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बुरा न मानो: होली रंगोली है, होली ठिठोली है; होली है भई, होली है! बुरा न मानो होली है!

सुधीश पचौरी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं आलोचक Published by: Pavan Updated Wed, 04 Mar 2026 08:12 AM IST
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सार
यह होली की बोली है। यह होली की गोली है। होली की टोली है। होली की झोली है। होली की चूनर है। होली की चोली है। होली की डंडाडोली है, बुरा न मानो होली है। होली है भई, होली है! बुरा न मानो होली है! घुटी भांग की गोली है! कहीं गुलाल, कहीं रोली है।
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Holi is about rangoli, Holi is about banter; it's Holi, brother, it's Holi! Don't mind, it's Holi!
बुरा न मानो होली है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भंग भवानी भय हरे भाग जाय भवभूत

ललित लेखनी से लिखें लेख ललित अवधूत


होली के दिन भंगड़ियों की आरती- ऐसी आवै हरगुन गावै/हाथी के हौदा में आवे... जो करै भांग की बुराई वाय खाय कालका माई...तो, होली है भई होली है, बुरा न मानो होली है।
यह होली की बोली है। यह होली की गोली है। होली की टोली है। होली की झोली है। होली की चूनर है। होली की चोली है। होली की डंडाडोली है, बुरा न मानो होली है। बहुतों के लिए एक दिन की होली है, लेकिन अपने लिए तो हर दिन ही होली है।


होली रंगोली है। होली ठिठोली है। होली के ‘रंग’ हैं, तो होली की ‘धूल’ है। होली की ‘हूल’ है। होली की ‘चूल’ है। होली की ‘झूल’ है। होली ही ‘तूल’ है। होली के फूल हैं। होली के ‘टूल’ हैं, तो होली के ‘शूल’ हैं, लेकिन होली ही ‘कूल’ है। बुरा न मानो होली है। ‘छुरा’ न मानो होली है। ‘सुरा’ न मानो होली है। होली है भई, होली है! बुरा न मानो होली है! घुटी भांग की गोली है! कहीं गुलाल, कहीं रोली है। कहीं गोपिन की लठमार होली है, तो कहीं ग्वालन की टोली है। अंखियों से गोली मारे भैया कमाल रे/अंखियों से गोली मारे भैया कमाल रे/अपनी ही संसद का कर दे बुरा हाल रे/ सत्ता को काट न सूझै...भैया धमाल रे/अंखियों से गोली मारे भैया कमाल रे...    

बड़े लड़ैया अपने भैया-बड़े लड़ैया अपने भैया जिनकी मार सही ना जाय/‘जिउ जुत्सु’ के ‘चोक’ लगावैं, दुश्मन चौंक भौंक रह जाय/नरवाणे की पुस्तक पेलें संसद में ही दें ललकार/बातन बातन बत बढ हुइ गवा और बातन में बाढी रार/ पड़ि गयो हल्ला दुहू दलन में भैयन खींच लई तलवार/ गोपिन घेर लियो सिंहासन, सत्ता हाय हाय चिल्लाय/बड़े लड़ैया अपने भैया जिनकी मार न सही जाय...धम धम धड़म धड़ैया रे सबसे बड़े लड़ैया रे ओंकारा ओंकारा ओंकारा आंखें तेज ततैया दो तो जीभ सांप का फुंकारा...ओंकारा ओंकारा ओंकारा...छक्के छूट गए दुश्मन के धरती मांगे छुटकारा...ओंकारा...

होली खेले गलघोटिया के कुतवा- हाय गजब ‘एआई’ की होली/पहली होली चीनी कुतवे ने खेली/चीनी वाली चेपी हटाय दिया रे गलघोटिया के कुतवा/इंडिया का नाम डुबाय दिया रे गलघोटिया के कुतवा/दूजी होली नंग नचवन ने खेली...‘स्ट्रिपटीज’ कर ‘शेमलैस’ किया रे एआई समिटवा...भारत को बेइज्जत कराय दिया रे भैया जी के ‘बब्बरवा’...

कट टू मि. बखेड़ा-(बतर्ज मोहम्मद रफी) हम ‘डिसरप्ट’ करेगा...दुनिया से नहीं डरेगा...चाहे ये जमाना कहे हमको दिवाना अरे हम तो डिसरप्ट करेगा...हम तो फाइट करेगा सत्ता का हुलिया टाइट करेगा...चाहे कोई मुझे जंगली कहे, कहने दो जो कहता रहे...याहू याहू...

कट टू मेडम थ्री नॉट थ्री- इंडिया की बेइज्जती कराय दियो रे गलघोटिया के कुतवा...भारत की नकवा कटाय दियो रे गलघोटिया के कुतवा...इंडिया का नाम डुबाय दियो रे गलघोटिया के कुतवा...
कट टू मि. आंसू- (बतर्ज केएल सहगल) ये क्या जानें...‘एआई समिटवा’ क्या है?...क्या है...क्या है...ये क्या जानें ‘एआई समिटवा...आ...आ...आ’ क्या है?...उसकी कामयाबी से जलभुन राख हुए रे ‘लश्कर के बब्बरवा...टीशर्ट उतार ‘शेमलैस’ हुए रे ‘लश्कर के बब्बरबा’...कच्छा पेंट उतार देते तो पूरा मजा आता रे बब्बरवा...पुलिस ने केस कर दीनो रे भैया जी के बब्बरवा...पांच दिनन की रिमांड लियो रे पुलिसवा के सिपहिया...

अंकल सेम की होली ठिठोली-टैरिफ की मारी पिचकारी कि हिला दीनी दुनिया ये सारी/पहली पिचकारी वेनेजुएला पे मारी/ ये तेल मुझे दे दे मादुरवा...नहीं तो बना दूंगा तेरा दादुरवा...दूजी पिचकारी ईरानियन को मारी...ये बम बम मुझे दे दे ईरनवा, नहीं तो मेरा बम खाले ईरनवा...
ईरनवा बोला-ऐसा तमाचा मारेंगे अंकलवा कि सहलाता रह जाएगा गाल अंकलवा...टैरिफ का टेरर मचावे अंकलवा... कोर्ट को न भाई तेरी टैरिफानी नीतिवा कोर्ट ने लगाई फटकरवा कि नहीं चलेगा तेरा टैरिफवा, तो भी तुझको अकल न आई  अंकलवा...फिर फिर दुनिया को धमकावे अंकलवा, दुनिया को ब्लेकमेल करेला अंकलवा... दुनिया का सारा रस ले लिया रे ट्रंप वाले अमेरिकवा, फिर इंडिया से डील कर लीना रे अमेरिकवा के ट्रंपवा...

भारत ने मारी डील पिचकारी- डील डील ते होय डील ते पारहि पैये! डील बनो पुरुषार्थ डील के बलि बलि जैये!! विश्वगुरु बनिहैं भारत, उतारे दुनिया आरत... दुनिया में झंडा फहराय दियो रे भारत विश्वगुरुवा
विपक्ष उवाच- डील ढील नहिं होत ढील के मानी जानो! ढील लूट को नाम ढील आदर्श न मानो...!! डील में ढील दिया रे...सारा इंडिया बेच दिया रे विश्वगुरुवा की मुनिया! चीन ने कूटा और चीन ने ही लूटा बाकी सब लूटा अमेरिकवा ने, पिंजरे वाली मुनिया...

यूजीसी बरक्स सवर्णन की होली- हाय गजब सरकार की होली...पहले पटाई ‘सवर्णन’ की टोली, उनको चटाई देशभक्ति की गोली...फिर उनसे खेली ‘यूजीसी की ‘इक्विटी’ वाली होली, जैसे ही चटाई ‘यूजीसी’ ने गोली, ‘सवर्णन’ ने बोली विरोधन की बोली, सत्ता का ‘नशा’ सिर पे चढ़ गया रे विश्वगुरुवा के गुरगा...अपने ही वोटन भुलाय दियो रे विश्वगुरुवा के मुरगा... पहले भी प्रबोध गए बड़े गुरुज्ञानी, फिर भी ना समझे अपने अज्ञानी कि ‘आधी को छोड़ साझी को धावै साझी मिलै न आधी पावै...’ सारी विद्या भुलाय दियो रे विश्वगुरुवा के बटुकवा...विश्वगुरु की मीटिंगों का बायकाट किया रे सारे सवर्णनवा, जहं जहं जाएं वहां कुरसी खाली, सवर्णन ने नाराजी दिखाय दीनी रे भारत के विश्वगुरुवा...

असली होली एपस्टिनवा ने खेली- दुनिया के महामहिम बुलाय लिया रे एपस्टिनवा के लंपटवा...इनको बुलाया उनको भी बुलाया...किस किस को न बुलाय लियो रे एपस्टिनवा के लफंडरवा...सबको नंगा कराय दियो रे एपस्टिनवा के गुंडरवा...किस किसको न रुलाय रह्यो रे एपस्टिनवा के टुचवा...एक से एक ‘निंफोमेनियकवा’ आए, एक से एक ‘पीडोफिलियवा’ (बालिका यौन शोषकवा) भी आए...‘कोकशास्त्रान’ के फोटो-वीडियो बनाय लिया रे एपस्टिनवा के लुचवा...दुनिया को दर्शन कराय दिया रे एपस्टिनवा लंपटवा हरमवा... बहुतन के कपड़े उतरवाय दिया रे एपस्टिनवा के हरमवा...अपने फ्रेंडन को नंगा कराय दिया रे एपस्टिनवा के नंगवा... बड़े बड़ों की चूलें हिलाय दियो रे एपस्टिनवा के क्रिमिनलवा...

     कट टू बुलडोजर वाले बाबा- बाबा ने बुलडोजर चलाय दियो रे उपी वाले बाबा...पहला बुलडोजर माफिया पे चलाया अवैध कब्जा हटाय दियो रे बुलडोजर वाले बाबा...गुंडन को मिट्टी में मिलाय दियो रे बुलडोजर वाले बाबा...माफिया के छक्का छुड़ाय दिया रे बुलडोजर वाले बाबा...
‘ऑपरेशन लंगड़ा’ चलाय दिया रे बुलडोजर वाले बाबा...एक बाबा पे भी बुलडोजर चलाय दियो रे बुलडोजर वाले बाबा...  
असली बाबा या नकली बाबा ऐसो सवाल उठाय दियो रे बुलडोजर वाले बाबा...एक बाबा पे यौन शोषण का आरोप लगाय दियो रे दूजे वाले बाबा...बाबा पे केस चलाय दियो रे दूजे वाले बाबा...नंग मनंग कराय दियो रे...रंगन में भंग कराय दियो रे...रंग गुलाल उड़ाय दियो रे...छब्बीसवां की होली... -edit@amarujala.com
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