम (EBPP), खासतौर पर पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने (E20) की ओर तेजी से बढ़ना, देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता का एक अहम आधार बनकर उभरा है।
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हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक संघर्षों, विशेष रूप से युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़े झटके देखने को मिले। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में अचानक और लगातार बढ़ोतरी ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर भारी आर्थिक दबाव डाल दिया। तेल की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ीं कि कंपनियों को बड़े स्तर पर घाटा सहना पड़ा।
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हालांकि, भारत सरकार ने आम लोगों पर पेट्रोल-डीजल की महंगाई का सीधा बोझ न डालने का फैसला किया है। यानी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बावजूद उपभोक्ताओं को मार नहीं झेलनी पड़ी। यह फैसला सामाजिक रूप से जिम्मेदार और जनता के हित में था, लेकिन इसकी वजह से OMCs को असाधारण वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
इथेनॉल बन सकता है बड़ा सहारा
इस मुश्किल दौर में इथेनॉल एक मजबूत रणनीतिक सहारे के रूप में सामने आया। देश में ही उत्पादित इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर भारत ने महंगे कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने में बड़ी सफलता हासिल की। इसका सीधा फायदा यह हुआ कि विदेशी मुद्रा की भारी बचत हुई और देश वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता से कुछ हद तक सुरक्षित रहा। खासतौर पर E20 कार्यक्रम ने इस लाभ को और बढ़ाया, क्योंकि इससे जीवाश्म ईंधन की मांग का बड़ा हिस्सा कम हुआ।
सिर्फ आर्थिक लाभ ही नहीं दरअसल इथेनॉल पहल ने देश की मजबूती भी बढ़ाई। इससे किसानों को सीधा फायदा मिला, ग्रामीण आय में बढ़ोतरी हुई और देश के भीतर एक स्थिर और स्वदेशी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हुई।
मंत्रालय, प्रशासनिक संस्थाओं और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा इथेनॉल को अपनाने में जो स्पष्टता और विश्वास दिखाया गया, वह एक मजबूत और एकजुट राष्ट्रीय सोच को दर्शाता है।
सीधे शब्दों में कहें तो, संकट के समय भले ही OMCs को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन इथेनॉल ब्लेंडिंग ने देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को काफी हद तक कम कर दिया। इसने सरकार को उपभोक्ताओं को कीमतों के झटकों से बचाने का मौका दिया, साथ ही लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाया।
इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम की सफलता यह साबित करती है कि सही रणनीति, दूरदर्शी सोच और घरेलू क्षमता के बल पर वैश्विक संकट को भी सतत विकास के अवसर में बदला जा सकता है।
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(लेखक ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (GEMA) के अध्यक्ष हैं।)
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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