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Uttarakhand: सरकारी हाईस्कूलों में प्रधानाचार्यों के पदों पर सुप्रीम फैसले के बाद होगी सीमित विभागीय भर्ती

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 22 Mar 2026 11:17 AM IST
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सार

शिक्षकों का कहना था कि प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के सभी खाली पद पदोन्नति के हैं। सभी को पदोन्नति से भरा जाए।

After Supreme Court verdict on Principals posts departmental recruitment will be limited
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

प्रदेश के सरकारी हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक और इंटरमीडिएट कॉलेजों में प्रधानाचार्य के 93 प्रतिशत पद खाली हैं। शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत के मुताबिक इनमें से 50 प्रतिशत पदों को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद सीमित विभागीय भर्ती से भरने की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने सरकारी विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के खाली 50 प्रतिशत पदों को सीमित विभागीय परीक्षा से भरने का निर्णय लिया था। इसके लिए राज्य लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा गया लेकिन राजकीय शिक्षक संघ के विरोध के बाद सरकार ने प्रस्ताव वापस ले लिया।

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शिक्षकों का कहना था कि प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के सभी खाली पद पदोन्नति के हैं। सभी को पदोन्नति से भरा जाए। शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत का कहना है कि प्रधानाचार्य के 50 प्रतिशत पदों पर सीमित विभागीय परीक्षा कराए जाने के लिए राज्य लोक सेवा आयोग को भेजे प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के आदेश के बाद वापस लिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय पारित होने के बाद भर्ती की कार्रवाई की जा सकेगी।
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413 शिक्षक मौलिक नियुक्ति के लिए अर्ह नहीं
प्रदेश के 133 अशासकीय विद्यालयों के 413 तदर्थ प्रवक्ता और एलटी शिक्षक मौलिक नियुक्ति के लिए अर्ह नहीं हैं। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा अधिनियम 2006 की धारा 40 में तदर्थ सेवाओं के लिए विनियमितीकरण की व्यवस्था है। वर्तमान में सेवाओं के विनियमितीकरण के लिए 30 जून 1010 कट ऑफ डेट तय की गई है। ये शिक्षक इस तिथि के बाद नियुक्त होने की वजह से मौलिक नियुक्ति के लिए अर्ह नहीं हैं।

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