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जब बेचैनी सताए: इस अवस्था में कैसे करें नियंत्रण, ये है मार्क ब्रैकेट का फॉर्मूला
जैंसी डन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: Shubham Kumar
Updated Sun, 01 Mar 2026 07:44 AM IST
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जब भी मैं बेचैन या अस्थिर महसूस करती हूं, तो मुझे अपने शहर के किराने की दुकान पर जाना अच्छा लगता है। वहां का माहौल मुझे भीतर तक शांत कर देता है। येल सेंटर फॉर इमोशनल इंटेलिजेंस के संस्थापक निदेशक मार्क ब्रैकेट कहते हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी के उतार-चढ़ाव से निपटने के कई तरीके हैं। उन्होंने भावनाओं के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए एक ढांचा विकसित किया है, जिसे रूलर (आरयूएलईआर) नाम दिया है, यानी पहचानना, समझना, नाम देना, व्यक्त करना व नियंत्रित करना। जब मैंने उनसे इन चरणों को विस्तार से समझाने को कहा, तो उन्होंने सबसे पहले ‘पहचान’ से शुरुआत की।
डॉ. ब्रैकेट कहते हैं कि हम भावनाओं की एक निरंतर बहती धारा से गुजरते हैं, और कभी-कभी कोई भावना अचानक हमें चौंका देती है। ऐसे में, पहला कदम है-ठहर कर स्वीकार करना कि आप कुछ महत्वपूर्ण महसूस कर रहे हैं, जिसे पहचानना जरूरी है। एनवाईयू स्टीनहार्ट में एप्लाइड साइकोलॉजी के क्लिनिकल असिस्टेंट प्रोफेसर कार्तिक गुनिया के अनुसार, यह इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यदि हम भावनाओं को दबाने, उनसे दूर भागने या उन्हें अनदेखा करने की कोशिश करते हैं, तो वे और तीव्र हो जाती हैं। जब आप यह मान लेते हैं कि कोई भावना आपका ध्यान चाहती है, तो ठहरें और उसे समझने की कोशिश करें।
शोध बताते हैं कि अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने से मानसिक तनाव कम होता है। इसलिए, डॉ. ब्रैकेट सलाह देते हैं कि अपनी भावनाओं को पहचानने के लिए अधिक से अधिक वर्णनात्मक शब्दों का इस्तेमाल करने का अभ्यास करें। जब आप अपनी भावनाओं को पहचान और नाम दे लें, तो उन्हें बेहतर ढंग से व्यक्त करने का मार्ग खोजें। डॉ. ब्रैकेट कहते हैं कि आप किसी मित्र से बात कर सकते हैं या अपने पालतू जानवर से भी मन की बात कह सकते हैं। अकेले चिंता करने से बचें, क्योंकि अकेले चिंता में डूबने से भावनाओं से निपटने में मदद नहीं मिलती। संगीत सुनना भावनाओं को अभिव्यक्त करने का सरल और प्रभावी माध्यम है। आप भावनाओं को डायरी में भी लिख सकते हैं।
सकारात्मक व रचनात्मक दिशा देकर भी आप अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं। आप टहलने जा सकते हैं, योग कर सकते हैं, या कुछ समय प्रकृति के बीच बिताकर मन को ताजगी दे सकते हैं। बुनाई, हस्तशिल्प या लकड़ी का काम जैसे काम भी सुकून देते हैं। डॉ. कार्तिक गुनिया कहते हैं कि वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करना तीव्र भावनाओं की पकड़ से बाहर निकलने में मदद करता है। जो लोग अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर पाते हैं, वे अधिक संतुष्ट जीवन जीते हैं और लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं।