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संपत्ति का नॉमिनी क्यों जरूरी?: एक गलती और दीनानाथ के परिवार को काटने पड़े कोर्ट के कई चक्कर, समझें पूरी कहानी
अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Fri, 13 Mar 2026 07:04 AM IST
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सार
संपत्ति और बैंक खातों में नॉमिनी न बनाना परिवार के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। 67 वर्षीय दीनानाथ ने जीवन भर की कमाई तो की, लेकिन किसी खाते या निवेश में नॉमिनी नहीं जोड़ा। अचानक निधन के बाद उनके परिवार को पैसे निकालने के लिए कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के चक्कर लगाने पड़े। आइए इस घटना से समझते हैं कि आखिर नॉमिनी बनाना क्यों जरूरी होता है।
नॉमिनी क्यों जरूरी
- फोटो : Istock
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विस्तार
67वर्षीय दीनानाथ ने जीवन भर मेहनत से कमाया और बचत की। एक दिन अचानक हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। उनके पास कोई वसीयत नहीं थी। बैंक खाते में न कोई नॉमिनी था और न ज्वाइंट होल्डर। पत्नी और बच्चे बैंक गए। पैसा निकालने के लिए कानूनी दस्तावेजों की मांग हुई। उत्तराधिकार प्रमाणपत्र बनाने में महीनों लग गए, कोर्ट के चक्कर काटे और परिवार आर्थिक तंगी में फंस गया। इसलिए, नॉमिनी बनाना न सिर्फ जरूरी है, बल्कि यह अपनों को दुख की घड़ी में सहारा देता है।
मालिक नहीं रखवाला है नॉमिनी
नॉमिनी बनाना जरूरी है, ताकि मृत्यु के बाद बैंक खाते, बचत, निवेश और बीमा की रकम परिजनों (कानूनी वारिस) को आसानी से मिल सके। नॉमिनी एक ट्रस्टी या कस्टोडियन होता है, जो व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति को कानूनी वारिसों तक पहुंचाने का जरिया होता है।
नॉमिनी कब होगा संपत्ति का हकदार?
वसीयत वैध होने पर संपत्ति बनाए गए लाभार्थियों को मिलती है। वसीयत न होने पर कानूनी वारिसों (पति/पत्नी, बच्चे, माता) के बीच संपत्ति बंटती है। अगर नॉमिनी वसीयत में लाभार्थी या कानूनी वारिस है, तो उसका संपत्ति पर अधिकार बनता है।
नॉमिनी बनाना क्यों जरूरी?
नॉमिनी बनाना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि वित्तीय योजना का अभिन्न हिस्सा है। नामांकन प्रक्रिया सभी तरह की संपत्ति का सुगम हस्तांतरण सुनिश्चित करती है। नॉमिनी न होने की सूरत में, परिवार/कानूनी वारिस को उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या कोर्ट ऑर्डर की जरूरत पड़ती है, जिसमें समय ज्यादा खर्च होता है और यह महंगा भी पड़ता है। नॉमिनी होने से बैंक खाते, एफडी और बीमा के पैसे जल्दी मिल जाते हैं, जिससे परिवार को तत्काल वित्तीय सुरक्षा मिलती है। यह पक्का करता है कि फंड के लावारिस घोषित होने की नौबत न आए।
कितने नॉमिनी रखने की आजादी?
एक नवंबर, 2025 से बैंक खाते, एफडी, लॉकर और पीपीएफ में अधिकतम चार नॉमिनी बनाए जा सकते हैं। पीपीएफ खाते में नॉमिनी अपडेट पर लगने वाला 50 रुपये का शुल्क भी खत्म कर दिया गया है। नॉमिनी का हिस्सा प्रतिशत में भी लिख सकते हैं। म्यूचुअल फंड व डीमैट अकाउंट में 10 नॉमिनी संभव हैं। सरकार ने पीपीएफ खाते में नॉमिनी अपडेट करने पर लगने वाला 50 रुपये का शुल्क भी हटा दिया है। जीवन बीमा में भी एक या एक से ज्यादा नॉमिनी जोड़े जा सकते हैं। इसका उद्देश्य जमाकर्ता और नॉमिनी के लिए दावा प्रकिया को आसान बनाना है।
एक लाख करोड़ रुपये की लावारिस रकम?
भारतीय बैंकों के पास कुल लगभग 78,000 करोड़ रुपये के बिना दावे वाली रकम है। बिना दावे वाली बीमा की रकम तकरीबन 14,000 करोड़ रुपये, म्यूचुअल फंड में अनक्लेम्ड रकम करीब 3,000 करोड़ रुपये, जबकि बिना दावे वाले लाभांश (डिविडेंड) की रकम लगभग 9,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
कब लावारिस हो जाता है आपका पैसा?
लावारिस संपत्ति (अनक्लेम्ड एसेट) वह होती है, जब वित्तीय संस्थानों में जमा धन पर खाताधारक या उनके कानूनी वारिस/नॉमिनी लंबे समय तक दावा नहीं करते। ऐसा तब होता है, जब खाताधारक पैसे जमा करके भूल जाए या उसकी मृत्यु हो जाए और नॉमिनी या वारिसों को इसकी जानकारी न हो। दस साल या उससे अधिक समय तक लेनदेन न होने पर बचत, चालू, एफडी और आरडी खाते अनक्लेम्ड एसेट बन जाते हैं। बीमा पॉलिसी की लंबे समय तक क्लेम न की जाने वाली राशि तथा म्यूचुअल फंड की रिडेम्पशन राशि या डिविडेंड, जो खाता बदलने, बंद होने या अन्य वजह से जमा नहीं हो पाते, भी लावारिस संपत्ति कहलाते हैं।
सही हाथ में जाएगी दौलत?
सेबी रजिस्टर्ड टैक्स और इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट जितेंद्र सोलंकी बताते हैं कि नॉमिनेशन जरूर करें, ताकि लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचाव हो और पैसा आसानी से मिल सके। नॉमिनी में कानूनी वारिसों को ही रखें और उनके हिस्से का जिक्र करें, ताकि विवाद कम हो। मनमाफिक संपत्ति बंटवारे के लिए वसीयत भी अवश्य बनाएं। इसमें सारी संपत्ति का विवरण, प्रत्येक वारिस का हिस्सा और वारिस न होने या नाबालिग होने पर प्रबंधन कौन करेगा, इसका जिक्र करें। नॉमिनेशन और वसीयत, संपत्ति को सही हाथ में सौंप कर अनावश्यक देरी और विवाद से बचाते हैं।
ताकि परिवार न हो परेशान
बैंक खातों, पीपीएफ, म्यूचुअल फंड और बीमा पॉलिसी की सूची बनाकर परिवार के सभी प्रमुख सदस्यों को बताएं। नॉमिनी की जानकारी हर खाते में अपडेट रखें। दस्तावेजों को सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध जगह पर रखें। समय-समय पर खातों में लेनदेन करते रहें, ताकि वे निष्क्रिय न हों।
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मालिक नहीं रखवाला है नॉमिनी
नॉमिनी बनाना जरूरी है, ताकि मृत्यु के बाद बैंक खाते, बचत, निवेश और बीमा की रकम परिजनों (कानूनी वारिस) को आसानी से मिल सके। नॉमिनी एक ट्रस्टी या कस्टोडियन होता है, जो व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति को कानूनी वारिसों तक पहुंचाने का जरिया होता है।
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नॉमिनी कब होगा संपत्ति का हकदार?
वसीयत वैध होने पर संपत्ति बनाए गए लाभार्थियों को मिलती है। वसीयत न होने पर कानूनी वारिसों (पति/पत्नी, बच्चे, माता) के बीच संपत्ति बंटती है। अगर नॉमिनी वसीयत में लाभार्थी या कानूनी वारिस है, तो उसका संपत्ति पर अधिकार बनता है।
नॉमिनी बनाना क्यों जरूरी?
नॉमिनी बनाना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि वित्तीय योजना का अभिन्न हिस्सा है। नामांकन प्रक्रिया सभी तरह की संपत्ति का सुगम हस्तांतरण सुनिश्चित करती है। नॉमिनी न होने की सूरत में, परिवार/कानूनी वारिस को उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या कोर्ट ऑर्डर की जरूरत पड़ती है, जिसमें समय ज्यादा खर्च होता है और यह महंगा भी पड़ता है। नॉमिनी होने से बैंक खाते, एफडी और बीमा के पैसे जल्दी मिल जाते हैं, जिससे परिवार को तत्काल वित्तीय सुरक्षा मिलती है। यह पक्का करता है कि फंड के लावारिस घोषित होने की नौबत न आए।
कितने नॉमिनी रखने की आजादी?
एक नवंबर, 2025 से बैंक खाते, एफडी, लॉकर और पीपीएफ में अधिकतम चार नॉमिनी बनाए जा सकते हैं। पीपीएफ खाते में नॉमिनी अपडेट पर लगने वाला 50 रुपये का शुल्क भी खत्म कर दिया गया है। नॉमिनी का हिस्सा प्रतिशत में भी लिख सकते हैं। म्यूचुअल फंड व डीमैट अकाउंट में 10 नॉमिनी संभव हैं। सरकार ने पीपीएफ खाते में नॉमिनी अपडेट करने पर लगने वाला 50 रुपये का शुल्क भी हटा दिया है। जीवन बीमा में भी एक या एक से ज्यादा नॉमिनी जोड़े जा सकते हैं। इसका उद्देश्य जमाकर्ता और नॉमिनी के लिए दावा प्रकिया को आसान बनाना है।
एक लाख करोड़ रुपये की लावारिस रकम?
भारतीय बैंकों के पास कुल लगभग 78,000 करोड़ रुपये के बिना दावे वाली रकम है। बिना दावे वाली बीमा की रकम तकरीबन 14,000 करोड़ रुपये, म्यूचुअल फंड में अनक्लेम्ड रकम करीब 3,000 करोड़ रुपये, जबकि बिना दावे वाले लाभांश (डिविडेंड) की रकम लगभग 9,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
कब लावारिस हो जाता है आपका पैसा?
लावारिस संपत्ति (अनक्लेम्ड एसेट) वह होती है, जब वित्तीय संस्थानों में जमा धन पर खाताधारक या उनके कानूनी वारिस/नॉमिनी लंबे समय तक दावा नहीं करते। ऐसा तब होता है, जब खाताधारक पैसे जमा करके भूल जाए या उसकी मृत्यु हो जाए और नॉमिनी या वारिसों को इसकी जानकारी न हो। दस साल या उससे अधिक समय तक लेनदेन न होने पर बचत, चालू, एफडी और आरडी खाते अनक्लेम्ड एसेट बन जाते हैं। बीमा पॉलिसी की लंबे समय तक क्लेम न की जाने वाली राशि तथा म्यूचुअल फंड की रिडेम्पशन राशि या डिविडेंड, जो खाता बदलने, बंद होने या अन्य वजह से जमा नहीं हो पाते, भी लावारिस संपत्ति कहलाते हैं।
सही हाथ में जाएगी दौलत?
सेबी रजिस्टर्ड टैक्स और इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट जितेंद्र सोलंकी बताते हैं कि नॉमिनेशन जरूर करें, ताकि लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचाव हो और पैसा आसानी से मिल सके। नॉमिनी में कानूनी वारिसों को ही रखें और उनके हिस्से का जिक्र करें, ताकि विवाद कम हो। मनमाफिक संपत्ति बंटवारे के लिए वसीयत भी अवश्य बनाएं। इसमें सारी संपत्ति का विवरण, प्रत्येक वारिस का हिस्सा और वारिस न होने या नाबालिग होने पर प्रबंधन कौन करेगा, इसका जिक्र करें। नॉमिनेशन और वसीयत, संपत्ति को सही हाथ में सौंप कर अनावश्यक देरी और विवाद से बचाते हैं।
ताकि परिवार न हो परेशान
बैंक खातों, पीपीएफ, म्यूचुअल फंड और बीमा पॉलिसी की सूची बनाकर परिवार के सभी प्रमुख सदस्यों को बताएं। नॉमिनी की जानकारी हर खाते में अपडेट रखें। दस्तावेजों को सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध जगह पर रखें। समय-समय पर खातों में लेनदेन करते रहें, ताकि वे निष्क्रिय न हों।
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