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नेपाल और भारत: परस्पर संबंधों की नई इबारत लिखने का वक्त
अमर उजाला
Published by: Pavan
Updated Sat, 28 Mar 2026 08:37 AM IST
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भारत और नेपाल
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अमर उजाला
विस्तार
ऐसे समय में, जब दक्षिण एशिया राजनीतिक अस्थिरताओं, आर्थिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धाओं से जूझ रहा है, तब बालेंद्र शाह का देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेना नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ और पड़ोसी मुल्क की बदलती राजनीतिक चेतना का प्रतीक तो है ही, यह भारत के लिए भी विशेष महत्व रखता है।गौरतलब है कि नेपाल के मतदाताओं ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) को भारी बहुमत देकर बालेंद्र शाह और उनकी सरकार को नेपाल के पूर्ण परिवर्तन के लिए सशक्त जनादेश दिया है। युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार, दूसरे देशों में काम की तलाश में भटक रहे लोगों के पलायन को रोकना, तीव्र समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहन, भाई-भतीजावाद व भ्रष्टाचार का अंत और सुशासन की स्थापना ही वे चुनौतियां हैं, जिनका सामना नई सरकार को करना होगा।
कार्यवाहक प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने चुनाव से पहले कहा था कि नेपाल के युवा हताशा में सड़कों पर उतरे थे और अगर फिर वही स्थितियां पैदा होती हैं, तो इससे निराशाजनक कुछ नहीं होगा। जहां तक भारत के साथ संबंधों की बात है, तो 1950 की शांति व मैत्री संधि नेपाल व भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों की नींव बनी हुई है, फिर भी दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा औपचारिक राजनयिक ढांचों से कहीं अधिक व्यापक है। हाल के वर्षों में भी नेपाल के साथ भारत के संबंध विकास, बुनियादी संरचना, डिजिटल कनेक्टिविटी और ऊर्जा पर केंद्रित रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि नेपाल के चुनाव में भारत कोई मुद्दा नहीं रहा और भारत ने भी बगैर किसी शोर-शराबे के हमेशा अपने इस पड़ोसी का समर्थन ही किया है। ऐसे में, उम्मीद की जानी चाहिए कि नेपाल के नए निजाम दोनों देशों के बीच की मौजूदा सद्भावना का फायदा उठाते रहना चाहेंगे। चीन की दशकों पुरानी कम्युनिस्ट पार्टियों को एकजुट करने की रणनीति हालिया चुनाव में हार के बाद कमजोर पड़ती दिख रही है, इसके बावजूद नेपाल की नई सरकार भारत से अच्छे रिश्ते बनाए रखते हुए चीन के साथ आर्थिक संबंध स्थापित करना चाहेगी।
दूसरी ओर, ट्रंप द्वारा सहायता कार्यक्रमों पर अंकुश लगाने व पश्चिम एशियाई संकट से नेपाल की आर्थिक मुश्किलात बढ़ सकती हैं। इन परिस्थितियों में बालेंद्र शाह का उदय एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है और अगर यह बदलाव सही दिशा में आगे बढ़ता है, तो न केवल नेपाल के भविष्य को नई दिशा देगा, बल्कि भारत व नेपाल के संबंधों में भी नई इबारत लिखेगा।