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अध्ययन कक्ष: द ब्लड काउंटेस, खूंखार हत्यारिन की असल कथा

अमर उजाला Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 22 Feb 2026 06:46 AM IST
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सार

  • द ब्लड काउंटेस :  
  • मर्डर, बिट्रायल, एंड द
  • मेकिंग ऑफ ए मॉन्स्टर
  • लेखिका : शेली पुहक
  • प्रकाशक : ब्लूम्सबरी प्रकाशन
  • मूल्य : 3,007.70 रुपये (हार्डकवर)
इसी महीने प्रकाशित यह अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर गिनीज बुक में सबसे खूंखार हत्यारिन के तौर पर दर्ज हंगरी की ‘कातिल रानी’ के रहस्यपूर्ण जीवन की पड़ताल करता है, जो हरदम जवां रहने के लिए युवतियों के खून से नहाती थी। पर क्या यह कहानी सच थी?

The Blood Countess: Unveiling the True Story of Hungary’s Infamous Elizabeth Bathory
द ब्लड काउंटेस - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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विस्तार

रूह कंपा देने वाली यह कहानी है हंगरी की एक कुलीन महिला की, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह अपनी खूबसूरती बनाए रखने के लिए जवान लड़कियों के खून से नहाती थी। यह कहानी इतनी प्रामाणिक मानी गई कि 1960 के दशक में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इस महिला को 610 हत्याओं के लिए जिम्मेदार मानते हुए ‘दुनिया की सबसे खूंखार हत्यारिन’ का तमगा तक दे डाला। लेकिन क्या यह कहानी सच थी?
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शेली पुहक अपनी किताब द ब्लड काउंटेस (कातिल रानी) में दुनिया की सबसे खूंखार हत्यारिन मानी जाने वाली इस रानी की असल कथा जानने की कोशिश करती हैं। कुलीन महिला का नाम था एलिजाबेथ बाथरी और यह किताब उनके विषय में खुलासा करती है कि यह पूरी कहानी उनके दुश्मनों द्वारा गढ़ा गया एक प्रपंच था, जो तत्कालीन पितृसत्तात्मक समाज में उनकी कामयाबी से ईर्ष्या करते थे। एलिजाबेथ बाथरी के पास विशाल संपत्ति, राजनीतिक संबंध और क्षेत्र में काफी शक्ति व शोहरत थी। कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट के बीच संघर्ष के दौर में उनके पड़ोसी कुलीन और धार्मिक नेता उनकी ताकत से डरते थे।
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किताब बताती है कि एलिजाबेथ के खिलाफ गवाही देने वाले अक्सर वही लोग थे, जो उसकी संपत्ति हड़पना चाहते थे या उससे लिया गया बकाया कर्ज देने से बचना चाहते थे। पुहक 16वीं और 17वीं सदी के हंगरी और यूरोप के जटिल राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक परिदृश्य को जीवंत ढंग से चित्रित करती हैं। लेखिका एलिजाबेथ की जिंदगी के विभिन्न पहलुओं को भी उजागर करती हैं और यह भी बताती हैं कि पति की मृत्यु के बाद उन्होंने कैसे अपनी संपत्ति का प्रबंधन किया और हर्बल उपचार के क्षेत्र में दखल के अपने शौक को कैसे उन्होंने अपने जीवन में स्थान दिया।

किताब यह खुलासा भी करती है कि तत्कालीन समाज में स्त्री और विज्ञान विरोध इस कदर व्याप्त था कि उसने एलिजाबेथ जैसी नेकदिल महिला को भी राक्षस बना दिया। किताब का सबसे मजबूत पक्ष इस पर किया गया शोध है। पुरानी सभी धारणाओं पर सवाल उठाते हुए पुहक बताती हैं कि 610 हत्याओं का आंकड़ा बाद में जोड़ा गया, उन पर चले मूल मुकदमे में तो इसका जिक्र तक नहीं था। किताब खुलासा करती है कि एलिजाबेथ के खिलाफ एक भी सुबूत न होने पर भी उन्हें उनके ही महल में चुनवा दिया गया और यह अफवाह फैला दी गई कि उनका साया किले की खिड़कियों से झांकता है।

हिस्टोरिकल टु क्राइम शैली में लिखी गई इस किताब में रहस्य, विश्वासघात व न्याय की खोज जैसे तत्व मिलते हैं, जबकि अंत में सच्चाई राजनीतिक साजिश और लैंगिक पूर्वाग्रह में छिपी मिलती है। हालांकि, कभी-कभी किताब राजनीतिक संदर्भों में इतनी गहराई में चली जाती है कि मुख्य विषय पीछे छूटता दिखता है। लेखिका एलिजाबेथ को बेगुनाह साबित करने में कितनी कामयाब रहती हैं, यह तो किताब पढ़ने से ही मालूम होगा, पर यह यूरोपीय इतिहास, अपराध-कथा और नारीवाद प्रेमियों के लिए अवश्य ही पठनीय कृति है।
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