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मुद्दा: क्या आपका फ्रिज खाना खा रहा है? देश में प्रतिवर्ष हो रही 92 हजार करोड़ रुपये से अधिक की खाद्य बर्बादी
डॉ. विवेक एस अग्रवाल
Published by: Pavan
Updated Mon, 30 Mar 2026 05:21 AM IST
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क्या आपका फ्रिज खाना खा रहा है?
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विस्तार
सुनने में तो अजीब लगता है, लेकिन सच यही है कि हमारा फ्रिज भोजन की बर्बादी का बहुत बड़ा स्रोत है। अनुमान के अनुसार, फ्रिज में रखा हुआ लगभग आधा सामान व्यर्थ हो जाता है। समूचा विश्व आज यानी 30 मार्च को शून्य अपशिष्ट दिवस के अवसर पर खाद्य बर्बादी के प्रति चेतना जागृत करने का ध्येय रखता है। भोजन की बर्बादी निश्चित रूप से चिंता का विषय है। कितनी भी नीतियां और कानून लागू कर दिए जाएं, लेकिन यदि व्यक्तिगत स्तर पर पहल नहीं होगी, तो हर शख्स देश में प्रतिवर्ष हो रही 92 हजार करोड़ रुपये से अधिक की खाद्य बर्बादी का दोषी होगा।खाद्य बर्बादी पूरी दुनिया में होती है और तथाकथित विकास के साथ इसमें वृद्धि ही हो रही है। अमेरिका में हर घर फ्रिज कुप्रबंधन के चलते लगभग 3000 डॉलर की बर्बादी कर रहा है। पूरी दुनिया लगभग 10 खरब डॉलर की बर्बादी खाद्य सामग्री के भंडार से घर तक आने में ही हो रही है।
वर्ष 1913 में जब फ्रेड डब्ल्यू वुल्फ ने पहले घरेलू इलेक्ट्रिक रेफ्रीजरेटर बनाया था, तो इसे मानव जीवन की महान उपलब्धि बताया गया था, जो बेशक है भी। किंतु कालांतर में यही फ्रिज हमारे दुरुपयोग के चलते भोजन की कब्रगाह बन गया। फ्रिज में रखी हुई वस्तुओं में से सबसे अधिक फल-सब्जी, मांस और दूध तथा उससे बने उत्पादों की बर्बादी होती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, फ्रिज में रखे गए फल-सब्जी का लगभग आधा तथा डेयरी उत्पादों का 40 फीसदी ही उपयोग किया जाता है। फ्रिज में हो रही इन खाद्य सामग्री की बर्बादी के पीछे जहां नासमझी से की गई खरीदारी जिम्मेदार है, वहीं फ्रिज का प्रबंधन भी जिम्मेदार है। देखा गया है कि जहां फ्रिज की अत्यधिक सफाई की जाती है, वहां सामान को जल्द से जल्द हटा दिया जाता है। आमतौर पर फ्रिज में नया सामान पुराने सामान के आगे रखा जाता है, जिससे पुराना सामान नजर से ओझल हो जाता है। इससे खाद्य सामग्री की बर्बादी होती है। रोटरी क्लब ने अन्न साधना कार्यक्रम के तहत अपने सदस्यों में फ्रिज प्रबंधन के बारे में जागरूकता की पहल की थी, किंतु सदस्यों की बेरुखी और भागीदारी के अभाव में यह कार्यक्रम हर घर तक नहीं पहुंच सका।
खाने की बर्बादी पर रोक एक दिन के आयोजन से संभव नहीं है, इसके लिए आमूलचूल व्यवहार परिवर्तन जरूरी है। बीते वर्षों तक अपशिष्ट का मतलब प्लास्टिक, कपड़े इत्यादि थे। किंतु, अब दुनिया को समझ आने लगा है कि कार्बन उत्सर्जन और मीथेन जैसी गैसों के मूल में खाने की बर्बादी है। उपभोक्तावादी संस्कृति के चलते जहां खरीदारी बेकाबू हो गई है, वही भंडारण में लापरवाही और वस्तु के मूल्य को मात्र धनराशि में आंकना बर्बादी का मूल कारण है।
भारत में लगभग आठ करोड़ टन की खाद्य बर्बादी में से 70 प्रतिशत घरों के अंदर बढ़ रही लापरवाही का ही नतीजा है। आंकड़ों के अनुसार, औसतन प्रति व्यक्ति 55 किलोग्राम वार्षिक अर्थात करीब 150 ग्राम खाना प्रतिदिन बर्बाद करता है। एक व्यक्ति को औसतन आधा किलो भोजन की प्रतिदिन आवश्यकता रहती है। यानी एक व्यक्ति की साल भर की बर्बादी से 110 व्यक्तियों का पेट भर सकता है। दुर्भाग्यवश हम खाना बर्बाद करते वक्त उनका ध्यान नहीं करते, जो भूखे ही सो जाते हैं। लोगों के बीच संवेदनशीलता प्रकट करने वाले भी व्यवहार में भोजन बर्बाद करते वक्त ग्लानि महसूस नहीं करते। भोजन की बर्बादी मात्र उसमें निहित अन्न तक ही सीमित नहीं है, अपितु इसे टेबल तक पहुंचने में लगी ऊर्जा, श्रम और अन्य संसाधन भी अहम होते हैं।
अब जबकि फ्रिज हर घर तक पहुंच गया है और इसका मुख्य उपयोग भोजन के आयु-संवर्धन में ही किया जा रहा है, तो यह उचित होगा कि लोग अपने फ्रिज का सही ढंग से प्रबंधन करें, ताकि खाद्य बर्बादी को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके। फ्रिज प्रबंधन के मूल मंत्र में हर वस्तु का निरंतर आंखों के समक्ष होना, पहले आई वस्तु का पहले उपयोग, जल्दी खराब होने वाली वस्तु का पहले उपयोग या उपयोग न कर पाने पर उपयुक्त संस्था या व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित करना अहमियत रखते हैं। खाद्य सामग्री की खरीदारी से पहले जरूरतों का आकलन करते हुए खरीद को अंजाम देना महत्वपूर्ण है। फ्रिज प्रबंधन में 2-2-2 के सिद्धांत का पालन सहायक हो सकता है, जिसके तहत बचा हुआ भोजन दो घंटे के भीतर फ्रिज के अंदर, दो दिन में उसे उपयोग में लेना अथवा दो माह तक के लिए फ्रीजर में स्थानांतरित कर देना होता है, ताकि वह उपयोगी बना रहे।
यदि हम अन्न की साधना करते हुए अपने फ्रिज और स्टोर को भोजन की कब्रगाह बनने से रोक सकें, तो भोजन की बर्बादी को पूर्णतया रोका जा सकता है। वैसे भी सनातन काल से भारत में अन्न ही ब्रह्म है, फिर दुरुपयोग क्यों? भोजन की बर्बादी अभिमान का नहीं, शर्म का विषय होना चाहिए। हो सकता है, व्यर्थ भोजन की आपके लिए कोई कीमत नहीं हो, पर जो भूखा सोता है, उसके लिए यह बेशकीमती है।