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Bengal: संघीय मर्यादा का सवाल, बंगाल में नया राजनीतिक तूफान
Mon, 09 Mar 2026 07:02 AM IST
Nitin Gautam
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Mon, 09 Mar 2026 07:02 AM IST
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बंगाल सीएम ममता बनर्जी
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अमर उजाला
विस्तार
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन न होने और आखिरी समय पर कार्यक्रम स्थल में बदलाव ने एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। अमूमन शांत रहने वाली राष्ट्रपति मुर्मू ने भी इस मामले में सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की, तो प्रधानमंत्री मोदी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्र सरकार ने इस मामले में राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। दरअसल, यह सिर्फ प्रशासनिक चूक का मामला नहीं है, बल्कि इससे उस राजनीतिक माहौल की झलक भी मिलती है, जो पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल की पहचान बन गया है।राज्यपालों के साथ ममता के व्यवहार, जांच के लिए राज्य में आए केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों के साथ रवैया और एसआईआर को लेकर उनके आक्रामक रुख से यही मालूम होता है, मानो वह राज्य में अलग देश बनाना चाह रही हों, जिसे उचित नहीं कहा जा सकता। अपने राज्य में राष्ट्रपति का स्वागत करना मुख्यमंत्री के लिए अनिवार्य नहीं है, लेकिन परंपरा और शिष्टाचार के अनुसार, यदि मुख्यमंत्री स्वयं उपस्थित न हों, तो उन्हें राष्ट्रपति के स्वागत के लिए किसी मंत्री को नामित करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मई, 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान, जो काफी विवादित रही थी, ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में चक्रवात पर आयोजित बैठक में भाग नहीं लिया था, लेकिन हवाई अड्डे पर उनका स्वागत जरूर किया था।
राष्ट्रपति का पद देश की सांविधानिक गरिमा का प्रतीक है। ऐसे में, उनके कार्यक्रमों के आयोजन में प्रोटोकॉल का पालन महज औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान का संकेत भी है। एक सवाल यह भी है कि जब पूरा कार्यक्रम पहले से तय था, तब आखिरी क्षण में स्थान बदलने की क्या वजह रही? राष्ट्रपति मुर्मू का यह कहना राज्य सरकार के इरादों को लेकर शंका पैदा करता है कि पहले कार्यक्रम सिलीगुड़ी के पास बिधाननगर में होना था, जहां अधिक लोग आ सकते थे, लेकिन बाद में इसे गोसाईंपुर कर दिया गया, जहां पहुंचना मुश्किल था। केंद्र और राज्य के बीच मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतभेद लगातार टकराव और अविश्वास में बदलते दिखे हैं, जो अच्छा नहीं है। बेहतर हो कि यह विवाद सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहे, बल्कि राज्य सरकार इस पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा करे और सुनिश्चित करे कि ऐसे विवादों की पुनरावृत्ति न हो।