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Shami-Jahan: अलीपुर कोर्ट ने दी मोहम्मद शमी को राहत, चेक बाउंस मामले में हुए बरी; हसीन जहां ने लगाए थे आरोप
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Wed, 20 May 2026 04:17 PM IST
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सार
हसीन जहां द्वारा शमी पर लगाए गए एक लाख के चेक बाउंस के आरोप मामले पर सुनवाई करते हुए अलीपुर कोर्ट ने बुधवार को तेज गेंदबाज को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
मोहम्मद शमी
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को अलीपुर कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राहत दी है। अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है। दरअसल, शमी की पूर्व पत्नी हसीन जहां ने आरोप लगाया था कि शमी द्वारा घर के खर्च के लिए दिया गया एक लाख रुपये का चेक बाउंस हो गया था। इस मामले पर सुनवाई के बाद अलीपुर कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए शमी को इस मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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चार लाख रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता दे रहे शमी
मोहम्मद शमी और उनकी पूर्व पत्नी हसीन जहां के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। पिछले साल जुलाई में कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी ने आदेश पारित किया था कि शमी अपनी पत्नी और बेटी के लिए ₹4 लाख प्रतिमाह गुजारा भत्ता देंगे। जिसके बाद हसीन जहां ने इस राशि को बढ़ाकर ₹10 लाख करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
आदेश में क्या कहा गया?
न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी द्वारा पारित आदेश में कहा गया है, 'मेरे विचार से, याचिकाकर्ता नंबर एक (हसीन जहां) को 1,50,000 रुपये प्रति माह और उसकी बेटी को 2,50,000 रुपये की राशि मामले का निपटारा होने तक दोनों याचिकाकर्ताओं के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उचित होगा।' आदेश में कहा गया है, 'हालांकि याचिकाकर्ता के बच्चे के संबंध में पति/विपरीत पक्ष (शमी) को हमेशा स्वेच्छा से उसकी शिक्षा और/या अन्य उचित खर्चों में उपरोक्त राशि के अतिरिक्त सहायता करने की स्वतंत्रता होगी।'
मोहम्मद शमी और उनकी पूर्व पत्नी हसीन जहां के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। पिछले साल जुलाई में कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी ने आदेश पारित किया था कि शमी अपनी पत्नी और बेटी के लिए ₹4 लाख प्रतिमाह गुजारा भत्ता देंगे। जिसके बाद हसीन जहां ने इस राशि को बढ़ाकर ₹10 लाख करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
आदेश में क्या कहा गया?
न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी द्वारा पारित आदेश में कहा गया है, 'मेरे विचार से, याचिकाकर्ता नंबर एक (हसीन जहां) को 1,50,000 रुपये प्रति माह और उसकी बेटी को 2,50,000 रुपये की राशि मामले का निपटारा होने तक दोनों याचिकाकर्ताओं के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उचित होगा।' आदेश में कहा गया है, 'हालांकि याचिकाकर्ता के बच्चे के संबंध में पति/विपरीत पक्ष (शमी) को हमेशा स्वेच्छा से उसकी शिक्षा और/या अन्य उचित खर्चों में उपरोक्त राशि के अतिरिक्त सहायता करने की स्वतंत्रता होगी।'