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सुनीता विलियम्स: जब मैंने अंतरिक्ष से भारत को देखा.... सोचा- यही है महान भारत, यही घर है मेरा
सुनीता विलियम्स, भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 26 Jan 2026 07:44 AM IST
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सार
Sunita Williams: अंतरिक्ष स्टेशन से हम जितनी बार भी भारत के ऊपर से गुजरे, हमने देखा शानदार हिमालय। खूबसूरत रंगों की वह लहर देख हम सभी मंत्रमुग्ध थे। मैंने सोचा यही है महान भारत। यही घर है मेरा।
सुनीता विलियम्स: जब मैंने अंतरिक्ष से भारत को देखा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत अद्भुत देश है! अंतरिक्ष से देखने पर यह अद्भुत दिखता है। अमेरिकी अंतरिक्ष स्टेशन से हम जितनी बार भी हिमालय के ऊपर से गुजरे, तो मेरे साथी अंतरिक्ष यात्रियों ने इसकी शानदार तस्वीरें लीं, जो बेहद अद्भुत हैं! अंतरिक्ष से दिखने वाले भारत के नजारे देखकर मैं मंत्रमुग्ध हो जाती हूं-पश्चिम में मछली पकड़ने वाले बेड़ों से लेकर उत्तर में शानदार हिमालय तक, यह मेरे लिए घर जैसा ही है। मैंने पहले भी हिमालय को एक लहर की तरह बताया है, जो साफ तौर पर तब बनी, जब प्लेटें टकराईं और फिर, जैसे-जैसे यह भारत में नीचे आती है, इसके कई-कई रंग होते हैं। मुझे लगता है कि जब आप पूरब से गुजरात और मुंबई की तरफ जाते हैं, और (आप) वहां तट के पास मछली पकड़ने वाले जहाजों का बेड़ा देखते हैं, तो यह आपको एक तरह से इशारा देता है कि हम भारत आ गए हैं। मुझे लगता है कि पूरे भारत को लेकर मेरी धारणा यह थी कि यह रोशनी का एक नेटवर्क है, जो बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों तक फैला हुआ है, और रात एवं दिन में भी देखने में बहुत शानदार लगता है, खासकर हिमालय की वजह से, जो भारत में नीचे की ओर जाते हुए सबसे आगे है।
मुझे खुशी है कि मुझे भारत यात्रा के दौरान ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिल रहा है, क्योंकि यह एक महान देश है और एक शानदार लोकतंत्र है। मेरे पिता भारत में पैदा हुए थे, इसलिए अपने 'पिता के देश' की यात्रा करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं बहुत दिन से इस यात्रा की उम्मीद कर रही थी। भारत अंतरिक्ष में अपने अंतरिक्षयान भेजने वाले देशों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है और मैं इसका हिस्सा बनना चाहूंगी और भारत की मदद करना चाहूंगी। इस समय मुझे लगता है कि पूरी दुनिया में अंतरिक्ष की होड़ चल रही है। लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं। हम चांद पर वापस जाना चाहते हैं, ताकि वहां काम करने के नियमों और तरीकों के बारे में बातचीत शुरू कर सकें, कि हम वास्तव में चांद पर कैसे काम करेंगे, खासतौर पर दूसरे देशों के साथ मिलकर । लेकिन यह भी सुनिश्चित करना है कि यह काम अंटार्कटिका की तरह ही उत्पादक और लोकतांत्रिक तरीके से हो। मेरा मतलब है, यह उसी तरह की चीज है।
मुझे लगता है कि जब आप अंतरिक्ष में जाते हैं, तो सबसे पहली चीजों में से एक जो आप करते हैं, वह यह कि हम सब अपना घर ढूंढना चाहते हैं, जैसे हमारा अपना घर। मैं मैसाचुसेट्स में पली-बढ़ी हूं। मेरे पिता भारत से हैं। मेरी मां स्लोवेनिया से हैं। इसलिए मैं जाहिर है कि उन जगहों को ढूंढ रही हूं, जिन्हें मैं अपना घर कह सकूं। मुझे लगता है कि हर कोई ऐसा करता है, या हो सकता है कि मैं गलत कह रही हूं। और यही आपका पहला मकसद है-इस ग्रह को एक ग्रह के तौर पर देखना। हमारा ग्रह जिंदा है।
कुछ लोगों को लगता है कि वहां सिर्फ चट्टानें हैं। लेकिन यह हिल रहा है। मैं वे खास हलचलें तो नहीं देख पाई, लेकिन मैं वातावरण को देख सकती थी। मैं पारस्परिक क्रिया को देख सकती थी। मैं मौसम देख सकती थी। मैं समुद्र के रंगों में बदलाव देख सकती थी, जैसे कि शैवाल के खिलने से, या उत्तरी गोलार्ध में या अंटार्कटिका के पास बर्फ बनने को देख सकती थी। आप यह सब देख सकते हैं। हवा और पानी जुड़े हुए हैं। और फिर आप खुद अपने बारे में सोचते हैं। मेरे लिए, यह ऐसा था, ओह, हे भगवान, मैं जितने भी लोगों को जानती हूं, वे सब वहां हैं। हर जानवर, हर पौधा, हम जो कुछ भी जानते हैं, वे सब वहां है। और हम सब इस एक चीज पर हैं, जिसे वे हमारे सौर मंडल में एक छोटा-सा अंतरिक्षयान कहते हैं। यह हमारे बीच किसी भी तरह के मतभेदों के बारे में सोच को बदल देता है। यह सच में आपको ऐसा महसूस कराता है कि हम सब एक हैं, और हम सभी को शायद थोड़ा और करीब तथा मिलकर काम करना चाहिए, क्योंकि मुझे लगता है कि मेरी सबसे बड़ी धारणा यह है कि लोग अच्छे होते हैं। लोग भले होते हैं। लेकिन हम जिंदगी की उलझनों में कभी-कभी यह भूल जाते हैं। क्योंकि हम इस या उस बात पर, धर्म, राजनीति, वगैरह-वगैरह पर बहस करने लगते हैं। लेकिन हम सब इन्सान हैं और हम एक-दूसरे की परवाह करते हैं। यह अंतरिक्ष में मेरी सीखी हुई सबसे बड़ी सीखों में से एक है। (विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित)
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मुझे खुशी है कि मुझे भारत यात्रा के दौरान ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिल रहा है, क्योंकि यह एक महान देश है और एक शानदार लोकतंत्र है। मेरे पिता भारत में पैदा हुए थे, इसलिए अपने 'पिता के देश' की यात्रा करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं बहुत दिन से इस यात्रा की उम्मीद कर रही थी। भारत अंतरिक्ष में अपने अंतरिक्षयान भेजने वाले देशों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है और मैं इसका हिस्सा बनना चाहूंगी और भारत की मदद करना चाहूंगी। इस समय मुझे लगता है कि पूरी दुनिया में अंतरिक्ष की होड़ चल रही है। लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं। हम चांद पर वापस जाना चाहते हैं, ताकि वहां काम करने के नियमों और तरीकों के बारे में बातचीत शुरू कर सकें, कि हम वास्तव में चांद पर कैसे काम करेंगे, खासतौर पर दूसरे देशों के साथ मिलकर । लेकिन यह भी सुनिश्चित करना है कि यह काम अंटार्कटिका की तरह ही उत्पादक और लोकतांत्रिक तरीके से हो। मेरा मतलब है, यह उसी तरह की चीज है।
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मुझे लगता है कि जब आप अंतरिक्ष में जाते हैं, तो सबसे पहली चीजों में से एक जो आप करते हैं, वह यह कि हम सब अपना घर ढूंढना चाहते हैं, जैसे हमारा अपना घर। मैं मैसाचुसेट्स में पली-बढ़ी हूं। मेरे पिता भारत से हैं। मेरी मां स्लोवेनिया से हैं। इसलिए मैं जाहिर है कि उन जगहों को ढूंढ रही हूं, जिन्हें मैं अपना घर कह सकूं। मुझे लगता है कि हर कोई ऐसा करता है, या हो सकता है कि मैं गलत कह रही हूं। और यही आपका पहला मकसद है-इस ग्रह को एक ग्रह के तौर पर देखना। हमारा ग्रह जिंदा है।
कुछ लोगों को लगता है कि वहां सिर्फ चट्टानें हैं। लेकिन यह हिल रहा है। मैं वे खास हलचलें तो नहीं देख पाई, लेकिन मैं वातावरण को देख सकती थी। मैं पारस्परिक क्रिया को देख सकती थी। मैं मौसम देख सकती थी। मैं समुद्र के रंगों में बदलाव देख सकती थी, जैसे कि शैवाल के खिलने से, या उत्तरी गोलार्ध में या अंटार्कटिका के पास बर्फ बनने को देख सकती थी। आप यह सब देख सकते हैं। हवा और पानी जुड़े हुए हैं। और फिर आप खुद अपने बारे में सोचते हैं। मेरे लिए, यह ऐसा था, ओह, हे भगवान, मैं जितने भी लोगों को जानती हूं, वे सब वहां हैं। हर जानवर, हर पौधा, हम जो कुछ भी जानते हैं, वे सब वहां है। और हम सब इस एक चीज पर हैं, जिसे वे हमारे सौर मंडल में एक छोटा-सा अंतरिक्षयान कहते हैं। यह हमारे बीच किसी भी तरह के मतभेदों के बारे में सोच को बदल देता है। यह सच में आपको ऐसा महसूस कराता है कि हम सब एक हैं, और हम सभी को शायद थोड़ा और करीब तथा मिलकर काम करना चाहिए, क्योंकि मुझे लगता है कि मेरी सबसे बड़ी धारणा यह है कि लोग अच्छे होते हैं। लोग भले होते हैं। लेकिन हम जिंदगी की उलझनों में कभी-कभी यह भूल जाते हैं। क्योंकि हम इस या उस बात पर, धर्म, राजनीति, वगैरह-वगैरह पर बहस करने लगते हैं। लेकिन हम सब इन्सान हैं और हम एक-दूसरे की परवाह करते हैं। यह अंतरिक्ष में मेरी सीखी हुई सबसे बड़ी सीखों में से एक है। (विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित)