सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   union budget share market fall reason infrastructure positive impact

Blog: गिरावट अस्थायी है, शेयर बाजार के लिए यह एक मौन, लेकिन सकारात्मक संकेत

Ajay Bagga अजय बग्गा
Updated Mon, 02 Feb 2026 05:23 AM IST
विज्ञापन
सार

बाजार में आई गिरावट अस्थायी है, जो शेयर और इंडेक्स फ्यूचर्स पर एसटीटी में वृद्धि तथा कीमती धातुओं की कीमतों में तीव्र गिरावट के कारण हुई है।

union budget share market fall reason infrastructure positive impact
शेयर बाजार का हाल - फोटो : Adobestock
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

ऐतिहासिक रूप से रविवार का दिन होने के बावजूद बजट पर प्रतिक्रिया देने के लिए शेयर बाजार खुला हुआ था। हालांकि, शुरुआत में बाजार में अस्थिरता देखी गई, लेकिन यह तकनीकी समायोजन से प्रेरित थी। गहराई से देखने पर बजट के प्रावधान यह संकेत देते हैं कि इसमें अंतर्निहित प्रावधान क्षेत्र-विशिष्ट निवेश और व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए दीर्घकालिक सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं। बजट वाले दिन शुरुआत में निफ्टी-50 और सेंसेक्स में तेज गिरावट देखने को मिली और एक समय सूचकांक में 2000 अंकों से अधिक की गिरावट देखी गई, हालांकि बाद में स्थिति थोड़ी संभली। यह अचानक गिरावट मुख्य रूप से शेयर और इंडेक्स फ्यूचर्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में वृद्धि, जिसे 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया गया, तथा कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट के कारण हुई।
Trending Videos


इतिहास गवाह है कि बजट के बाद की तात्कालिक अस्थिरता अक्सर तब शांत हो जाती है, जब बाजार का ध्यान टैक्स की सुर्खियों से हटकर पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के मूल सिद्धांतों पर जाता है। वित्त मंत्री ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए ऋण-जीडीपी अनुपात को 55.6 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखा है। शेयर बाजार के लिए यह एक मौन, लेकिन सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे बॉन्ड यील्ड स्थिर रहती है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। एसटीटी (फ्यूचर्स) में बढ़ोतरी से हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए ट्रांजैक्शन लागत बढ़ेगी, जिसका बाजार के मूड पर थोड़े समय के लिए नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


बायबैक टैक्स से मिलने वाली रकम को अब कैपिटल गेन माना जाएगा, और उसी के अनुसार उस पर टैक्स लगेगा। मानक कटौती बढ़ाने का प्रस्ताव, जिसे एक लाख रुपये तक ले जाने का संकेत है, उपभोग और घरेलू मांग में वृद्धि के लिए सकारात्मक है। 17 दवाओं और निर्यात के लिए महत्वपूर्ण इनपुट पर कस्टम ड्यूटी में छूट का प्रावधान भी इस बजट में किया गया है। अखरोट तथा बादाम जैसी उच्च घनत्व वाली खेती पर ध्यान केंद्रित कर सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की कोशिश कर रही है, वह भी बिना महंगाई का दबाव बढ़ाए।

बाजार में तात्कालिक गिरावट के बावजूद दीर्घकालिक सोच रखने वाले समझदार निवेशकों के लिए यह बजट रक्षा, जैव फार्मा और सेमीकंडक्टर अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में अवसर प्रदान करता है, जहां नीतियां अब पूरी तरह स्पष्ट हैं। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिये पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाने के प्रस्ताव से मैक्स हेल्थकेयर और अपोलो हॉस्पिटल्स जैसे शेयरों में बड़े पैमाने पर तेजी देखी गई, जबकि बाजार में कमजोरी का माहौल था।
‘मेक इन इंडिया’ पहल को बजट में एक नया और परिष्कृत स्वरूप दिया गया है, विशेष रूप से इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के माध्यम से। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना के लिए आवंटन बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया गया है, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर चिप डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed