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Budget 2026: लोकलुभावन की बजाय देश को कर्ज से निकालने की पहल, सरकार ने दिए अलग संदेश

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद पाठक Updated Sun, 01 Feb 2026 02:42 PM IST
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सार

Budget 2026: वित्तमंत्री ने राजकोषीय घाटे को 4.4 प्रतिशत पर लाकर एक कड़ा संदेश दिया कि वह देश को कर्ज के जाल से बाहर निकालना चाहती हैं। कम घाटे का अर्थ है कि सरकार को बाजार से कम उधार लेना पड़ेगा।

Budget 2026: Nirmala Sitharaman modi government prioritized economy stability union budget
लोकलुभावन की बजाय बचत का रास्ता चुना सरकार ने - फोटो : PTI
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विस्तार
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Budget 2026: केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में जब अपना 9वां बजट भाषण पढ़ना शुरू किया तो सत्ता के गलियारों में चर्चा थी कि क्या सरकार आगामी विधानसभा चुनावों या वैश्विक मंदी की आहट के बीच कोई बड़ा धमाका करेगी, लेकिन डेढ़ घंटे के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वित्तमंत्री ने लोकलुभावन के बजाय बचत का रास्ता चुना। राजकोषीय घाटे को 4.4 प्रतिशत पर सीमित रखना बड़ी उपलब्धि तो है, लेकिन शेयर बाजार की मायूसी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या देश की वित्तीय सेहत सुधारने की कवायद में हम विकास की रफ्तार को नजरअंदाज कर रहे हैं?

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वित्तमंत्री ने राजकोषीय घाटे को 4.4 प्रतिशत पर लाकर एक कड़ा संदेश दिया कि वह देश को कर्ज के जाल से बाहर निकालना चाहती हैं। कम घाटे का अर्थ है कि सरकार को बाजार से कम उधार लेना पड़ेगा। इससे निजी क्षेत्र के लिए कर्ज की उपलब्धता बढ़ेगी और ब्याज दरों में गिरावट की संभावना बनेगी। यह वैश्विक रेटिंग एजेंसियों, जैसे मूडीज और फिच को सकारात्मक संकेत देता है, जिससे विदेशी निवेश का मार्ग प्रशस्त होता है। हालांकि, इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि घाटे को कम करने के लिए सरकार को अपने खर्चों पर लगाम लगानी पड़ी है। यही वह बिंदु है, जहां बाजार और सरकार के हित आपस में टकरा रहे हैं।
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वित्तमंत्री से शेयर बाजार को उम्मीद थी कि वो अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ाएंगी, लेकिन बजट ने इसके उल्ट काम किया। बाजार की निराशा के तीन मुख्य बिंदु हैं। पहला, पिछले तीन वर्षों में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखने को मिली थी। इस बार इसे केवल 10 प्रतिशत बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए किया गया। निवेशकों को डर है कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश कम होने से सीमेंट, स्टील और लॉजिस्टिक कंपनियों की ग्रोथ सुस्त पड़ जाएगी। दूसरा, मध्यम वर्ग और ग्रामीण आबादी के लिए किसी बड़ी टैक्स कटौती या नकद हस्तांतरण की अनुपस्थिति ने बाजार को चौंका दिया। बाजार का मानना है कि जब तक आम आदमी की जेब में अतिरिक्त पैसा नहीं आएगा, तब तक ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों में मांग नहीं बढ़ेगी। तीसरा, बाजार किसी बड़ी स्ट्रक्चरल रिफॉर्म की उम्मीद कर रहा था, जैसे कि विनिवेश का नया लक्ष्य या बैंकिंग क्षेत्र में निजीकरण की स्पष्ट समय सीमा। इन पर चुप्पी ने निवेशकों को मुनाफावसूली के लिए उकसाया।


वित्तमंत्री ने नए इनकम टैक्स कानून के जरिए जटिलताओं को कम करने का प्रयास तो किया है, लेकिन करदाताओं के लिए कोई ब्रेकिंग न्यूज नहीं दी। स्टैंडर्ड डिडक्शन में मामूली बढ़ोतरी और स्लैब में छोटे बदलावों को बाजार ने अपर्याप्त माना। निवेशकों को उम्मीद थी कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर कुछ राहत मिल सकती है, जो नहीं मिली। हालांकि, वित्त मंत्री का बचाव यह हो सकता है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के बीच बड़ी घोषणाएं करना जोखिम भरा हो सकता था। सरकार ने भविष्य के लिए बफर (सुरक्षित कोष) रखने की नीति अपनाई है। 4.4 प्रतिशत का घाटा घरेलू अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।


निर्मला सीतारमण के बजट में कुछ सवाल अनुत्तरित रह गए हैं। जैसे, क्या 10 प्रतिशत की कैपेक्स वृद्धि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त है? क्या राजकोषीय अनुशासन के नाम पर ग्रामीण भारत की संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है? और क्या सरकार निजी निवेश के भरोसे बैठी है, जो पिछले कई वर्षों से सुस्त पड़ा है?

कुल मिलाकर, बजट एक यथास्थिति वाला बजट है। यह उन लोगों के लिए अच्छा है, जो वित्तीय स्थिरता और कम मुद्रास्फीति चाहते हैं, लेकिन उन लोगों के लिए निराशाजनक है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में रॉकेट जैसी रफ्तार देखना चाहते थे। निश्चित रूप से वित्तमंत्री ने साहस के ऊपर स्थिरता को वरीयता दी है। बाजार की तात्कालिक प्रतिक्रिया भले नकारात्मक है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से 4.4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा भारतीय अर्थव्यवस्था की साख को वैश्विक पटल पर मजबूत करेगा। अब गेंद निजी क्षेत्र के पाले में है, क्या वे सरकार द्वारा छोड़े गए 'क्रेडिट स्पेस' का लाभ उठाकर निवेश बढ़ाएंगे?

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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