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T20 World Cup: अब तो भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार करना भी पाकिस्तान को पड़ेगा भारी! 348 करोड़ रुपये दांव पर?

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई Published by: स्वप्निल शशांक Updated Wed, 28 Jan 2026 09:06 AM IST
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सार

पाकिस्तान में T20 वर्ल्ड कप और भारत मैच बहिष्कार को लेकर चर्चाएं गर्म हैं, लेकिन ICC समझौते और प्रसारकों के आर्थिक हितों के चलते PCB पर लगभग 38 मिलियन डॉलर का कानूनी खतरा मंडरा रहा है। नकवी की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से चर्चा तो हुई, पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। आर्थिक और कानूनी जोखिमों को देखते हुए बहिष्कार की संभावना न के बराबर दिखती है।

Pakistan Risk Potential $38 Million Lawsuit Over Talks of India Match Boycott in T20 World Cup
पाकिस्तान मुश्किल में फंस चुका है - फोटो : Twitter
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विस्तार
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टी20 विश्व कप से पहले चल रहे बवाल ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। पहले बांग्लादेश भारत में मैच नहीं खेलने की जिद्द पर अड़ा रहे और फिर उसे आईसीसी ने टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। इसके बाद अब पाकिस्तान का ड्रामा चालू हो गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की, जिससे कयास लगाए जाने लगे कि पाकिस्तान या तो टूर्नामेंट का बहिष्कार करेगा या भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगा, लेकिन इस चर्चा के गंभीर कानूनी और आर्थिक नतीजे सामने आए हैं।
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ICC नियमों और कानूनी बाध्यता
दरअसल, टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर पाकिस्तान में चल रही राजनीति और कूटनीति ने क्रिकेट के मैदान से बाहर भी हलचल बढ़ा दी है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अन्य क्रिकेट बोर्ड्स की तरह आईसीसी मेंबर पार्टिसिपेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हुए हैं, जो कानूनी रूप से बाध्यकारी है। इसका मतलब है कि टूर्नामेंट या किसी मैच का बहिष्कार सीधे आईसीसी के नियमों का उल्लंघन होगा। इससे न सिर्फ पीसीबी पर कड़े प्रतिबंध लग सकते हैं, बल्कि प्रसारकों द्वारा भी मुकदमे दायर होने की पूरी संभावना है।
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भारत-पाकिस्तान मैच के आर्थिक मायने
भारत और पाकिस्तान का मैच विश्व क्रिकेट का सबसे अधिक देखा जाने वाला इवेंट माना जाता है। रेवस्पोर्ट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ इस मैच से जुड़े लगभग 38 मिलियन यूएस डॉलर (करीब 348 करोड़ रुपये) की कमाई विज्ञापन, ब्रांडेड प्रोग्रामिंग और स्पॉन्सरशिप से जुड़ी होती है। यदि पाकिस्तान यह मैच छोड़ता है तो प्रसारक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पर हर्जाने का मुकदमा दायर कर सकते हैं। इससे बोर्ड को आर्थिक बर्बादी का खतरा झेलना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'लगभग 38 मिलियन डॉलर यानी 348 करोड़ रुपये सीधे इस मैच पर निर्भर हैं।'

प्रधानमंत्री से मुलाकात और बयान
पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी ने सोमवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। बैठक में स्थिति पर चर्चा हुई, लेकिन अंतिम निर्णय अभी लंबित है। नकवी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अच्छी बैठक हुई। आईसीसी मामले पर उन्हें जानकारी दी। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी विकल्प खुले रखते हुए समाधान निकाला जाए। अंतिम निर्णय या तो शुक्रवार को या अगले सोमवार को लिया जाएगा।' हालांकि, नकवी के इस ट्वीट पर उन्हें ट्रोल का भी सामना करना पड़ा। दरअसल, नकवी ने ट्वीट कर पहले प्रधानमंत्री शहबाज की जगह प्रधानमंत्री नवाज शरीफ लिख दिया था. इसके बाद तो दुनिया भर में वह ट्रोल हो गए।

टूर्नामेंट का बहिष्कार करने पर पाकिस्तान को ये अंजाम भुगतना पड़ेगा-
  • मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर पाकिस्तान अपने गीदड़भभकी वाले रवैये पर अडिग रहा और उसने विश्व कप में खेलने से मना किया तो आईसीसी इस बार उसे कड़ा सबक सिखाएगा।
  • आईसीसी पाकिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगा सकता है जिसमें किसी भी द्विपक्षीय सीरीज का निलंबन रहना शामिल है। यानी कोई भी टीम पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेल सकेगी। 
  • इतना ही नहीं पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में विदेशी खिलाड़ियों के खेलने पर भी एक तरह से रोक लगेगी और इन खिलाड़ियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं दिया जाएगा। 
  • इसके अलावा पाकिस्तान टीम एशिया कप में भी हिस्सा नहीं ले सकेगी। ध्यान रहे कि पीसीबी का आर्थिक मॉडल आईसीसी के रेवेन्यू, पाकिस्तान सुपर लीग और प्रसारण पर ही निर्भर है।

बांग्लादेश मुद्दे से जोड़ने की कोशिश
पाकिस्तानी मीडिया में यह भी चर्चा है कि पाकिस्तान बांग्लादेश के वर्ल्ड कप से बाहर होने पर एकजुटता दिखाना चाहता है। हालांकि, बहिष्कार को लेकर जो भी राजनीतिक संदेश भेजने की कोशिश की जा रही है, वह पीसीबी को भारी कीमत में पड़ सकता है। इतना ही नहीं, कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के टूर्नामेंट को बहिष्कार करने से बांग्लादेश का रास्ता खुल जाएगा और उनकी फिर से एंट्री हो सकती है। पाकिस्तान को हाईब्रिड मॉडल के तहत अपने सभी मैच श्रीलंका में खेलने हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे में पाकिस्तान अगर बहिष्कार का फैसला लेता है तो उनकी जगह बांग्लादेश को शामिल कर लिया जाएगा। ऐसे में बांग्लादेश की श्रीलंका में खेलने की मांग भी पूरी हो जाएगी और पाकिस्तान के साथ खेला हो जाएगा।

हालांकि, अब साफ है कि भारत मैच का बहिष्कार करना पाकिस्तान के लिए सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि कानूनी और आर्थिक जोखिम है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को न सिर्फ आईसीसी का उल्लंघन करना पड़ेगा, बल्कि प्रसारकों के मुकदमों से भी जूझना पड़ेगा। इसलिए पाकिस्तान द्वारा ऐसा कदम उठाए जाने की संभावना बेहद कम है।
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