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शी-मार्ट का वक्त: महिलाएं अब केवल लाभार्थी नहीं, उद्यमिता की दिशा में बढ़ा रहीं कदम
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सार
महिलाओं को आमतौर पर बाजार का सिर्फ उपभोक्ता माना जाता है, लेकिन अब वे केवल जीविकोपार्जन तक ही सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि शी-मार्ट्स के जरिये उद्यमिता की दिशा में भी कदम बढ़ा सकेंगी।
She Marts
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
यों तो एक महिला वित्त मंत्री के तौर निर्मला सीतारमण ने नौंवी बार संसद में केंद्रीय बजट पेश किया है, लेकिन इसमें सिर्फ महिलाओं को ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के दीर्घकालीन विकास की दिशा रेखांकित की गई है। इस बजट में कई ऐसी बातें हैं, जो महिलाओं के हित में होने का संकेत देती हैं। इसमें न केवल महिलाओं को लाभार्थी के रूप में देखा गया है, बल्कि एक पढ़ने-लिखने वाली लड़की के कॉलेज से निकलकर वैज्ञानिक बनने और स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आजीविका चलाने वाली ही नहीं, बल्कि उद्यम की परंपरा को बढ़ाने की क्षमता रखने वाली शक्ति के रूप में भी देखा गया है।
विशेष रूप से इस बजट में हर जिले में लड़कियों के लिए छात्रावास बनाने की बात कही गई है। अब तक शिक्षा नीति में मात्र एक्सेस यानी पहुंच की बात कही जाती थी, लेकिन इस बजट में सेफ एक्सेस यानी सुरक्षित पहुंच की बात कही गई है। इससे लड़कियां ज्यादा समय तक अच्छी जगहों पर रहकर पढ़ाई कर सकेंगी। इस बजट में एक और महत्वपूर्ण बात कही गई है-‘शी-मार्ट्स’ की, यानी अब महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं मानी जाएंगी, बल्कि यह प्रस्ताव एक दीर्घकालिक दृष्टि दे रहा है। अब महिलाएं केवल जीविकोपार्जन तक ही सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि शी-मार्ट्स के जरिये उद्यमिता की दिशा में भी कदम बढ़ा सकेंगी।
यह एक महत्वपूर्ण कदम इसलिए है, क्योंकि महिलाओं को आमतौर पर बाजार का उपभोक्ता माना जाता है। वह खरीदारी तो करती हैं, पर दुकानों में सामान बेचने वाले आमतौर पर पुरुष ही होते हैं। ‘शी-मार्ट्स’ के प्रावधान से उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले दिनों में बाजार का केवल उदारीकरण नहीं होगा, बल्कि नारीकरण की भी संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा, इस बजट में स्वास्थ्य पर भी बहुत ध्यान दिया गया है। सरकार 1.5 लाख मल्टी-स्किल्ड केयरगिवर्स को प्रशिक्षण देने की तैयारी में है। चूंकि इस क्षेत्र में ज्यादातर महिलाएं काम करती हैं, इसलिए इस योजना से भी महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
वित्त मंत्री ने लखपति दीदी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने और महिलाओं को 'क्रेडिट से जुड़े रोजगार से आगे बढ़कर एंटरप्राइज की मालिक बनने' में मदद करने का प्रस्ताव दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यम, व्यवसाय और रोजगार आदि के क्षेत्र में महिलाओं के हित में विभिन्न प्रावधानों के माध्यम से यह बजट महिलाओं के आगे बढ़ने की संभावनाओं को परिलक्षित करता है।
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विशेष रूप से इस बजट में हर जिले में लड़कियों के लिए छात्रावास बनाने की बात कही गई है। अब तक शिक्षा नीति में मात्र एक्सेस यानी पहुंच की बात कही जाती थी, लेकिन इस बजट में सेफ एक्सेस यानी सुरक्षित पहुंच की बात कही गई है। इससे लड़कियां ज्यादा समय तक अच्छी जगहों पर रहकर पढ़ाई कर सकेंगी। इस बजट में एक और महत्वपूर्ण बात कही गई है-‘शी-मार्ट्स’ की, यानी अब महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं मानी जाएंगी, बल्कि यह प्रस्ताव एक दीर्घकालिक दृष्टि दे रहा है। अब महिलाएं केवल जीविकोपार्जन तक ही सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि शी-मार्ट्स के जरिये उद्यमिता की दिशा में भी कदम बढ़ा सकेंगी।
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यह एक महत्वपूर्ण कदम इसलिए है, क्योंकि महिलाओं को आमतौर पर बाजार का उपभोक्ता माना जाता है। वह खरीदारी तो करती हैं, पर दुकानों में सामान बेचने वाले आमतौर पर पुरुष ही होते हैं। ‘शी-मार्ट्स’ के प्रावधान से उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले दिनों में बाजार का केवल उदारीकरण नहीं होगा, बल्कि नारीकरण की भी संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा, इस बजट में स्वास्थ्य पर भी बहुत ध्यान दिया गया है। सरकार 1.5 लाख मल्टी-स्किल्ड केयरगिवर्स को प्रशिक्षण देने की तैयारी में है। चूंकि इस क्षेत्र में ज्यादातर महिलाएं काम करती हैं, इसलिए इस योजना से भी महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
वित्त मंत्री ने लखपति दीदी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने और महिलाओं को 'क्रेडिट से जुड़े रोजगार से आगे बढ़कर एंटरप्राइज की मालिक बनने' में मदद करने का प्रस्ताव दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यम, व्यवसाय और रोजगार आदि के क्षेत्र में महिलाओं के हित में विभिन्न प्रावधानों के माध्यम से यह बजट महिलाओं के आगे बढ़ने की संभावनाओं को परिलक्षित करता है।
