अमर उजाला समृद्धि संवाद: कारोबारियों ने उठाए सवाल, कहा-मंदी नहीं बैंकों का रवैया कर रहा परेशान
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अमर उजाला समृद्धि संवाद में अलग-अलग सेक्टरों से जुड़े कारोबारियों ने बैंकों के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बैंक की नीतियों के कारण कारोबार करना मुश्किल होता जा रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार के जटिल नियम परेशानी को और बढ़ा रहे हैं।
मंगलवार को पटेलनगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित समृद्धि संवाद में कारोबारियों ने कहा कि बैंक से लोन मिलना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। नए कारोबारियों के साथ ही पहले से स्थापित कारोबारियों को भी आसानी से लोन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने डिजिटल पेमेंट और प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) पर लगाए जा रहे टैक्स पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ढाई फीसदी टैक्स से कारोबारियों पर दोहरी मार पड़ रही है।
रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञों ने लोन की बहुत अधिक दरों को कम करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट पर 16 फीसदी की दर से ब्याज लगाया जा रहा है, इससे प्रोजेक्ट की लागत बढ़ रही है। जिसका सीधा असर बिक्री पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर पर अधिकतम छह से सात फीसदी ब्याज होना चाहिए। विशेषज्ञों ने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था में सुधार बेहद जरूरी है। ऐसा ना होने के चलते एनपीए के मामले भी बढ़ रहे हैं।
घबराएं नहीं, मंदी की संभावना सिर्फ 40 फीसदी
अमेरिका समेत सभी देशों में आर्थिक मंदी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। इस पर काबू पाने के लिए सभी देशों की ओर से कई कदम उठाए जा रहे हैं। भारत में भी आर्थिक मंदी आएगी, इसकी संभावना मात्र 40 फीसदी है।
आर्थिक मुद्दों को लेकर शोध करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था जेपी मार्गन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने वर्ष 2008 में आई मंदी को काबू पाने के लिए तेजी से आर्थिक सुधार के कई कदम उठाए और इस पर काबू पाया। हमारे देश की जो आर्थिक नीतियां हैं उसे देखते हुए लगता है कि देश में मंदी की संभावना बहुत कम है। यदि दौर आया भी तो केंद्र इससे निपटने में पूरी तरह सक्षम है।
उद्यमी बोले, ऋण देने को आगे आएं बैंक
संवाद के दौरान विशेषज्ञों, उद्यमियों ने इस बात पर जोर दिया कि देश के तमाम सरकारी, निजी बैंक ऋण देने के लिए आगे आएं। वैसे तो सरकार की ओर से मुद्रा लोन जैसी तमाम योजनाएं संचालित की जा रही है, लेकिन इसका अधिक फायदा लोगों को नहीं मिल रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से देश के 400 जिलों में बैंकों की ओर से ऋण मेला लगाने की बात कही है। ऐसे में प्रयास हो कि इन ऋण मेलों से अधिक से अधिक आवेदकों को ऋण आवंटित किया जाए।
रिटेल सेक्टर को मजबूती की जरूरत
संवाद के दौरान विशेषज्ञों, उद्यमियाें ने देश के रिटेल कारोबार को मजबूत करने पर भी जोर दिया। कहा कि बाजार में नकदी कम होने की वजह से लोग क्रेडिट, डेबिट कार्ड से पेमेंट कर रहे हैं। लेकिन, बैंकों द्वारा मर्चेंट से ढाई प्रतिशत की कटौती की जा रही है। लेकिन बिल्कुल भी सही नहीं है।
संवाद में इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा
रीयल एस्टेट में 2013 से मंदी
विशेषज्ञों ने बताया कि देशभर के रीयल एस्टेट सेक्टर में 2013-14 से मंदी का दौर चल रहा है। सरकार की नीतियों और नए नियमों के चलते कारोबार प्रभावित हुआ है। विशेषकर नोटबंदी और नगद लेन-देन संबंधी नियमों से पांच-छह वर्षों से इस सेक्टर में काम धीमा है।
हर सेक्टर है अलग
बाजार में कारोबार का हर सेक्टर अलग है। हर सेक्टर की अलग समस्याएं और दिक्कतें हैं। कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं, जहां बाजार उछाल की ओर है। ओवरऑल मार्केट देखें तो किसी सेक्टर में मंदी है तो कुछ में सब कुछ ठीक चल रहा है।
मुश्किल हुआ कारोबार करना
केंद्र सरकार की नीतियों के चलते कारोबार करना मुश्किल हुआ है। हालांकि इसमें ज्यादातर सुधारात्मक और सेक्टर की बेहतरी के लिए उठाए गए कदम हैं लेकिन सीधे तौर पर इससे कारोबारियों की दिक्कतें बढ़ी हैं। बैंकिंग शर्तों ने परेशानी में इजाफा किया है।
आईटी सेक्टर में नहीं दिखी सुस्ती
तमाम सेक्टरों में जहां मंदी का असर दिख रहा है, वहीं आईटी सेक्टर इससे अछूता दिख रहा है। विशेषज्ञों ने कहा कि आईटी सेक्टर में काफी समय से स्लोडाउन चल रहा है। अन्य सेक्टर में एकाएक सुस्ती आई, जो नजर भी आ रही है। वहीं, आईटी में हालिया कोई सुस्ती नहीं आई है। ऐसे में इस सेक्टर का स्लोडाउन किसी को नजर नहीं आ रहा है।
हर बाजार में नहीं दिक्कत
एक तरफ सेक्टर विशेष में कारोबार स्लो होने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ कई जगह वृद्धि जारी है। रेफ्रिजरेशन और एसी सेक्टर में इस वर्ष छह फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है। वहीं स्मार्ट टीवी का मार्केट 10 फीसदी की दर से बढ़ा है। ऑटो सेक्टर में भी कुछ कंपनियों के वाहनों की जबरदस्त बिक्री हो रही है।
शादी व त्योहारी सीजन पर नजर
सराफा सेक्टर की नजर आने वाली शादियों और त्योहारों के सीजन पर लगी हुई है। एक अध्ययन के मुताबिक पूरे सराफा कारोबार का 30 फीसदी से अधिक इसी सीजन में होता है। एक से डेढ़ माह का यह सीजन इस बाजार के लिए कई उम्मीदें लेकर आ रहा है।
लगातार बढ़ रहे सोने के दाम
भारत में सोने की खपत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। हम बड़े उत्पादक नहीं हैं। पिछले कुछ समय में सोने की मांग और कीमत लगातार बढ़ रही है। त्योहारी सीजन में इसके और बढ़ने के अनुमान हैं। ऐसे में यह कहना ठीक नहीं होगा की सराफा में सुस्ती का दौर है।
काम करने वालों के लिए बेरोजगारी नहीं
विशेषज्ञों ने बेरोजगारी के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ बेरोजगारी का मुद्दा उठाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई उद्योगों को काबिल युवा नहीं मिल पा रहे हैं। रोजगार चाहने वालों के लिए अवसरों की कमी नहीं है।
व्यापारियों की समस्याएं समझे सरकार
व्यापारी जो टैक्स देते हैं, वह देश के विकास में काम आता है, सरकार के खर्चे चलते हैं। सरकार को यह समझना होगा कि अगर बहुत ज्यादा दबाव डालेंगे तो कारोबार की कमर टूट जाएगी। इसलिए मुश्किल समय में सरकार को भी कारोबारियों का साथ देना चाहिए।
देना होगा प्लास्टिक का विकल्प
सरकार ने बिना तैयारी के प्लास्टिक और पॉलिथीन को बैन करने का फैसला किया है। लोग भी पॉलिथीन छोड़ना चाहते हैैं लेकिन उन्हें पहले इसका विकल्प दिया जाना चाहिए था। वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के बाद ही पॉलिथीन बंद होनी चाहिए।
दिल्ली-नोएडा वालों के लिए बनाए फ्लैट
उत्तराखंड में रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती का एक कारण यह भी है कि यहां फ्लैट के लिए लोकल ग्राहक नहीं हैं। ज्यादातर बिल्डर्स ने यह सोचकर निर्माण कर दिए कि दिल्ली-नोएडा वाले ग्राहकों को बेच देंगे। वहां जमीन महंगी होने के कारण लोग फ्लैट खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं, लेकिन दून में आज भी जमीन आम आदमी की पहुंच में है। इसलिए स्थानीय ग्राहक फ्लैट खरीदने में बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते हैं।
मंदी पर सच्चाई सामने रखे सरकार
सोशल मीडिया पर बाजार और मंदी को लेकर कई तरह के झूठ व भ्रम फैलाए जा रहे हैं। बाजार में मंदी, बेरोजगारी और संकट के सैकड़ों समाचार व सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं, जिससे पूरे माहौल पर दबाव बन रहा है। मंदी की आशंका से बाजार सहम रहा है। ग्राहक भी खरीदारी से बच रहा है। ऐसे समय में सरकार को चाहिए कि वह सच्चाई आम लोगों के सामने रखे। झूठी सूचनाओं का खंडन करे और सही जानकारी दी। इससे आम ग्राहक को खरीदारी का हौसला मिलेगा और बाजार में बेहतरी आएगी।