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कभी 35 रुपये रोजी में मजदूरी करता था यह खिलाड़ी, फिर भारत को 2011 विश्व कप दिलाया
साल 1983, कपिल देव की अगुवाई में जब भारतीय टीम ने पहला विश्व कप जीतकर इतिहास रचा था, उसी साल गुजरात के सूदूरवर्ती जिले भरूच के एक बेहद गरीब परिवार में मुनाफ पटेल का जन्म हुआ। 35 रुपये रोजी में काम करके अपना बचपन जीने वाले मुनाफ आज 37 साल के हो गए।
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मुनाफ पटेल
- फोटो : social media
किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक अनजान गांव इखार से निकलकर भारत को 28 साल बाद 2011 विश्व कप जिताने में मुनाफ अहम रोल निभाएगा। वाकई एक दिहाड़ी मजदूर के लिए भारतीय टीम के तेज गेंदबाज बनने का सफर किसी खूबसूरत सपने से कम नहीं होगा।
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मुनाफ पटेल
कभी 35 रुपये दिहाड़ी में काम करने वाले मुनाफ पटेल ने खुद कहा था कि अगर उन्होंने बचपन में गेंद, बल्ला नहीं थामा होता तो आज शायद अफ्रीका की किसी कंपनी में मजदूरी कर रहे होते क्योंकि उनके गांव के अधिकतर लोग जीवन-यापन के लिए वहीं जाकर टाइल फैक्टरियों में काम करते हैं।
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मुनाफ पटेल
- फोटो : getty
धीरे-धीरे मुनाफ ने खुद को क्रिकेट के करीब पाया। खेलने लगे, उनकी किस्मत तब चमकी जब दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों से क्रिकेटर तलाशे जाने लगे। नैसर्गिक पेस से आकर्षित होकर तब मुख्य चयनकर्ता रहे किरण मोरे ने उन्हें MRF पेस फाउंडेशन बुलाया।
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- फोटो : ट्विटर
उस वक्त संस्थान के डायरेक्टर रहे डेनिस लिली और दौरे पर पहुंचे स्टीव वॉ दोनों का ध्यान खींचने में लंबा कद या गेंदबाज सफल रहा। सचिन तेंदुलकर को जब उनकी खबर लगी तो उन्होंने अपने पास मुंबई बुला लिया। मास्टर-ब्लास्टर ही उनका सारा खर्च उठाते थे।
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