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सच्ची खुशी: मजेदार लम्हों को सहेज कर रखें, यह मानसिकता जीवन में हल्कापन, रचनात्मकता भर सकती है
जैंसी डन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: Nitin Gautam
Updated Sun, 08 Mar 2026 07:27 AM IST
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सार
आप जितना ज्यादा हंसी की तलाश का अभ्यास करेंगे, आपको उतनी ही ज्यादा खुशियां नजर आने लगेंगी।
हंसी,
- फोटो : Freepik
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विस्तार
कुछ समय पहले मैं फंगस फेस्ट में गई थी। दरअसल, यह न्यूजर्सी माइक्रोलॉजिकल एसोसिएशन द्वारा आयोजित फफूंद और मशरूम की दुनिया का अनोखा उत्सव था। वहां बिताई गई दोपहर बेहद आनंददायक रही। मैंने दिलचस्प चीजें वहां देखीं, जो मेरे लिए बिल्कुल नईं और मजेदार थीं। दरअसल, मैं कॉमेडियन क्रिस डफी की सलाह मान रही थी। उनका कहना है कि जीवन में हंसी अक्सर तब पैदा होती है, जब हम खुद को नए अनुभवों की ओर ले जाते हैं।
डफी के अनुसार, हम सबसे ज्यादा तब हंसते हैं, जब चौंक जाते हैं या किसी चीज को बिल्कुल नए दृष्टिकोण से देखते हैं। शोध बताते हैं कि हंसी तनाव कम करती है, चिंता घटाती है और काम पूरा करने की ऊर्जा देती है। यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिल्वेनिया के कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. माइकल मिलर के अनुसार, हंसी सूजन कम करने और रक्त प्रवाह बेहतर करने में भी मदद कर सकती है। फिर भी, इस जटिल दुनिया में हास्य ढूंढ़ना कठिन है। इसलिए इसका तरीका मैंने डफी से पूछा। उनकी पहली सलाह थी-नौ साल के बच्चे से सीखना।
शोध बताते हैं कि बच्चे वयस्कों की तुलना में कहीं अधिक हंसते हैं। वह सुझाव देते हैं कि खुद से पूछें कि अगर मैं नौ साल का बच्चा होता, तो क्या करता? मसलन, यदि नाश्ते में आपके पास पैनकेक और केला है, तो बच्चा पैनकेक पर स्माइली चेहरा बना देगा। और यदि वही बच्चा नहाने जा रहा है, तो वह सुनिश्चित करेगा कि स्नान एक विशाल झागदार बबल बाथ में बदल जाए। यह मानसिकता जीवन में हल्कापन, रचनात्मकता और मुस्कान के नए रंग भर सकती है। डफी का कहना है कि मोबाइल स्क्रीन से नजर उठाइए और उन चीजों पर ध्यान दीजिए, जो थोड़ी अजीब, अप्रत्याशित या दिलचस्प लगें। आप जितना ज्यादा हंसी की तलाश का अभ्यास करेंगे, आपको उतनी ही ज्यादा खुशियां नजर आने लगेंगी। इन मजेदार लम्हों को आप सहेज सकते हैं और बाद में दोस्तों को सुना सकते हैं, क्योंकि विज्ञान भी मानता है कि अकेले के मुकाबले दूसरों के साथ होने पर हम ज्यादा खुलकर हंसते हैं।
डफी अपना एक 'लाफ फोल्डर' बनाने का मशविरा भी देते हैं। चाहे वह कोई मजेदार कार्टून हो, मीम हो या कोई छोटी कहानी-जो भी आपको हंसाए, उसे सहेज लें। यह डिजिटल भी हो सकता है और भौतिक भी। वह बताते हैं कि स्टैंड-अप कॉमेडी की दुनिया में एक शब्द है 'कॉलबैक', यानी जब कोई हास्य कलाकार अपने पहले के किसी मजाक का जिक्र दोबारा करता है। आप भी अपनी बातचीत में इसे शामिल कर सकते हैं। इसके लिए बस दूसरों की बातों को गौर से सुनना जरूरी है, ताकि आप उस विषय या चुटकुले को दोबारा सही समय पर याद कर सकें।
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डफी के अनुसार, हम सबसे ज्यादा तब हंसते हैं, जब चौंक जाते हैं या किसी चीज को बिल्कुल नए दृष्टिकोण से देखते हैं। शोध बताते हैं कि हंसी तनाव कम करती है, चिंता घटाती है और काम पूरा करने की ऊर्जा देती है। यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिल्वेनिया के कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. माइकल मिलर के अनुसार, हंसी सूजन कम करने और रक्त प्रवाह बेहतर करने में भी मदद कर सकती है। फिर भी, इस जटिल दुनिया में हास्य ढूंढ़ना कठिन है। इसलिए इसका तरीका मैंने डफी से पूछा। उनकी पहली सलाह थी-नौ साल के बच्चे से सीखना।
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शोध बताते हैं कि बच्चे वयस्कों की तुलना में कहीं अधिक हंसते हैं। वह सुझाव देते हैं कि खुद से पूछें कि अगर मैं नौ साल का बच्चा होता, तो क्या करता? मसलन, यदि नाश्ते में आपके पास पैनकेक और केला है, तो बच्चा पैनकेक पर स्माइली चेहरा बना देगा। और यदि वही बच्चा नहाने जा रहा है, तो वह सुनिश्चित करेगा कि स्नान एक विशाल झागदार बबल बाथ में बदल जाए। यह मानसिकता जीवन में हल्कापन, रचनात्मकता और मुस्कान के नए रंग भर सकती है। डफी का कहना है कि मोबाइल स्क्रीन से नजर उठाइए और उन चीजों पर ध्यान दीजिए, जो थोड़ी अजीब, अप्रत्याशित या दिलचस्प लगें। आप जितना ज्यादा हंसी की तलाश का अभ्यास करेंगे, आपको उतनी ही ज्यादा खुशियां नजर आने लगेंगी। इन मजेदार लम्हों को आप सहेज सकते हैं और बाद में दोस्तों को सुना सकते हैं, क्योंकि विज्ञान भी मानता है कि अकेले के मुकाबले दूसरों के साथ होने पर हम ज्यादा खुलकर हंसते हैं।
डफी अपना एक 'लाफ फोल्डर' बनाने का मशविरा भी देते हैं। चाहे वह कोई मजेदार कार्टून हो, मीम हो या कोई छोटी कहानी-जो भी आपको हंसाए, उसे सहेज लें। यह डिजिटल भी हो सकता है और भौतिक भी। वह बताते हैं कि स्टैंड-अप कॉमेडी की दुनिया में एक शब्द है 'कॉलबैक', यानी जब कोई हास्य कलाकार अपने पहले के किसी मजाक का जिक्र दोबारा करता है। आप भी अपनी बातचीत में इसे शामिल कर सकते हैं। इसके लिए बस दूसरों की बातों को गौर से सुनना जरूरी है, ताकि आप उस विषय या चुटकुले को दोबारा सही समय पर याद कर सकें।
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