Uttarakhand Politics: सहसपुर सीट; हरक सिंह रावत के बयान से सियासी हलचल तेज, चार चुनाव से बुलंद हो रहा भगवा
सहसपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के लिए लगातार मजबूत रहा चुनावी समीकरण इस बार दिलचस्प होता दिख रहा है। तीन बार के विधायक सहदेव पुंडीर के साथ ही पार्टी के भीतर कई अन्य दावेदार भी टिकट की दौड़ में नजर आ रहे हैं। ऐसे में आगामी चुनाव में भाजपा के सामने अपने ही गढ़ में दावेदारों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
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उत्तराखंड राज्य गठन के बाद सहसपुर विधानसभा ने कई प्रयोग देखे हैं। इस सीट पर अब तक हुए पांच चुनावों में भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला रहा है। यहां से चार बार भाजपा व एक बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है। लेकिन 2027 के लिए सहसपुर सहज नहीं दिख रही है।राज्य गठन से पहले सहसपुर सीट चकराता विधानसभा का हिस्सा थीं।
2002 में पहले विस चुनाव में कांग्रेस टिकट से साधु राम ने जीत हासिल की। इसके बाद यह सीट कांग्रेस के हाथ नहीं आ पाई। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने सहसपुर को आशियाने के रूप में तलाशा, लेकिन चुनाव में सफलता नहीं मिली। 2017 से पूर्व मंत्री किशोर उपाध्याय ने इस सीट से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा था, मगर भाजपा के सहदेव पुंडीर से पराजय मिली।
2007 से 2022 तक हुए चार चुनावों में सहसपुर सीट पर भाजपा का कब्जा है। सहदेव पुंडीर ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है। कांग्रेस ने 2012 व 2022 के चुनाव में आर्येंद्र शर्मा दांव लगाया। लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली। अब कांग्रेस से पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के सहसपुर सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा है।
हाल ही में रावत ने सहसपुर क्षेत्र में संपर्क कार्यक्रम में चुनाव लड़ने के संकेत देते हुए कहा था कि पार्टी हाईकमान जिस भी सीट से चुनाव लड़ने को कहेगी, उसी सीट से चुनाव लड़ेंगे। उनके बयान से कांग्रेस में सियासी हलचल तेज है। सहसपुर सीट पर पहले से टिकट की दावेदारी कर रहे आर्येंद्र शर्मा कर रहे हैं। इसके अलावा राकेश नेगी, गुलजार अहमद के नाम की चर्चा है।
विधायक के अलावा अपने ही गढ़ में इस बार भाजपा से कई दावेदार
भाजपा के गढ़ सहसपुर में अगले चुनाव से पहले कई दावेदार वर्तमान विधायक के सामने मैदान में उतर आए हैं। यहां लगातार तीन बार से सहदेव पुंडीर विधायक हैं। ऐसे में अगले चुनाव में संगठन उन पर ही दांव खेलेगा या किसी नए चेहरे को मौका देगा, कहना मुश्किल है। लेकिन उम्मीदें सभी की जवां हो रही हैं।
सहसपुर विधानसभा के इतिहास को देखें तो यहां 2002 के चुनाव में कांग्रेस के साधुराम जीते थे। इसके बाद 2007 में भाजपा के राजकुमार, 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार भाजपा के सहदेव पुंडीर विधायक चुने गए हैं। 2017 और 2022 के चुनाव की तुलना करें तो 2017 में सहदेव पुंडीर की जीत का मार्जिन 17.34 प्रतिशत था, लेकिन 2022 में यह घटकर 6.68 प्रतिशत रह गया था। इस लिहाज से संगठन के भीतर कई और नेता अब अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुट गए हैं।
भाजपा नेता नवीन ठाकुर, पूर्व दर्जाधारी भुवन विक्रम डबराल, ओमबीर सिंह राघव, पूर्व जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी अग्रवाल और विजयपाल सिंह बड़थ्वाल सहसपुर विधानसभा में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। सभी नेता यहां प्रमुखता से तैयारी में जुटे हुए हैं। अब यह संगठन को तय करना है कि सहदेव पुंडीर लगातार चौथी बार चुनाव मैदान में होंगे या पार्टी किसी नए चेहरे पर दांव खेलेगी।
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2022 के सहसपुर विधानसभा चुनाव पर एक नजर
कुल मतदाता : 1,73,115
कुल मतदान : 1,23,465
विजेता : सहदेव पुंडीर, कुल वोट 64,008
हारे : आर्येंद्र शर्मा, 55,653 वोट
हार-जीत का अंतर : 8355(6.68 प्रतिशत)