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वेनेजुएला में भूकंप की दोहरी मार, दुनिया के लिए बड़ा सबक
वेनेजुएला में इस तरह का भूकंप 1900 के बाद पहली बार आया है। दुर्योग से ऐसा तब हुआ है, जब पूरे देश में राष्ट्रीय अवकाश था, स्कूल व दफ्तर बंद थे और अधिकांश लोग घरों पर मौजूद थे। इस त्रासदी की भयावहता का अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि अनेक इमारतें जमींदोज हो गई हैं, सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, बिजली व संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
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वेनेजुएला में बुधवार शाम को एक के बाद एक आए दो बेहद शक्तिशाली भूकंपों के बाद तबाही के जो दृश्य दिख रहे हैं, वे दिल दहलाने वाले तो हैं ही, एक ऐसे राष्ट्र के लिए दोहरी मार जैसे हैं, जो पहले से ही आर्थिक व राजनीतिक संकटों से जूझ रहा है। बताया जा रहा है कि वेनेजुएला में इस तरह का भूकंप 1900 के बाद पहली बार आया है। दुर्योग से ऐसा तब हुआ है, जब पूरे देश में राष्ट्रीय अवकाश था, स्कूल व दफ्तर बंद थे और अधिकांश लोग घरों पर मौजूद थे। इस त्रासदी की भयावहता का अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि अनेक इमारतें जमींदोज हो गई हैं, सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, बिजली व संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और हजारों लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका भी जताई जा रही है। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, इस बात की 44 फीसदी आशंका है कि मृतकों की संख्या दस हजार से भी अधिक हो सकती है, जबकि तीस फीसदी आशंका एक लाख से भी अधिक लोगों के जान गंवाने की है। वेनेजुएला की यह त्रासदी दुनिया के उन देशों के लिए भी एक चेतावनी है, जो भूकंप-संभावित क्षेत्रों में स्थित हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी राज्य, दिल्ली-एनसीआर और गुजरात इत्यादि कई क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। इसके अलावा, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अनियोजित निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर भी चिंताएं व्यक्त की जाती रही हैं। प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव का आकलन केवल रिक्टर पैमाने पर दर्ज तीव्रता से नहीं किया जा सकता। किसी भी भूकंप की विनाशक क्षमता इस पर निर्भर करती है कि प्रभावित क्षेत्र की आबादी कितनी घनी है, भवनों की गुणवत्ता कैसी है और आपदा से निपटने की क्या तैयारी है। जापान व चिली जैसे देशों ने कठोर निर्माण मानकों, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और अभ्यास से भूकंप से होने वाली क्षति को काफी हद तक नियंत्रित किया है। ऐसे में, भारत सहित बाकी देशों के लिए जरूरी है कि आपदा प्रबंधन को विकास नीति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। युद्ध व संकटों के वर्तमान वैश्विक दौर में वेनेजुएला में हुई क्षति के पश्चात राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, कई देशों का मदद के लिए आगे आना मानवता के लिहाज से उम्मीद जगाने वाला है। प्रत्येक देश के लिए यह आत्ममंथन का समय भी होना चाहिए कि क्या ऐसी आपदाओं के लिए उनकी तैयारी पर्याप्त है? वेनेजुएला की त्रासदी का यही असली सबक होगा।
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