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Depression: मूड ठीक न होने की वजह यह तो नहीं, सूजन कम करने वाली दवाओं से डिप्रेशन के मरीजों को होगा फायदा?
Sun, 28 Jun 2026 08:00 AM IST
निर्मल कांत
डाना जी स्मिथ, द न्यूयॉर्क टाइम्स
डाना जी स्मिथ, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 28 Jun 2026 08:00 AM IST
सार
लगातार थकान, कम भूख और उदासी का कारण केवल मानसिक ही नहीं, बल्कि आपके शरीर के भीतर छिपे एक खास प्रोटीन की बगावत भी हो सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : AI
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विस्तार
मानसिक बीमारियों के इलाज में ऐसी दवाओं के इस्तेमाल का लंबा इतिहास रहा है, जिन्हें असल में किसी और मकसद से बनाया गया था। उदाहरण के लिए, डिप्रेशन (अवसाद) की पहली एंटी-डिप्रेसेंट दवा टीबी के लिए बनी थी। केटामाइन की शुरुआत एनेस्थेटिक के तौर पर हुई थी, और अब वैज्ञानिक जांच रहे हैं कि क्या एंटी-इन्फ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाली) दवाएं भी डिप्रेशन के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।
एक शोध के अनुसार, डिप्रेशन से जूझ रहे करीब 25 प्रतिशत लोगों के रक्त में सूजन बढ़ाने वाले प्रोटीन का स्तर सामान्य से अधिक पाया जाता है। ये प्रोटीन सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को कम कर सकते हैं, जो मूड, खुशी व भावनात्मक संतुलन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इतना ही नहीं, ये मस्तिष्क के उन हिस्सों की कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर सकते हैं, जो प्रेरणा, उत्साह और उपलब्धि की भावना को नियंत्रित करते हैं। यही कारण है कि बढ़ती सूजन व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर असर डालते हुए उसे डिप्रेशन का शिकार बना सकती है।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि डिप्रेशन के जिन मरीजों के शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) का स्तर अधिक होता है, उनमें कुछ विशेष शारीरिक और मानसिक लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें लगातार थकान, भूख कम लगना, नींद की समस्याएं और आनंद देने वाली गतिविधियों में रुचि घट जाना शामिल है। इंग्लैंड के मनोचिकित्सक डॉ. गोलम खांडेकर के अनुसार, ऐसे मरीजों की कुछ विशिष्ट विशेषताएं उन्हें अन्य प्रकार के डिप्रेशन से अलग बनाती हैं। यही वजह है कि उन्होंने इस स्थिति को ‘इन्फ्लेम्ड डिप्रेशन’ नाम देना शुरू किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डॉ. माइकल इरविन के अनुसार, कुछ मामलों में सूजन वास्तव में डिप्रेशन की एक महत्वपूर्ण वजह हो सकती है।
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विशेषज्ञ डिप्रेशन के इलाज में सीधे एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। डॉ. गोलम खांडेकर सहित कुछ मनोचिकित्सक मरीजों को व्यायाम, संतुलित आहार तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि शरीर में सूजन के स्तर को कम किया जा सके। डॉ. इरविन के अनुसार, मौजूदा शोध यह तो दिखाते हैं कि सूजन और डिप्रेशन के बीच संबंध हो सकता है, पर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस जानकारी को प्रभावी उपचार में कैसे बदला जाए।
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एक शोध के अनुसार, डिप्रेशन से जूझ रहे करीब 25 प्रतिशत लोगों के रक्त में सूजन बढ़ाने वाले प्रोटीन का स्तर सामान्य से अधिक पाया जाता है। ये प्रोटीन सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को कम कर सकते हैं, जो मूड, खुशी व भावनात्मक संतुलन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इतना ही नहीं, ये मस्तिष्क के उन हिस्सों की कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर सकते हैं, जो प्रेरणा, उत्साह और उपलब्धि की भावना को नियंत्रित करते हैं। यही कारण है कि बढ़ती सूजन व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर असर डालते हुए उसे डिप्रेशन का शिकार बना सकती है।
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शोधकर्ताओं ने पाया है कि डिप्रेशन के जिन मरीजों के शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) का स्तर अधिक होता है, उनमें कुछ विशेष शारीरिक और मानसिक लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें लगातार थकान, भूख कम लगना, नींद की समस्याएं और आनंद देने वाली गतिविधियों में रुचि घट जाना शामिल है। इंग्लैंड के मनोचिकित्सक डॉ. गोलम खांडेकर के अनुसार, ऐसे मरीजों की कुछ विशिष्ट विशेषताएं उन्हें अन्य प्रकार के डिप्रेशन से अलग बनाती हैं। यही वजह है कि उन्होंने इस स्थिति को ‘इन्फ्लेम्ड डिप्रेशन’ नाम देना शुरू किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डॉ. माइकल इरविन के अनुसार, कुछ मामलों में सूजन वास्तव में डिप्रेशन की एक महत्वपूर्ण वजह हो सकती है।
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विशेषज्ञ डिप्रेशन के इलाज में सीधे एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। डॉ. गोलम खांडेकर सहित कुछ मनोचिकित्सक मरीजों को व्यायाम, संतुलित आहार तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि शरीर में सूजन के स्तर को कम किया जा सके। डॉ. इरविन के अनुसार, मौजूदा शोध यह तो दिखाते हैं कि सूजन और डिप्रेशन के बीच संबंध हो सकता है, पर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस जानकारी को प्रभावी उपचार में कैसे बदला जाए।