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टाइम मशीन: जापानी कॉरपोरेट का ढहता किला, 5 मार्च को अहम वार्ता

अंशुमान तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार Published by: Pavan Updated Sun, 01 Mar 2026 07:37 AM IST
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सार
दुनिया की सबसे बुरी और दागी कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए कुख्यात है जापान। मगर अब निवेशकों और एक्टिविस्ट फंड ने पीढ़ियों पुरानी कंपनियों के नकाब नोच लिए हैं। जापान में एक्टिविस्ट इन्वेस्टर्स वे योद्धा हैं, जो शेयर खरीदकर प्रबंधन को चुनौती देते हैं, परिवारों की मनमानी का खुलासा करते हैं और बोर्ड बदलने पर मजबूर करते हैं।
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Time Machine: The crumbling fortress of Japanese corporates, important talks on March 5
टाइम मशीन: जापानी कॉरपोरेट का ढहता किला, 5 मार्च को अहम वार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पांच मार्च, 2026 को पहली बार जापान की सबसे बड़ी बिजनेस लॉबी या संगठन और निवेशकों के लोकतंत्र का परचम लहराने वाली निवेश कंपनी इलियट आमने-सामने बात करेगी। इन निवेशकों ने ही जापानी कंपनियों की नाक में दम कर रखा है। यह बैठक जैबात्सु-केइरेत्सु राज के टूटने की शुरुआत है।


इस साल की शुरुआत में जापान की सबसे बड़ी खबर थी कि जापान की फार्मेसी कंपनी कुसुरी नो आओकी को ‘पॉइजन पिल’  खानी पड़ी। जापान में कंपनियां खुद को अधिग्रहण सेे बचाने के लिए मौजूदा शेयर धारकों को सस्ते शेयर देती हैं, यही खून का घूंट या जहर का प्याला है, जिसे पिये बिना जापान की कंपनियां निवेशकों के आंदोलन और अधिग्रहण से बच नहीं सकतीं।


जापानी कंपनियों में लोकतंत्र नहीं है। मालिक का वचन ही शासन है। कंपनियां पीढ़ियों से परिवारों के नियंत्रण में हैं। शेयरधारकों को कोई हक नहीं है। दुनिया की सबसे बुरी और दागी कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए कुख्यात है जापान। मगर अब निवेशकों और एक्टिविस्ट फंड ने पीढ़ियों पुरानी कंपनियों के नकाब नोच लिए हैं। जापान में एक्टिविस्ट इन्वेस्टर्स वे योद्धा हैं, जो शेयर खरीदकर प्रबंधन को चुनौती देते हैं, परिवारों की मनमानी का खुलासा करते हैं और बोर्ड बदलने पर मजबूर करते हैं। कुसुरी नो आओकी 157 साल पुरानी कंपनी है। दो भाई चलाते हैं। विदेशी फंड इयोन और एक्टिविस्ट फंड ओएसिस ने इसके अधिग्रहण की कोशिश की। अपने संस्थापक परिवार को बचाने के लिए कंपनी ने अपने बोर्ड में पॉइजन पिल की मंजूरी ली, 55 फीसदी वोट से पास हुई। इसी तरह, फुजी मीडिया होल्डिंग्स और टोहो होल्डिंग्स ने भी जहर की गोली खाई। जापान के विश्वविख्यात ब्रांड बनाने वाली कंपनियां इतनी बदनाम क्यों हैं? क्यों सरकार भी इनके कामकाज नहीं बदल पाती? आइए, विराजिए टाइम मशीन में, आपको जापान के कॉरपोरेट जगत के एक बदनुमा चेहरे से मिलवाते हैं, जिसे सरकार भी ठीक नहीं कर पाई।

टाइम मशीन इस वक्त जापान के सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे मेइशिन के ऊपर उड़ रही है। यह नागोया को कोबे से जोड़ता है। यह राजमार्ग जापान के इतिहास के सबसे निर्णायक इलाकों से होकर गुजरता है। हम सेइकीगारा की तरफ बढ़ रहे हैं। 16वीं सदी का समापन हो रहा है। समुराई तोयोतोमी हिदेयोशी का युग बीत रहा है, वह जापान के सबसे ताकतवर सामंत थे। उनके युग में एकजुट हुआ जापान अब बिखरने लगा है। जापान में गृहयुद्ध शुरू हो गया है। अलग-अलग हिस्सों में डामियो, यानी सामंतों के बीच जापान पर कब्जे की सबसे भयानक जंग चल रही है। सेइकीगारा में हम इसी जंग का निर्णायक क्षण देखने आए हैं। नीचे उतरने का मतलब है जान गंवाना, तो टाइम मशीन के हेड पर कान लगाइए और सेकिगहारा की घाटियों और पर्वतीय इलाके के भीतर खड़ी सेनाओं को देखिए। पूर्व और पश्चिम की सेनाओं ने मोर्चा बांध लिया है। पश्चिम की सामंती सेना का नेतृत्व कर रहे हैं इशिदा मित्सुनारी, तो पूर्व की सेना तोकूगावा लेयासू के नेतृत्व में आर-पार को तैयार है। जापान के इतिहास की इस सबसे भयावह खूनी जंग में जीत तोकूगावा लेयासू की हुई है। उनके युद्ध कौशल और रणनीतिक गठजोड़ के सामने मित्सुनारी टिके नहीं। सेकिगहारा के युद्ध के साथ जापान में सेंगोकू युग का समापन हो रहा है।

यह 17वीं सदी की शुरुआत है। तोकूगावा वंश ने जापान का एकीकरण किया किया है। टाइम मशीन इस वक्त जापान के इडो युग में है, जिसे आर्थिक विकास और संस्कृति की दृष्टि से सबसे मूल्यवान माना जाएगा। जापान में नए शहर बने हैं और अब नींव पड़ रही है जैबात्सु की, जिसे देखने के लिए हम 21वीं सदी से यहां आए हैं। आप सामने जिस औद्योगिक घराने का भवन देख रहे हैं, वह मित्सुई है। मित्सुई परिवार इडो, यानी टोकियो में दर्जी का काम करता था। जापानी किमोनो बनाने में उन्हें महारत हासिल थी। व्यापार के अवसर बढ़ते ही मित्सुई परिवार ने वित्तीय लेन-देन, खनन, फैक्टरी निर्माण में निवेश शुरू कर दिया। इस परिवार को सम्राट तोकुगावा शोगुनात्से का संरक्षण मिला और आज 1673 में जापान का पहला जैबात्सु आकार ले रहा है।

आगे बढ़ते हैं 19-20वीं सदी की तरफ। मित्सुई की उड़ान ऊंची होती गई है। अब मित्सुई समूह जापान का सबसे बड़ा व पुराना जैबात्सु बन गया है। दो सौ साल में इस कारोबारी घराने ने विभिन्न सरकारों की मदद से असंख्य कारोबारों और पूरी दुनिया में अपना विस्तार किया है। यह ब्रिटेन के निवेशकों से कोयला खदानें खरीदकर खुद को माइनिंग दिग्गज में बदल चुका है। अब दूसरी इमारत को देखिए-यह सुमितोमो है, यह दूसरा बड़ा उद्योग घराना है, जिसने तांबे के खनन से शुरुआत की और रेलवे इंजीनियरिंग, बुनियादी ढांचे, टेलीग्राफ और बैंकिंग तक फैल गया। 1990 में दुनिया मे तांबे की किल्लत से पहले सुमितोमो ने सस्ता तांबा खरीद कर खूब कमाई की। यही वह दौर है, जब यासुदा और मित्सुबिशी के जैबात्सु बन रहे हैं, जो कुछ ही दशकों में विराट औद्योगिक घराने बन जाएंगे। जैबात्सु परिवार आधारित कारोबारों का एक जटिल ताना-बाना होता है, जिसमें एक विशाल परिवार कई तरह के कारोबार संभालता है। ये घराने बीसवीं सदी तक जापान के औद्योगीकरण का नेतृत्व करने लगे हैं। टाइम मशीन अब दूसरे विश्वयुद्ध के दौर में है। युद्ध की तैयारियों के लिए जापान सरकार ने जैबात्सु पर नियंत्रण कर लिया था। एटमी हमले के बाद जब जापान का पुनर्निर्माण शुरू हुआ, तो मित्सुई, सुमितोमो, मित्सुबिशी आदि नए अवतार में सामने आते रहे। इन पुराने समूह ने खुद को कई कंपनियों में बांट लिया, जो पूंजी बाजार से लेकर बैंकिंग तक सक्रिय हैं।

यह बीसवीं सदी का आखिरी दशक है। जैबात्सु का नया संस्करण आ गया है, इसे केइरेत्सु कहा जाता है। जापान के मेगा कॉरपोरेशन केइरेत्सु सिस्टम पर चलते हैं। यह प्रणाली कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता की दुश्मन है। यही वजह है कि सरकार की नजदीकी और बैंकों के संरक्षण में जापानी मेगा कॉरपोरेशन भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे रहते हैं। घोटाले खुलने के बाद ही पता चलता है कि कंपनियों के अंदर क्या हो रहा है। 2005 में जापान की मेगा इंटरनेट कंपनी लाइवडोर में बड़ा एकाउंटिंग फ्रॉड खुला। 2015 में ऐसा ही हुआ तोशिबा में। यह सितंबर 2022 है। आपकी स्क्रीन पर दिख रहे हैं जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा, जो न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में निवेशकों को भरोसा दे रहे हैं कि जापान के कुख्यात कॉरपोरेट अब सुधर रहे हैं, बीते सुधारों के बाद कंपनियों की साख और कमाई बेहतर हुई है। प्रधानमंत्री फुमियो ने यह नहीं बताया कि जापान के जिद्दी कॉरपोरेट सरकार की वजह से नहीं, विदेशी निवेश कंपनियों और छोटे निवेशकों की सक्रियता से सुधरे हैं। इनकी वजह से ही 2020 में तोशिबा, ओलंपस और क्यूशू रेलवे प्रबंधन में बड़े बदलाव हुए। ताकतवर निदेशकों को कंपनी छोड़नी पड़ी। 2021 में सोनी कॉरपोरेशन को निवेशकों के दबाव पर शेयरों का बायबैक करना पड़ा। टाइम मशीन अब टोक्यो में उतरेगी, क्योंकि आप जापान के कॉरपोरेट इतिहास की सबसे बड़ी घटना के गवाह बनने वाले हैं।

पांच मार्च, 2026 को यहां केदानरेन (जापान व्यापार महासंघ) और इलियट की बैठक है। यह पहला मौका है, जब जापान की सबसे बड़ी बिजनेस लॉबी या संगठन व निवेशकों के लोकतंत्र का परचम लहराने वाली निवेश कंपनी इलियट आमने-सामने बात करेगी। इन निवेशकों ने ही जापानी कंपनियों की नाक में दम कर रखा है। सोनी, मित्सुई, टोयोटा, सुमितोमो, होंडा, दाइवा, मित्सुबिशी, नोमुरा, दाइवा सहित जापान के सभी दिग्गज और करीब 1,600 जापानी उद्योग वंश इस केदानरेन के सदस्य हैं। आंदोलनकारी निवेशकों के साथ केदारनेन की यह बैठक जैबात्सु-केइरेत्सु राज के टूटने की शुरुआत है, परिवार और बैंकों का किला ढह रहा है। फिर मिलते हैं अगले सफर पर...
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