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मुद्दा: ताकि बनी रहे डिजिटल बढ़त, अर्थव्यवस्था में मौजूदा योगदान 12 से 13%, आगामी दशक में 20% होने का अनुमान

Sat, 24 Oct 2026 07:15 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Sat, 24 Oct 2026 07:15 AM IST
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सार
वर्तमान में भारत की जीडीपी में डिजिटल अर्थव्यवस्था का योगदान लगभग 12 से 13 फीसदी है, जिसके आगामी एक दशक में बढ़कर 20 प्रतिशत होने का अनुमान है।
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Sustaining digital advantage In economy current contribution 12 to 13 pc projected rise 20 pc in coming decade
जीडीपी - फोटो : amarujala.com

विस्तार

हाल ही में प्रकाशित केयरएज ग्लोबल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) तंत्र दुनिया के 10 सबसे असरदार संरचनात्मक सुधारों में शामिल हो चुका है। वैश्विक स्तर पर 38 देशों के 43 प्रमुख सुधारों का गहन अध्ययन करने के बाद जारी की गई इस वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इस अभूतपूर्व डिजिटल ढांचे ने न केवल आम नागरिकों के लिए प्रशासनिक और बैंकिंग सेवाओं को सुलभ बनाया है, बल्कि लेनदेन की लागत में भी ऐतिहासिक कटौती की है।



हाल ही में जारी स्टेट ऑफ इंडियाज डिजिटल इकनॉमी (साइड) 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था बन गया है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट रूप से उजागर होता है कि भारत ने अपनी डिजिटल कार्यक्षमता, नेटवर्क कवरेज और तकनीकी प्रदर्शन में जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा जैसे कई विकसित राष्ट्रों को पीछे छोड़ दिया है।


वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में डिजिटल अर्थव्यवस्था का योगदान लगभग 12 से 13 फीसदी है, जिसके आगामी एक दशक में बढ़कर 20 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि भारत का डिजिटल रूप से प्रदत्त व्यापार (जैसे सॉफ्टवेयर, डाटा और क्लाउड सेवाएं) 328 अरब डॉलर के विशाल स्तर को पार कर चुका है।

‘डिजिटल इंडिया’ से शुरू हुई यह यात्रा आज दुनिया के सबसे बड़े और सबसे सफल ‘डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना’ के निर्माण तक पहुंच चुकी है। इस डिजिटल अभियान का आधार ‘इंडिया स्टैक’ है, जिसमें आधार से पहचान, यूपीआई से तुरंत भुगतान और डिजीलॉकर व अकाउंट एग्रीगेटर से डिजिटल दस्तावेजों व डाटा का प्रबंधन होता है। इस तकनीकी रीढ़ को जमीनी स्तर पर मजबूती देने में ‘जैम ट्रिनिटी’ (जनधन, आधार और मोबाइल) की भूमिका रही है।

भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे की सफलता का व्यापक और सकारात्मक प्रभाव एमएसएमई क्षेत्र तथा छोटे व्यापारियों पर देखा गया है। वर्तमान में छोटे व मध्यम कारोबारियों का 85 प्रतिशत से अधिक लेनदेन डिजिटल माध्यमों से संपन्न हो रहा है। भारत आज दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के लगभग आधे हिस्से का नेतृत्व करता है। सस्ते इंटरनेट और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने देश में उपभोक्ता व्यवहार को एक नई परिभाषा देते हुए भारत को विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ‘स्टार्टअप इकोसिस्टम’ बना दिया है। भारतीय स्टार्टअप्स बड़े पैमाने पर नए रोजगार सृजित कर भारी मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित कर रहे हैं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के पूर्ण डिजिटलीकरण और आयकर रिटर्न की प्रक्रिया के ‘फेसलेस’ होने से कर अनुपालन में भी ऐतिहासिक सुधार हुआ है।

उम्मीद है कि भारत डिजिटल बढ़त को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा को और अधिक अभेद्य बनाने, डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन अधिनियम का जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता को बढ़ाने की राह पर तेजी से आगे बढ़ेगा।

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