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प्रियदर्शन जन्मदिवस विशेष: रुपहले परदे पर प्रियदर्शन का जादू

Mon, 30 Jan 2023 02:09 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Mon, 30 Jan 2023 02:09 PM IST
सार

मलयालम-हिन्दी के अलावा प्रियदर्शन ने मुख्यरूप से तमिल तथा तेलगु को मिला कर करीब 95 फिल्मों का निर्देशन किया है। मेरी दृष्टि में उनकी कई हिन्दी फिल्में उनकी मलयालम फिल्मों से बेहतर हैं।

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Priyadarshan birthday, Indian film director and screenwriter in Malayalam and Hindi cinema
66 के हुए निर्देशक प्रियदर्शन - फोटो : Twitter

विस्तार

निर्देशक प्रियदर्शन के नाम से हिन्दी सिने-दर्शक भली-भांति परिचित हैं, क्योंकि उनकी बनाई ‘हेरा फेरी’, ‘हंगामा’, ‘हलचल’, ‘गरम मसाला’, ‘भागम भाग’... (लिस्ट और लंबी है) देख कर भला कौन दर्शक हंस-हंस कर लोट-पोट नहीं हुआ है? अरे वही, जो है तो मलयाली पर बड़ी सहजता से मलयालम ही नहीं हिन्दी में भी फिल्म बनाते हैं। जी हां, हिन्दी दर्शक उनकी फिल्में हिन्दी सबटाइटिल या डबिंग की सहायता से नहीं देखता है, बल्कि हिन्दी में देखता है। उन्होंने अपनी और अन्य निर्देशकों की कई मलयालम फिल्मों को बड़ी खूबसूरती से हिन्दी का जामा पहनाया हुआ है।

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मलयालम-हिन्दी के अलावा उन्होंने मुख्य रूप से तमिल, तथा तेलगु को मिला कर करीब 95 फिल्मों का निर्देशन किया है। मेरी दृष्टि में उनकी कई हिन्दी फिल्में उनकी मलयालम फिल्मों से बेहतर हैं। ‘खट्टा-मीठा’, ‘हंगामा’, ‘मेरे बाप पहले आप’ इसके कुछ उदाहरण है।

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हिंदी-तेलगु में बनाई कल्ट फिल्में

चार्ल्स डिकेंस के नाटक ‘द स्ट्रेंज जेंटलमैन’ से प्रेरित हो राम गोपाल वर्मा ने तेलगू में फिल्म बनाई, उसी पर प्रियदर्शन ने 1983 में मलयालम में ‘नोज पिन फॉर द कैट’ (poochakkoru mookkuthi) कल्ट फिल्म बना दी और करीब बीस साल बाद उसी पर हिन्दी में ‘हंगामा’ बनाई और हिन्दी दर्शकों के बीच हंगामा मच गया। इसी तरह अपनी ही फिल्म ‘किलुक्कम’ (Kilukkam, 1991) अगली साल ‘मुस्कुराहट’ में बदल गई। फिल्म में अमरीश पुरी और रेवती की केमिस्ट्री देखने लायक है।

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अपनी ही फिल्म ‘वेल्लानकलुडे नाडु’ (Vellanakalude  Nadu 1988) को ‘खट्टा मीठा’ में रूपांतरित कर दिया। ‘ये मेरा घर ये तेरा घर’ आप भूले नहीं होंगे। जब प्रियदर्शन ने एम. मोहनन निर्देशित मलयालम फिल्म ‘कथा परयुम्पोल’ (Kadha Parayumbol) को हिन्दी में ‘बिल्लू’ नाम से बनाया तो दोनों भाषाओं के जानकारों के अनुसार ‘बिल्लू’ इक्कीस ठहरी न बीस न उन्नीस ठहरी। सिबि मलयिल की ‘इस्टम्’ (Ishtam) को ‘मेरे बाप पहले आप’ बना दिया जिसमें नसीर कुछ सेकेंड में दर्शकों का दिल जीत लेते हैं, जबकि परेश रावल, शोभना, अक्षय खन्ना, ओम पुरी, जेनेलिया डि’सूजा पहले ही यह काम कर चुके होते हैं।
 

क्रिकेटर बनना चाहते थे प्रियदर्शन

दर्शकों और समीक्षकों के प्रिय निर्देशक ने फिल्म बनाने के बारे में कभी सोचा न था। अगर आंख में चोट न लग जाती तो वे शानदार क्रिकेटर बनते, इसमें शक नहीं क्योंकि यह उनका प्रथम चुनाव था। समृद्ध कलर ग्रेडिंग (एक खास तकनीक), स्पष्ट और गुणवत्तापूर्ण डबिंग भारत में लाने का श्रेय 30 जनवरी 1957 को जन्मे इसी निर्देशक को जाता है। पिता कॉलेज लाइब्रेरियन थे, सो किताबों का चस्का लगना ही था, इसके साथ ही ऑल इंडिया रेडियो के लिए स्किट और लघु नाटक लिखना भी होने लगा।

मोहनलाल दोस्त थे और जब मोहनलाल फिल्म में काम करने मद्रास (आज के चेन्नई) गए तो कई अन्य दोस्तों की तरह फिल्म में काम पाने के लिए प्रियदर्शन भी मद्रास गए। और दोस्त की सहायता से सह-स्क्रिप्टराइटर का काम मिला। सफल तो होना ही था।

कुछ दिन बाद प्रियदर्शन केरल लौट आए मगर दोस्त को नहीं भूले। उनकी अधिकांश फिल्म के नायक मोहनलाल होते। ‘कालापानी’, ‘किलुक्कम्’, ‘चित्रम्’, ‘मरक्कार: लायन ऑफ दि अरेबियन सी’ ‘गीतांजलि’, ‘नो: 20 मद्रास मेल’, ‘दि अरब, द केमल, एंड पी. माधवन नायर’, ‘अद्वैतम्’, ‘अभिमन्यु’, ‘चंद्रलेखा’, ‘खूनी इंसान’, ‘वेल्लानकलुडे नाडु’ आदि तमाम फिल्में हैं, जिसमें उतार-चढ़ाव में साथ देने वाले जीवन साथी को निर्देशक ने नायक बनाया है और एक बार निर्देशक का चोला उतार कर मोहनलाल की एक फिल्म में स्वयं अभिनय भी किया, भले ही केमियो रोल किया तो क्या


मोहनलाल के अलावा उनके साथ कई मलयालम, हिन्दी के प्रसिद्ध अभिनेताओं ने काम किया है। ‘मेघं’ में मम्मूटि को लेना एक उदाहरण है। परेश रावल, अक्षय खन्ना, अक्षय कुमार, नसीर, ओम पुरी, अमरीश पुरी आदि।
 

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प्रियदर्शन ने ढ़ेरों फिल्में बनाई। - फोटो : Twitter

ऋतुपर्ण घोष जैसे कई अन्य निर्देशकों की तरह प्रियदर्शन ने ढ़ेरों विज्ञापन फिल्में भी बनाई। जिनमें ‘कोका-कोला’, ‘अमेरिकन एक्सप्रेस’, ‘नोकिया’, ‘पार्कर पेन्स’, ‘एशियन पेन्ट्स’, ‘किनले’, ‘मैक्स न्यू यॉर्क लाइफ इन्श्योरेंस’ आदि खूब सफल रहे। इस प्रतिभावान निर्देशक की मुलाकात मलयालम की अभिनेत्री लिजी से अपनी दूसरी ही फिल्म के सेट पर हुई और जल्द दोनों ने शादी कर ली। दोनों ने साथ-साथ में एक दर्जन फिल्में की, हालांकि अब लिजी ने फिल्मों से सन्यास ले लिया है। कल्याणी और सिद्धार्थ उनके बच्चों के नाम हैं। वैसे तलाक के बाद दोनों अब अपने-अपने रास्ते पर हैं।

कॉमेडी और गंभीर, दोनों तरह की फिल्में रहीं हिट

कॉमेडी फिल्म बनाने वाले इस निर्देशक को गंभीर फिल्म बनाने में भी कुशलता हासिल है। विश्वास न हो तो मलयालम फिल्म ‘कालापानी’ तथा ‘थालवट्टम’ देख लें। ‘कालापानी’ उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी इस गाथात्मक फिल्म में उन्होंने मोहनलाल के अलावा तब्बू, प्रभु, श्रीनिवासन, अमरीश पुरी, अनु कपूर, विनीत को लिया। इस नायाब फिल्म का संगीत स्वयं इलईराजा ने दिया है।

फिल्म को कई पुरस्कार प्राप्त हुए। यह फिल्म हिन्दी, तेलगु तथा तमिल में भी उपलब्ध है। ‘वेल्लानकलुडे नाडु’ और उसी पर बनी ‘खट्टा मीठा’ की स्क्रिप्ट श्रीनिवासन की है। यह फिल्म भ्रष्टाचार, लैंड माफिया तथा कई अन्य सामाजिक मुद्दों को उठाती है। अक्षय कुमार के अलावा यहां तृषा कृष्णन, राजपाल यादव एवं असरानी भी सक्रिय हैं। यह उनकी एक सफलतम फिल्म है। 

उनकी फिल्म ‘चित्रम्’ का रिकॉर्ड उनकी ही एक अन्य फिल्म ‘किलुक्कम’ (हिन्दी में ‘मुस्कुराहट’) ने तोड़ा। ‘किलुक्कम’ प्रियदर्शन-मोहनलाल जोड़ी की आज भी सफलतम फिल्म मानी जाती है। 1988 में प्रियदर्शन ने कमाल कर दिया, इस साल उनकी पांच फिल्में रिलीज हुईं। ए. के. लोहितदास की कहानी पर मलयालम फिल्म ‘किरीटम’ को आधार बना कर हिन्दी में ‘गर्दिश’ बनाई जिसमें उन्होंने हिन्दी दर्शकों को ध्यान में रख कर काफी-कुछ जोड़ा और फिल्म को सफल होना ही था।

इसकी सफलता के फलस्वरूप उन्हें 1996 में बैंगलोर में होने वाले ‘मिस वर्ल्ड’ का निर्देशन का दायित्व प्राप्त हुआ। उनकी फिल्म ‘कांचीवरम’ उनकी अन्य फिल्मों से बिल्कुल हट कर है। यह कांचीपुरम के बुनकरों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। इस फिल्म के केंद्रीय पात्र के रूप में प्रकाश राज को 2008 का सर्वोत्तम अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।

एक आलेख में प्रियदर्शन की फिल्मों को समेटना संभव नहीं है अत: आज इतना ही। अगर न देखी हो तो उनकी साइकोलॉजिकल, कॉमेडी-हॉरर मलयामल फिल्म ‘मणिचित्रट्टाषु’ अथवा हिन्दी की ‘भूल भुल्लैया’ देख लें और अगर उसके लिए समय न हो तो श्रेया घोषाल-एम. जी श्रीकुमार के मधुर स्वर में ‘आमी जे तोमार...’ (गीतकार समीर, संगीतकार प्रीतम) सुन लें।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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