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Hindi News ›   Cricket ›   Harbhajan Singh on Vaibhav Sooryavanshi: "Only Way to Survive Is to Attack Him"; Opens Up on Life

हरभजन ने बताया सूर्यवंशी को रोकने का तरीका: क्यों बोले- ईश्वर का चुना हुआ हूं, उपलब्धियों का श्रेय भी उसी को?

Fri, 14 Aug 2026 04:04 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Fri, 14 Aug 2026 04:04 PM IST
सार

भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की आक्रामक बल्लेबाजी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि सूर्यवंशी को रोकने का एकमात्र तरीका उस पर आक्रमण करना और विकेट लेने की कोशिश करना है। इसी बातचीत में हरभजन ने अपनी उपलब्धियों, परिवार और जीवन के प्रति नजरिए पर भी खुलकर बात की।

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Harbhajan Singh on Vaibhav Sooryavanshi: "Only Way to Survive Is to Attack Him"; Opens Up on Life
हरभजन सिंह - फोटो : ANI

विस्तार

वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बना ली है। 15 साल के इस युवा बल्लेबाज ने आईपीएल से लेकर अंडर-19 विश्व कप और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक अपने आक्रामक अंदाज से सभी को प्रभावित किया है। अब भारत के पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने बताया है कि गेंदबाजों के लिए इस बेखौफ बल्लेबाज को रोकने का सबसे सही तरीका क्या है। हरभजन का मानना है कि सूर्यवंशी को बांधकर रखने की कोशिश करना गेंदबाज के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसके बजाय उसे लगातार आउट करने की कोशिश करनी चाहिए।

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हरभजन ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, 'वैभव सूर्यवंशी असाधारण हैं। वह एक अलग तरह के खिलाड़ी हैं। मैंने इससे पहले ऐसा खिलाड़ी नहीं देखा, जो 14-15 साल की उम्र में ही दुनिया पर दबदबा बना सके।' सूर्यवंशी ने 2025 में राजस्थान रॉयल्स के लिए 14 साल की उम्र में आईपीएल डेब्यू किया था और लीग के इतिहास में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने थे। इसके कुछ ही समय बाद उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ महज 35 गेंदों में शतक जड़कर पुरुष टी20 क्रिकेट में सबसे कम उम्र में शतक लगाने का रिकॉर्ड बनाया।
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'बचने का एकमात्र तरीका है कि उस पर आक्रमण करें'
सूर्यवंशी की खासियत यह है कि वह गेंदबाज के नाम, प्रतिष्ठा या मैच की स्थिति से प्रभावित हुए बिना अपने आक्रामक शॉट खेलने से पीछे नहीं हटते। इस साल आईपीएल में उन्होंने जसप्रीत बुमराह और पैट कमिंस जैसे दुनिया के शीर्ष तेज गेंदबाजों की पहली ही गेंदों पर छक्के लगाकर अपनी मानसिकता का परिचय दिया था। हरभजन ने कहा, 'जब दुनिया के शीर्ष गेंदबाज उसे गेंदबाजी कर रहे होते हैं तो वे वास्तव में यह सोच रहे होते हैं कि गेंद कहां डालनी है। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है।'
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जब उनसे पूछा गया कि ऐसे बल्लेबाज के खिलाफ क्या रणनीति होनी चाहिए, तो हरभजन ने साफ जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'बचे रहने का एकमात्र तरीका है कि उस पर आक्रमण करें। आप उस पर आक्रमण करें और उसका विकेट लें। यह हर बार काम नहीं करेगा। कई बार आप बुरी तरह पिट भी सकते हैं। वह छक्के लगा सकता है। लेकिन यह खेल का हिस्सा है। आपको स्वीकार करना होगा कि वह अच्छा खिलाड़ी है।'

'मैं अपने हिसाब से क्षेत्ररक्षण लगाऊंगा'
पावरप्ले में सूर्यवंशी के खिलाफ रणनीति पर हरभजन ने कहा कि वह युवा बल्लेबाज के हिसाब से खुद को बदलने के बजाय अपनी रणनीति पर भरोसा करेंगे। उन्होंने कहा, 'मैं उसके हिसाब से क्षेत्ररक्षण नहीं लगाऊंगा। मैं अपने हिसाब से क्षेत्ररक्षण लगाऊंगा। अगर मैं बचने के लिए गेंदबाजी करूंगा तो मैं उसे आउट नहीं कर पाऊंगा। आप उसके खिलाफ आक्रमण करें और उसका विकेट लें। आपको सफलता मिल सकती है या नहीं भी मिल सकती। यह केवल समय की बात है। आपको स्वीकार करना होगा कि वह अच्छा है। लेकिन फिर भी अगली गेंद का मकसद उसे आउट करने का तरीका तलाशना होना चाहिए।'

सूर्यवंशी ने कम उम्र में रचे कई बड़े रिकॉर्ड
सूर्यवंशी का सफर इस समय भारतीय क्रिकेट की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। वह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। उन्होंने 15 साल 99 दिन की उम्र में ओल्ड ट्रैफर्ड में इंग्लैंड के खिलाफ खेला। इसके अलावा अंडर-19 विश्व कप फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ 80 गेंदों में 175 रन की विस्फोटक पारी खेली। यह टूर्नामेंट के फाइनल के इतिहास का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर रहा। उनके शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने खिताब जीता और सूर्यवंशी को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।

'करने कराने वाला तो ऊपर वाला है'
सूर्यवंशी की तारीफ के बाद हरभजन ने अपनी क्रिकेट यात्रा और उपलब्धियों को लेकर भी दिल की बात कही। भारत के लिए 103 टेस्ट में 417 विकेट लेने वाले हरभजन ने कहा कि वह अपनी उपलब्धियों का श्रेय खुद को नहीं देते। उन्होंने कहा, 'करने कराने वाला तो ऊपर वाला है, उसकी रजा से हो रहा है। उसकी मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता।'

हरभजन ने कहा कि इंसान जब सफल हो जाता है तो अक्सर उसे लगता है कि उसने सब कुछ खुद हासिल किया है, लेकिन वह इस सोच से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'जब हम जीवन में कुछ बन जाते हैं तो यह मानने लगते हैं कि हमने कुछ किया है, लेकिन जो कुछ होता है वह ईश्वर की इच्छा होती है।'

'ये कितना बड़ा वहम था कि मैं अहम था'
हरभजन ने इस मौके पर अपना लिखा एक उर्दू शेर भी सुनाया। उन्होंने कहा, 'ये कितना बड़ा वहम था कि मैं अहम था। ओ खुदा के बंदे, उस वाहेगुरु का शुक्र कर, ये तो उसका तेरे ऊपर रहम था।' उन्होंने अपनी उपलब्धियों को ईश्वर की इच्छा बताते हुए कहा, "मेरा मानना है कि इन उपलब्धियों के लिए मैं चुना हुआ था, चाहे वह 100 टेस्ट खेलना हो या टेस्ट में हैट्रिक लेने वाला पहला भारतीय बनना। यह उस ईश्वर की इच्छा थी जो पूरी हुई। उसकी रजा थी।'

मां और बहनों के त्याग को दिया श्रेय
हरभजन ने अपनी सफलता में माता-पिता और बहनों की भूमिका को भी याद किया। उनके पिता सरदार सरदेव सिंह का 2000 में निधन हो गया था। उनकी मां अवतार कौर ने पांच बेटियों की परवरिश के साथ हरभजन के क्रिकेट के सपने को पूरा करने में भी मदद की। हरभजन ने कहा, 'पिता साहब का आशीर्वाद था, माता जी का आशीर्वाद था। मेरी बहनों ने बहुत त्याग किया, जिसकी वजह से मुझे ये सारी उपलब्धियां और खुशियां मिलीं। मैं हर चीज के लिए बहुत आभारी हूं।'


'मैं नहीं चाहता कि रिकॉर्ड से मेरा आकलन हो'
मैदान पर आक्रामक रवैये के लिए मशहूर रहे हरभजन ने कहा कि क्रिकेट ने उन्हें जीवन में विनम्र रहना सिखाया है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की पहचान सिर्फ उसके रिकॉर्ड से नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'जीवन में विनम्र होना बहुत जरूरी है। इससे आपको चीजों को समय पर समझने में मदद मिलती है। मैं नहीं चाहता कि मुझे मेरे क्रिकेट रिकॉर्ड के आधार पर आंका जाए। क्योंकि अगर मैं एक अच्छा इंसान नहीं बन पाया तो मेरी जिंदगी व्यर्थ है। अगर कोई मुझे आंकना चाहे तो मैं चाहता हूं कि वह कहे कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि उसने कितने विकेट लिए, वह एक अच्छा इंसान रहा।' 

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