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मुड़-मुड़ के देख: पतझड़ से भय कैसा? डर केवल उन्हें ही लगता है, जिन्होंने जीवन को 'कल' पर टाल दिया

जीनेट विंटर्सन Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 23 Jan 2026 07:01 AM IST
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सार

वृद्धावस्था में ही देखने की दृष्टि तेज होती है, भले ही आंखें थकी हों। जहां शोर कम होता है, पर बातों का अर्थ साफ सुनाई देता है। डर केवल उन्हें ही लगता है, जिन्होंने जीवन को 'कल' पर टाल दिया। जिसने हर मौसम को जिया, उसे पतझड़ से भय कैसा?

Why fear autumn? Fear is felt only by those who have postponed life to tomorrow.
पतझड़ से भय कैसा? - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जीवन कोई सीधी रेखा नहीं, बल्कि एक महासागर है। हम अक्सर इस भ्रम में रहते हैं कि हमें बस एक ही दिशा में चप्पू चलाना है, लेकिन समय की लहरें हमें घुमाती हैं, मोड़ती हैं और फिर उन अनजाने तटों पर ले जाती हैं, जिनके बारे में हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
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याद रखें, जो किनारा पीछे छूट गया, वह खोया नहीं है, बल्कि वह आपकी नींव है। बचपन में वृद्धावस्था एक लोककथा जैसी लगती है, जवानी में वही एक दूर की चेतावनी, लेकिन आज? आज यह एक जीवंत अनुभव की तरह है। आप समय के साथ बुजुर्ग नहीं होते, बल्कि समय के साथ और अधिक जवां होते जाते हैं।
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वृद्धावस्था हार नहीं है। यह प्रमाण है कि आप टिके रहे, कि आप बहे नहीं, टूटे नहीं। जैसे ढलता सूरज दिन को खत्म नहीं करता, बल्कि आकाश को रंगों से भर देता है, वैसे ही उम्र चेहरे पर रेखाएं नहीं, अर्थ छोड़ती है। झुर्रियां समय की कविता हैं, धीमे कदम गहराई का संकेत हैं, और थकान इस बात का सबूत कि आपने जीवन से दूरी नहीं बनाई। यह उम्र ठहरना सिखाती है। वृद्धावस्था हमें सिखाती है कि हर चीज को मुट्ठी में भींच कर रखना जरूरी नहीं। कुछ चीजों को मुक्त कर देना ही सबसे बड़ी स्वतंत्रता है। यही वह उम्र है, जहां देखने की दृष्टि तेज होती है, भले ही आंखें थकी हों। जहां शोर कम होता है, लेकिन बातों का अर्थ साफ सुनाई देता है। डर केवल उन लोगों को लगता है, जिन्होंने जीवन को ‘कल’ पर टाल दिया है। लेकिन जिसने हर मौसम को जिया है, उसे पतझड़ से क्या भय? सफेद बाल और कुछ थकी हुई मांसपेशियां कोई दुर्घटना नहीं हैं, वे आपकी लंबी यात्रा का विजय स्मारक हैं।

समय को अपना शत्रु मत बनाइए, उसे अपना सहयात्री बनाइए। जब अगर आपको लगे कि समुद्र की लहरों ने आपको किसी नए, अपरिचित किनारे पर ला खड़ा किया है, तो घबराइए मत। शायद यही वह स्थान है, जहां आप वह बन सकते हैं, जो आप हमेशा से बनने के लिए जन्मे थे।
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