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जीवन धारा: अपने तजुर्बे अगली पीढ़ी को दें, सूत्र- अनुभवों को साझा करें

Mon, 29 Jun 2026 07:12 AM IST
Pavan सिसरो
सिसरो Published by: Pavan Updated Mon, 29 Jun 2026 07:12 AM IST
सार

महानता यह नहीं कि मनुष्य ने अपने लिए कितना अर्जित किया, बल्कि इसमें है कि उसने आने वाली पीढ़ी के लिए क्या छोड़ा। जो अपने अनुभव को अगली पीढ़ी तक पहुंचाता है, वही समय पर विजय प्राप्त कर लेता है।

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Jeevan Dhara: Pass on your experience to the next generation- share your experiences.
अपने तजुर्बे अगली पीढ़ी को दें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

लोग अक्सर बुढ़ापे को लेकर परेशान रहते हैं। कहते हैं कि बुढ़ापा शरीर की शक्ति को क्षीण कर देता है, उत्साह और जोश कम कर देता है और यह उन कार्यों से दूर कर देता है, जिनमें वह युवावस्था में आनंद पाता था। लेकिन, मैं मानता हूं कि जो लोग वृद्धावस्था को बोझ समझते हैं, वे उसके वास्तविक उपहारों को पहचान नहीं पाते। युवावस्था का अपना सौंदर्य है। उसमें गति है, साहस है, आकांक्षा है। पर वृद्धावस्था का भी अपना गौरव है। उसमें अनुभव है, विवेक है और जीवन को समग्रता में देखने की क्षमता है।
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यदि युवावस्था बीज बोने का समय है, तो वृद्धावस्था उस वृक्ष के फल देने का समय है। और किसी वृक्ष का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल स्वयं बढ़ना नहीं, बल्कि अपने फल और बीजों से अगली पीढ़ी को समृद्ध करना है। ज्यादातर लोग वृद्धावस्था की ओर बढ़ते हुए स्वयं को निरर्थक समझने लगते हैं। वे सोचते हैं कि अब समाज को उनकी जरूरत नहीं रही। यह बड़ी भूल है। वास्तव में, जीवन का वह चरण जब मनुष्य सबसे अधिक उपयोगी हो सकता है, वृद्धावस्था ही है। जो बातें युवाओं को केवल पुस्तकों से मिलती हैं, वे वृद्धों को जीवन से प्राप्त होती हैं। अनुभव वह शिक्षक है, जो बड़ी कीमत लेकर शिक्षा देता है। मनुष्य अपनी सफलताओं से कम और अपनी भूलों से अधिक सीखता है। वर्षों के संघर्ष, फैसलों, जय-पराजय ही उसे ऐसी दृष्टि प्रदान करते हैं, जो किसी विद्यालय में नहीं सिखाई जा सकती। यदि यह अनुभव उसी व्यक्ति के साथ समाप्त हो जाए, तो यह समाज की बड़ी हानि होगी। किंतु, यदि वह अपने अनुभवों को अगली पीढ़ी को सौंप दे, तो उसका जीवन उसकी मृत्यु के बाद भी फल देता रहता है।
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वृद्धावस्था का सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य युवाओं का मार्गदर्शन करना है। यह मार्गदर्शन आदेश देकर नहीं, बल्कि उदाहरण देकर होना चाहिए। युवा उपदेशों से कम और जीवन से अधिक सीखते हैं। किसी राष्ट्र की शक्ति केवल उसकी सेनाओं या उसकी संपत्ति में ही नहीं होती, बल्कि उसके अनुभवी नागरिकों की बुद्धिमत्ता में भी होती है। वृद्ध उस पुल के समान होते हैं, जो अतीत की सीखों को भविष्य की संभावनाओं से जोड़ते हैं। प्रकृति स्वयं हमें यही शिक्षा देती है। वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते। नदियां अपना जल स्वयं नहीं पीतीं। सूर्य अपना प्रकाश स्वयं के लिए नहीं रखता। प्रकृति की हर वस्तु अपने से आगे कुछ देने के लिए अस्तित्व में है। मनुष्य भी इसी नियम का भाग है। यदि उसने जीवन से कुछ सीखा है, तो उसका सबसे अच्छा उपयोग उसे बांटने में ही है। मनुष्य की महानता इस बात में नहीं है कि उसने अपने लिए कितना अर्जित किया, बल्कि इस बात में है कि उसने अपने बाद आने वालों के लिए क्या छोड़ा। और जो वृद्ध अपने अनुभव को अगली पीढ़ी तक पहुंचा देता है, वही वास्तव में समय पर विजय प्राप्त कर लेता है।
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सूत्र- अनुभवों को साझा करें
वृद्धावस्था जीवन का बोझ नहीं, बल्कि अनुभव, विवेक और मार्गदर्शन का स्वर्णिम काल है। वर्षों के संघर्ष और सीख से अर्जित ज्ञान जब अगली पीढ़ी तक पहुंचता है, तभी उसका वास्तविक मूल्य सिद्ध होता है। जैसे वृक्ष अपने फल और नदियां अपना जल दूसरों के लिए समर्पित करती हैं, वैसे ही मनुष्य की महानता अपने अनुभवों को बांटने में है।
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