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क्या लंदन बसने को लेकर पुनर्विचार करेंगे ‘किंग कोहली’?
सार
क्या भारत के सबसे बड़े क्रिकेट आइकन का देश छोड़कर विदेश बसना उचित है? क्या इस निर्णय से वह उस भारतीय आत्मा से दूर नहीं हो रहे, जिसने उन्हें ‘किंग कोहली’ बनाया?
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विराट कोहली
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय क्रिकेट के प्रतीक और करोड़ों युवाओं की प्रेरणा विराट कोहली ने क्या लंदन को अपना स्थायी निवास बना लिया है? यह सवाल इन दिनों चर्चा में है। आज विराट कोहली के फैन्स यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है, जो विराट को देश से बाहर जाना पड़ रहा है। यह फैसला भले निजी कारणों से लिया गया हो, लेकिन यह कदम एक गहरे सांस्कृतिक और भावनात्मक सवाल को जन्म देता है।
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क्या भारत के सबसे बड़े क्रिकेट आइकन का देश छोड़कर विदेश बसना उचित है? क्या इस निर्णय से वह उस भारतीय आत्मा से दूर नहीं हो रहे, जिसने उन्हें ‘किंग कोहली’ बनाया? क्या अपने लंदन में बसने को लेकर ‘किंग कोहली’ पुनर्विचार करेंगे?
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विराट कोहली हमेशा भारतीय जज्बे और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक रहे हैं। दिल्ली की गलियों से उठकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वोच्च शिखर तक पहुंचना उनकी कहानी को हर आम भारतीय के सपनों से जोड़ देता है, लेकिन अब वही किंग कोहली जब अपने परिवार के साथ लंदन में बसने का निर्णय लेते हैं तो यह छवि धुंधली पड़ने लगती है।
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क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कई खिलाड़ी हुए हैं, जिन्होंने विदेशों में समय बिताया, लेकिन स्थायी रूप से बसने का फैसला हमेशा आलोचना का विषय रहा है, क्योंकि यह सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि भावनात्मक दूरी का प्रतीक बन जाता है।
हालांकि, विराट कोहली के समर्थक कहते हैं कि यह उनका निजी अधिकार है। एक खिलाड़ी जिसने अपने करियर में देश के लिए सब कुछ दिया, उसे अपने परिवार की सुरक्षा और मानसिक शांति का भी अधिकार है। वहीं, आलोचक मानते हैं कि यह वही कोहली हैं, जिन्होंने बार-बार खुद को भारत का बेटा कहा, तिरंगे के सम्मान के लिए अपनी भावनाएं दिखाईं।
हर इंटरव्यू में देशप्रेम की बात की। अब जब करियर के अंतिम पड़ाव पर उन्होंने लंदन में घर बसाने का फैसला किया है तो क्या यह देश के प्रति उनके उस भावनात्मक जुड़ाव का अंत नहीं है, जिसने उन्हें लाखों भारतीयों का नायक बनाया था?
भारत में कोहली सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक हैं। उनकी हर उपलब्धि को देश की उपलब्धि माना गया, लेकिन अब जब वही प्रतीक भारत से दूर जाकर ब्रिटेन की गोद में बसता है तो यह उस ‘राष्ट्र-नायक’ की छवि पर धब्बा छोड़ता है। लंदन में रहना सिर्फ भौतिक सुविधा नहीं, बल्कि एक मानसिक रूप से पश्चिमी जीवनशैली अपनाने का संकेत है। यह निर्णय भारतीय युवाओं के लिए क्या संदेश देता है कि सफलता का चरम वही है, जहां आप देश छोड़ दें और एक ग्लोबल सिटिजन बन जाएं?
क्या यही है आधुनिक राष्ट्रवाद का नया चेहरा? भारत में विराट कोहली एक आदर्श माने जाते हैं। उनके अनुशासन, फिटनेस और आत्मविश्वास की मिसाल दी जाती है। जब वही आदर्श देश से दूर रहने का विकल्प चुनता है तो युवाओं में यह संदेश जाता है कि सफलता का अंतिम लक्ष्य भारत छोड़ना है।
आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो विराट कोहली के पास अब किसी चीज की कमी नहीं है। ब्रांड एंडोर्समेंट, व्यावसायिक साझेदारियां और अंतरराष्ट्रीय विज्ञापनों से वह पहले ही अरबों रुपए कमा चुके हैं। ऐसे में लंदन में बसने का कारण आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक हो सकता है, लेकिन यही बात उनके प्रशंसकों के लिए निराशाजनक है, क्योंकि भारत ने उन्हें सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि पहचान दी।
अब जब वे इस पहचान से दूर जा रहे हैं तो यह जनता के लिए एक भावनात्मक धोखा जैसा लगता है। वह देश, जिसने उनके हर रन पर ताली बजाई, अब उनसे दूरी महसूस करने लगा है। वैसे, विराट कोहली के लंदन बसने के निर्णय पर यह तर्क दिया जा सकता है कि लंदन एक सुरक्षित और गोपनीय माहौल देता है, जहां उन्हें परिवार संग सामान्य जीवन जीने का अवसर मिलेगा, लेकिन क्या महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा, सौरव गांगुली, वीरेंद्र सहवाग, कपिल देव जैसे स्टार्स को ये सुरक्षा और गोपनीयता नहीं चाहिए। ये स्टार्स भी भारत में रह रहे हैं।
विराट कोहली का लंदन बसना कानूनी तौर पर भले ही उनका निजी निर्णय हो, लेकिन नैतिक रूप से यह सवाल खड़ा करता है कि क्या एक राष्ट्रीय नायक अपनी जिम्मेदारी सिर्फ मैदान तक सीमित रख सकता है? क्या यह उचित है कि जिस देश ने उन्हें किंग कोहली बनाया, उसी देश के लोगों से वे अब हजारों किलोमीटर दूर रहें?
विराट के लिए यह एक व्यक्तिगत जीत हो सकती है, लेकिन भारत के लिए यह एक भावनात्मक हार है, क्योंकि यह सिर्फ एक खिलाड़ी का देश छोड़ना नहीं, बल्कि एक प्रतीक का टूटना है।
एक ऐसे आइकन का, जिसने हमें गर्व तो दिया, पर अंततः अपने घर से दूर जाने का रास्ता चुना। भारत ने विराट कोहली को बहुत दिया, लेकिन अब सवाल यह है कि विराट ने भारत को क्या छोड़ा? मैदान पर जीतने वाला यह किंग शायद अब दिलों में वह जुड़ाव नहीं जीत पा रहा, जो एक सच्चे भारतीय नायक की पहचान होती है।
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