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बजट 2026: ‘गोल्डीलॉक्स’ माहौल में आर्थिकी को सुनहरा टच देने की कोशिश

Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Sun, 01 Feb 2026 04:15 PM IST
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सार

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट को गौर से समझें तो  वित्त मंत्री ने जिन राज्यों को सौगातों से खुश किया है, वो वही राज्य हैं, जिनमें इस साल अथवा अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बजट दीर्घकालिक आर्थिक आकांक्षाओं को संबोधित करने वाला है, भले ही इससे तत्काल कोई बड़ा लाभ नजर नहीं आ रहा हो।

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लोकसभा में बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश अपने लगातार 9वें वार्षिक बजट में तात्कालिक और लोक लुभावन लाभों की जगह चुनौतीपूर्ण माहौल में दीर्घावधि में देश की आर्थिक संरचना और स्थिरता को मजबूती देने पर ज्यादा जोर दिया है, जो आज वैश्विक आर्थिक राजनीतिक अनिश्चितता की दृष्टि से भी अहम है।

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तीन कर्तव्य बोधों और युवा शक्ति संचालित इस बजट वर्तमान और भावी चुनौतियों के मद्देनजर कई योजनाएं और घोषणाएं हैं। इसमें राजनीतिक और आर्थिक दोनों लक्ष्यों को ध्यान में रखा गया है। बावजूद इसके अगर देश के शेयर बाजारों को यह बजट रास नहीं आया तो इसका मुख्य कारण निवेशकों की सावधानी, सरकार की वित्तीय नीतियों तथा वैश्विक आर्थिक-राजनीतिक अनिश्चितताओं का कारण ज्यादा है। जिसमें टैरिफ की मार और घटता प्रत्यक्ष विदेशी निवेश शामिल हैं।
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सेमी कंडक्टर और एआई पर ध्यान

इसके बाद भी अगर भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर सात फीसदी से ज्यादा बनी हुई है तो इसकी वजह आर्थिक दृष्टि से भारत में ‘गोल्डीलाॅक्स’ (सही आर्थिक रफ्तार और समुचित रोजगार सृजन) स्थिति के चलते बाजार को और बेहतर, कल्पनाशील, साहसिक तथा ज्यादा रोजगारोन्मुखी बजट की अपेक्षा थी। अच्छी बात यही है कि वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे को काबू में रखा है। आर्थिक वृद्धि विकास दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है।

सरकार ने अब सेमी कंडक्टर और एआई जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ने पर ध्यान दिया है, जिसमें भारत वैश्विक दौड़ में पिछड़ता नजर आ रहा था। वित्त मंत्री ने पर्यटन को आर्थिक विकास का ग्रोथ इंजन माना है। 

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट को गौर से समझें तो वित्त मंत्री ने जिन राज्यों को सौगातों से खुश किया है, वो वही राज्य हैं, जिनमें इस साल अथवा अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। जहां चुनाव नहीं हैं, उन राज्यों को कोई प्रत्यक्ष और भौतिक लाभ का जिक्र बजट में नहीं है। एक और राजनीतिक नुकसान भरपाई बापू के नाम पर ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना’ की घोषणा के रूप में की गई है। यह खादी को बढ़ावा देने की योजना है।

गौरतलब है कि पिछले साल सरकार ने पुरानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना में से गांधी का नाम हटाकर उसे जी-राम-जी योजना में तब्दील कर दिया था। जिसका विपक्ष ने और खासकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध करते हुए इसे बापू का अपमान करार दिया था। हालांकि सरकार ने सार्वजनिक रूप से इस आरोप का खंडन किया, लेकिन इसकी नुकसान भरपाई के रूप में महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना लाई गई है। हालांकि खादी और ग्राम स्वराज के बीच क्या तार्किक सम्बन्ध है, यह अभी स्पष्ट  नहीं है।
 
तीन कर्तव्य बोधों वाला बजट

वित्तमंत्री ने इस बात का गर्व के साथ उल्लेख किया कि यह पहला वार्षिक बजट है, जो कर्तव्य भवन में तैयार हुआ है। लिहाजा यह बजट भी तीन कर्तव्य बोधों से प्रेरित है। पहला कर्तव्य यानी सतत और स्थायी आर्थिक विकास दर को बढ़ावा देना, दूसरा है गरीब, कमजोर और वंचितों का ख्याल रखना और तीसरा कर्तव्य है भविष्य के लिए आर्थिक विकास की बुनियाद को मजूबत करना।

वित्त मंत्री का मानना है कि आर्थिक व्यवस्था में ढांचागत सुधार करने, पूंजीगत व्यय बढ़ाने, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा रोजगार सृजन में वृद्धि अर्थ व्यवस्था को बल और गति मिलेगी, जिससे भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक मजूबती के साथ खड़ा रह सकेगा। हालांकि आर्थिक जानकारों का कहना है कि देश में रोजगार बढ़ तो रहा है, लेकिन अस्थायी गिग वर्कर्स के रूप में, जिनकी नौकरी और रोजगार की कोई गारंटी नहीं है।

युवाओं को स्थायी और निरंतर रोजगार चाहिए, जो उनके जीवन में आर्थिक सुरक्षा की गारंटी बन सके। भारत में बड़ी समस्या श्रम आधारित उद्दयोगों में ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने की है। यह चुनौती एआई आने से और बढ़ गई है, जिससे निपटने के लिए किए जा रहे उपायों में भारत अन्य देशों की तुलना में अभी पीछे है। 

पिछले बजट से  4 लाख करोड़ रू अधिक

वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट में कुल खर्च अनुमान 53.5 लाख करोड़ रू. है, जो वर्ष 2025 26 की तुलना में करीब 4 लाख करोड़ रू. ज्यादा है। सकारात्मक बात यह है कि सरकार अधोसंरचना विकास  पर लगातार बल दे रही है। इनमें सड़क, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दवा उद्योग भारत की निर्यात व्यवस्था का बड़ा घटक है। वित्त मंत्री ने बजट में 'औद्योगिक संप्रभुता' का दांव चलते हुए ‘बायो फार्मा शक्ति’ के लिए 10,000 करोड़ और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए ₹40,000 करोड़ रू. के खर्च का प्रस्ताव रखा है  ताकि भारत औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बने। इसे रिफॉर्म एक्सप्रेस की संज्ञा दी गई है।

इसके तहत 6 प्रमुख कर्तव्यों और 7 फोकस सेक्टर्स की पहचान की गई है, जिनका उद्देश्य भारत की 'इंडस्ट्रियल सॉवरेन्टी'  यानी औद्योगिक संप्रभुता को सुनिश्चित करना है। बायो फार्मा शक्ति के अंतर्गत ज्ञान, टेक्नोलॉजी और नवाचार  के जरिए विकास करना और किफायती दवाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य है।

इसके तहत देश में बायो-फार्मा के 3 नए राष्ट्रीय संस्थान बनाए जाएंगे और 7 मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। बजट में 40 हजार करोड़ रू. का प्रावधान कर 'सेमीकंडक्टर मिशन' को विस्तार दिया गया है। ताकि इस क्षेत्र के लिए स्किल्ड वर्क फोर्स तैयार किया जा सके।

दुनिया में दुर्लभ खनिजों के लिए चल रही मारामारी के बीच बजट में ‘रेयर अर्थ मिशन’ शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके लिए चार राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का चयन किया गया है। ताकि दुर्लभ खनिजों का आयात कम कर हम घरेलू स्तर पर आत्मनिर्भर हो सकें। बजट में  छोटे उद्योगों यानी एमएसएमई को 'चैम्पियन' बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा और सरकार की नीतियों के चलते एमएसएमई मुश्किल में हैं। 

केन्द्रीय बजट में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने, कैंसर के इलाज के लिए जरूरी 17 दवाएं सस्ती करने का ऐलान है। इसके लिए देश में पांच बड़े मेडिकल हब बनाए जाएंगे। साथ ही अगले 5 वर्षों में 1 लाख सहायक स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। 1.5 लाख केयर गिवर्स भी तैयार किए जाएंगे। एम्स की तर्ज पर देश में 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खुलेंगे। उत्तर प्रदेश में एक नया राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान खोला जाएगा। 

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बजट 2026 - फोटो : amarujala.com

शिक्षा क्षेत्र को लेकर बड़े एलान

केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को लेकर बड़े एलान किए हैं। शिक्षा के लिए बजट पिछले वर्ष की तुलना में 8.27% बढ़ा है।

बजट में स्वास्थ्य, कौशल विकास, डिजाइन, एनीमेशन, आयुष, पशुपालन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नई संस्थाएं, ट्रेनिंग प्रोग्राम और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर फोकस किया गया है। 

केन्द्रीय वित्त मंत्री ने आर्थिक विकास की गति को बनाए रखने के लिए पूंजीगत व्यय में लगभग 9 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। साथ ही भविष्य की तकनीकों, एमएसएमई और ग्रीन एनर्जी के लिए कई नई योजनाओं का ऐलान किया है। रोजगार के मद्देनजर AVGC यानी तहत एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स क्षेत्र में पेशेवरों की बढ़ती मांग को देखते हुए 15 हजार माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने का प्रस्ताव है। उम्मीद है कि इससे 20 लाख नौकरियां सृजित होंगी। 

बजट में बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक क्षेत्रों के पास 5 विश्वविद्यालय टाउनशिप बनाने की योजना है। साथ ही, हर जिले के STEM संस्थानों में छात्राओं के लिए छात्रावास बनाए जाएंगे। इसके अलावा, चार टेलीस्कोप सुविधाओं को नया रूप दिया जाएगा या सुधार किया जाएगा, ताकि छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए बेहतर अवसर मिल सकें।

एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने का लक्ष्य

वित्त मंत्री ने बजट में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर, अराक्कू घाटी में आधुनिक सुविधाओं से युक्त माउंटेन ट्रेल्स बनाने का ऐलान किया। ओडिशा, कर्नाटक, केरल में टर्टल ट्रेल्स बनाएंगे। इससे एडवेंचर टूरिज्म करने वाले पर्यटकों का रोमांच दोगुना हो जाएगा।  ओडीशा केरल में टर्टल ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे। बजट में एक और अहम घोषणा  'आईआईएम प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड्स' की है।

देश के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10 हजार गाइड्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कदम पर्यटन को अनौपचारिक से पेशेवर क्षेत्र में बदलने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे विदेशी पर्यटकों को विश्वस्तरीय सेवा मिलेगी और युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

बजट में देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक और सांस्कृतिक स्थलों, जैसे सारनाथ, हस्तिनापुर को ‘वाइब्रेंट कल्चरल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित किया जाएगा। उत्तर-पूर्व में बौद्ध सर्किट और हिमाचल-कश्मीर में नई हाइकिंग ट्रेल्स बगेंगीं। देश के सभी ऐतिहासिक स्थलों का एक डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जाएगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगले 5 वर्षों में सिटी इकॉनॉमिक रीजन (CERs) को मजबूत करने के लिए 5,000 करोड़ रुपये के विशेष फंड का प्रस्ताव रखा है। ताकि ये क्षेत्र स्थानीय और राष्ट्रीय विकास के केंद्र बन सकें। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने टैक्सपेयर्स के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि नए इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और आयकर से जुड़े नियमों को पहले से अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है।

बजट में संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर से 31 मार्च करने का ऐलान किया। इसके साथ उदारीकृत प्रेषण योजना के तहत एजुकेशन और मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने के मामले में लगने वाले स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) की दर को पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया गया है। 

इस बजट के बाद भारतीयों के लिए विदेश यात्रा सस्ती होगी। यात्रा पैकेज की बिक्री पर लगने वाले टीसीएस की दर को पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत करने की घोषणा की गई है। निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण की ओर से दिए गए मुआवजा को कर से छूट देने के प्रस्ताव की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि आयकर अधिनियम, 2025 एक अप्रैल से लागू होगा और इसके नियम और कर रिटर्न फॉर्म जल्दी ही अधिसूचित किए जाएंगे।

संक्षेप में कहें तो यह बजट दीर्घकालिक आर्थिक आकांक्षाओं को संबोधित करने वाला है, भले ही इससे तत्काल कोई बड़ा लाभ नजर नहीं आ रहा हो। पीएम मोदी ने इसे ‘महत्वाकांक्षी’ बजट कहा है। आज भारत की आर्थिकी के समान सबसे बड़ी चुनौती अपनी आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखने और बड़ी आबादी को रोटी, कपड़ा, मकान के साथ रोजगार देने  की है। बजट इसी दिशा में एक कदम आगे बढ़ता दिखाई देता है।



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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