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दूसरी पारी: बच्चों को नैतिकता कौन सिखाएगा? कि धन्यवाद कहे बिना कोई उपहार नहीं मिलेगा

अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 23 Jan 2026 07:15 AM IST
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सार

अपने नाती की नैतिकता से जुड़ी दुविधा पर पैंसठ वर्षीय नानी को मनोवैज्ञानिक नीलकंठ ने कुछ यों समझाया- पिछले  दिनों मेरा नाती हमारे घर आया था, जिसे उसकी मामी (मेरी बहू) ने कुछ उपहार दिए, लेकिन उसने धन्यवाद तक नहीं कहा। क्या यह उसकी नैतिक विफलता है?

Second Innings: Who will teach children the moral? That no gift is accepted without saying thank you.
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आपने अपने नाती के व्यवहार को खराब आदत या नैतिक कमी का मामला बताया है, लेकिन मुझे इसके पीछे एक चाहत सुनाई दे रही है। हम खुद से कितना भी कह लें कि तोहफे का लेन-देन कोई खास बात नहीं है, पर सच्चाई यह है कि उनका अक्सर भावनात्मक महत्व होता है, जिसमें दोनों पक्ष वास्तव में पहचान चाहते हैं। देने वाला अपनी सोच और निवेश के लिए पहचान चाहता है, जबकि लेने वाला यह पक्का करना चाहता है कि उसे सच में संज्ञान में लिया गया है। वास्तव में दोनों मौन स्वर में पूछ रहे होते हैं कि क्या मैं आपके लिए मायने रखता हूं? और अगर रखता हूं, तो कितना?
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जब हमें लगता है कि हमें देखा या सराहा नहीं जा रहा है, तो दुख भरी भावनाएं अच्छे चरित्र या सही शिष्टाचार के बारे में चिंता के रूप में खुद को छिपा लेती हैं, क्योंकि दर्द को बाहर निकालना यह कहने से ज्यादा आसान होता है, ‘मुझे लगता है कि मैं तुम्हारे लिए जरूरी नहीं हूं।’ लेकिन याद रखिए कि बच्चे अपने माता-पिता या अन्य वरिष्ठ पारिवारिक व्यक्तियों से ही सीखते हैं, और मुझे लगता है कि आपकी समस्या का संबंध आपके नाती से ज्यादा आपकी बेटी से है, जिसकी परवरिश आपने खुद की है।
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अपनी बेटी से यह शिकायत करने के बजाय कि उसके बच्चों को अपनी मामी का धन्यवाद करना चाहिए, मैं यह कहना चाहूंगा कि आपको खुद ही इस बारे में अपने नाती से बात करनी चाहिए। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि आजकल ज्यादातर किशोर उम्र के बच्चे माता-पिता के कहे बगैर ऐसा नहीं करते, और मुझे लगता है कि आपकी बेटी के आपकी बहू के साथ रिश्तों में अपनी कुछ भावनाएं हो सकती हैं, जिसकी वजह से बच्चे ने अपनी मामी के प्रति कोई भावना या प्रतिक्रिया नहीं दिखाई।

सबसे पहले, तो आप अपनी दुखती भावनाओं को अपने नाती के चरित्र के बारे में फैसला करने से अलग करें। उसे इस तरह की नैतिक सीख देना दादी-नानी का भी कर्तव्य है। दूसरा, आप यह सोचें कि वास्तव में आप चाहती क्या हैं-अपने नाती से बदले में धन्यवाद और कृतज्ञता अथवा अपनी तीसरी पीढ़ी से ज्यादा जुड़ाव और सम्मान?

अगर आप उनसे धन्यवाद चाहती हैं, तो उसे चेतावनी दे सकती हैं कि धन्यवाद कहे बिना कोई उपहार नहीं मिलेगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि जबर्दस्ती व्यक्त की गई कृतज्ञता की बातें ही आप सच में चाहती हैं। अगर आप सच्चा जुड़ाव और सराहना चाहती हैं, तो आप मन में किसी भी तरह का शिकायत भाव लाए बगैर अपनी बेटी और नाती से सकारात्मक ढंग से बात करें।

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जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके। 
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